फ़्रांस में लू से 58 लोगों की मौत, केंद्र की मप्र सहित 12 राज्यों के लिए आकस्मिक कृषि योजना, गिर में शेरोन की संख्या बढ़कर 891 हुई, मप्र में बिना उगे बिकी 4.5 करोड़ रु की फसल। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
यूरोप इस समय जानलेवा लू की चपेट में है, जिससे अकेले फ्रांस में 58 लोगों की मौत हो चुकी है और इटली-ब्रिटेन में रेड अलर्ट जारी किया गया है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिसे ‘ओमेगा ब्लॉक’ नामक विशेष मौसमी पैटर्न का परिणाम माना जा रहा है।
एल नीनो के कारण कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश सहित 12 राज्यों के 315 संवेदनशील जिलों के लिए एक विशेष आकस्मिक योजना (Contingency Plan) शुरू की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्च स्तरीय बैठक में इस स्थिति की समीक्षा की ताकि खरीफ फसलों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सके।
गुजरात के गीर क्षेत्र में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है, लेकिन विशेषज्ञों ने उनके प्राकृतिक आवास के कम होने पर गहरी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 60% शेर अब सुरक्षित वन क्षेत्रों से बाहर रह रहे हैं, जिससे मानव-शेर संघर्ष बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
तमिलनाडु ने कर्नाटक से कावेरी नदी का अधिक पानी छोड़ने की अपनी मांग तेज कर दी है, जबकि कर्नाटक ने मानसून की कमी और अपने जलाशयों में कम जल स्तर का हवाला दिया है। इस मुद्दे पर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की बैठक में चर्चा हुई, लेकिन दोनों राज्यों के बीच असहमति बनी हुई है।
मध्य प्रदेश के भिंड, मुरैना और राजगढ़ जिलों में फर्जी किसानों द्वारा बिना फसल उगाए करोड़ों रुपये की सरकारी सहायता प्राप्त करने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच के बावजूद, इन संदिग्धों को लगभग 4.82 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है।
ग्वालियर में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्रों में अवैध रेत खनन को रोकने के लिए एक संयुक्त प्रवर्तन योजना को अंतिम रूप दिया गया है। इसके तहत ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग और घाटों पर डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम का उपयोग करने की रणनीति बनाई गई है।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी से जानिए केंद्र और राज्य स्तर पर किसानों के लिए क्या घोषणाएं हुई हैं। साथ ही हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट बताएंगे कि मानसून के लिए मध्य प्रदेश कितना तैयार?
केंद्र की नई कृषि पहल और मप्र से वित्तीय राहत
केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार दोनों ने किसानों को वित्तीय स्थिरता और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
केंद्र सरकार: पीएम-किसान और आधुनिकीकरण
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत केंद्र सरकार ने 23वीं किस्त जारी की है। इसके तहत 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि सीधे भेजी गई है।
सहायता का उद्देश्य: यह योजना किसानों को बीज, उर्वरक और बुवाई जैसे कृषि कार्यों के लिए ₹6,000 सालाना (तीन किस्तों में) की नकद सहायता प्रदान करती है।
दीर्घकालिक लक्ष्य: सरकार फसल बीमा, प्राकृतिक खेती और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है।
मध्य प्रदेश सरकार: ऋण अदायगी में बड़ी राहत
नीति में बदलाव: राज्य सरकार ने 0% ब्याज पर मिलने वाले अल्पकालीन फसली ऋण की अदायगी के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
समयसीमा में विस्तार: अब किसानों को कर्ज चुकाने के लिए 6 महीने की समयसीमा में बंधे रहने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि उन्हें पूरे एक वर्ष का समय मिलेगा।
आर्थिक लाभ: इस विस्तार से किसान फसल कटाई के तुरंत बाद कम कीमतों पर अपनी उपज बेचने के दबाव से बच सकेंगे और बेहतर बाजार भाव मिलने तक इंतजार कर सकेंगे。
लाभार्थी: सरकार के अनुसार, इस फैसले से राज्य के लगभग 35 से 40 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
केंद्र की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता और राज्य की ऋण अदायगी में दी गई राहत को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को अधिक स्थिर एवं किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मानसून का आगमन और बुनियादी ढांचे की चुनौतियां
मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक गर्मी से राहत की उम्मीद तो लाती है, लेकिन यह राज्य के शहरी बुनियादी ढांचे की तैयारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
मानसून का पूर्वानुमान और प्रवेश
आगमन की समयसीमा: मानसून के अगले 50 घंटों के भीतर मंडला-बालाघाट मार्ग से मध्य प्रदेश में प्रवेश करने की उम्मीद है।
वर्तमान स्थिति: प्री-मानसून गतिविधियाँ पहले ही तेज हो चुकी हैं, भोपाल सहित कई शहरों में बादल गरजने, बिजली चमकने और हल्की बारिश का सिलसिला जारी है।
ऐतिहासिक संदर्भ: मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार बंगाल की खाड़ी वाली मानसून शाखा अधिक सक्रिय है। पिछले दो दशकों में, लगभग 80% बार मानसून ने इसी मार्ग से राज्य में प्रवेश किया है, जिससे इस साल भी अच्छी बारिश की उम्मीद है।
बुनियादी ढांचे की कमजोरियां और जोखिम
स्रोतों के अनुसार, सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या चल रहे बड़े निर्माण कार्यों के बीच शहर भारी बारिश के लिए तैयार हैं।
भोपाल की तैयारी: राजधानी में मेट्रो फ्लाईओवर कॉरिडोर और सड़क चौड़ीकरण के कई प्रोजेक्ट एक साथ चल रहे हैं। सुभाष नगर और पुराने शहर जैसे इलाकों में पिलर खड़े हैं और सड़कें खुदी हुई हैं, जिससे यातायात पहले से ही मुश्किल है और बारिश के बाद स्थिति और बिगड़ सकती है।
विशिष्ट खतरनाक क्षेत्र: अयोध्या बाईपास पर 10-लेन प्रोजेक्ट और रत्नीगढ़ में सड़क चौड़ीकरण के कारण कई डायवर्जन बने हुए हैं और लाइटिंग भी प्रभावित हुई है। भारी बारिश की स्थिति में यहाँ जलभराव और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।
अन्य शहर (उज्जैन और इंदौर):
उज्जैन में लगभग ₹13,000 करोड़ के प्रोजेक्ट (पुल, सुरंग, रोपवे) चल रहे हैं, जिसके कारण कई स्थानों पर गड्ढे खुदे हुए हैं,।
इन्दौर की एक दुखद घटना का उल्लेख किया गया है जहाँ सड़क निर्माण के लिए खुदे गड्ढे में गिरने से एक बाइक सवार की मौत हो गई थी।
पिछले साल भोपाल में बारिश के कारण तीन बार सड़कें धंसने की घटनाएं हुई थीं, जिससे काफी नुकसान हुआ था।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।




