विराम के बाद थोड़ा आगे बढ़ा दक्षिण-पश्चिम मानसून, मेघालय में भूस्खलन के बाद अलर्ट जारी, हरिद्वार का गंगाजल अब आचमन के लायक भी नहीं, इंदौर में मेस का खाना खाने के बाद 100 से अधिक बच्चे बीमार। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों, खासकर मुंबई और पुणे क्षेत्र में अपेक्षा से धीमी रही है। मौसम विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे जल भंडार और कृषि को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
मेघालय में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। लोकप्रिय पर्यटन स्थलों और पहाड़ी इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है तथा पूर्वोत्तर राज्यों के लिए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है।
महाराष्ट्र के मेलघाट क्षेत्र में पेयजल संकट को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी यदि नागरिकों को पीने के पानी के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़े, तो यह शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
IIT हैदराबाद की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, गंगा नदी का जल तेजी से प्रदूषित और गर्म हो रहा है, जिसका औसत तापमान 2009 से 2025 के बीच 1.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया है। अत्यधिक प्रदूषण और सीवर के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर गिर गया है, जिससे उत्तराखंड के देवप्रयाग से हरिद्वार तक का गंगाजल अब पीने या आचमन के योग्य नहीं रहा है।
इंदौर के शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल में मेस का खाना खाने और पानी पीने के बाद 100 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। खाद्य विभाग की जांच में स्कूल के किचन से एक्सपायरी डेट के मसाले और नमकीन बरामद हुए हैं, जिसके बाद किचन को सील कर दिया गया है।
झाबुआ जिले में मछलियों के प्रजनन काल (क्लोज सीजन) को देखते हुए प्रशासन ने 15 अगस्त तक नदियों और जलाशयों में मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद, अनास नदी में सैकड़ों मछुआरे नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मछली पकड़ रहे हैं, जबकि नियमों का उल्लंघन करने पर एक साल की जेल या 5,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी से जानिए केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत नहर के लिए कैसे होगा भूमि अधिग्रहण?
केन-बेतवा लिंक परियोजना: नहर के लिए भूमि अधिग्रहण
केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत, केन नदी से बेतवा नदी तक बनने वाली लिंक नहर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। वर्तमान में छतरपुर जिले के 54 गांवों में नहर निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है।
नई गाइडलाइन के अनुसार, इन गांवों के किसानों को सरकारी जमीन की दर का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक न्यूज़ रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जिन लोगों की जमीन नहर के लिए अधिग्रहित की जा रही है, उन्हें बांध निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि की तुलना में प्रति एकड़ अधिक मुआवजा मिलेगा।
बुनियादी ढांचा और तकनीकी विशेषताएं
परियोजना में दो नदी घाटियों के बीच पानी के हस्तांतरण के लिए व्यापक इंजीनियरिंग कार्य शामिल हैं:
दौधन बांध: इस परियोजना के प्राथमिक घटक के रूप में केन नदी पर दौधन बांध का निर्माण किया जा रहा है।
लिंक नहर: दौधन बांध से बरुआ सागर के पास बेतवा नदी तक पानी पहुंचाने के लिए 219 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जाएगी।
क्षेत्रीय फोकस: नहर की कुल लंबाई में से सबसे लंबा हिस्सा—107 किलोमीटर—छतरपुर जिले के भीतर बनाया जाएगा।
योजना और कार्यान्वयन
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट अथॉरिटी ने विकास कार्य को दो हिस्सों में डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) में विभाजित किया है:
प्रथम चरण: पहली डीपीआर केन नदी से छतरपुर जिले की सीमा में धसान नदी तक के हिस्से को कवर करती है।
निविदा (टेंडर): निर्माण कार्य शुरू करने के लिए सबसे पहले इसी हिस्से का टेंडर जारी किया जाएगा।
विभागीय भूमिका: जल संसाधन विभाग उन 54 चिन्हित गांवों में भूमि अधिग्रहण के प्रबंधन के लिए मुख्य एजेंसी है जहां से नहर गुजरेगी।
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