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हिंदूकुश हिमालय में मानसून, गर्म और सूखा रहने की चेतावनी

सुबह की शुरुआत कीजिए ग्राउंड रिपोर्ट के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट के साथ। यहां आपको पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और मौसम की ताज़ा खबरें मिलेंगी, सिर्फ 10 मिनट में।
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मानसून का गर्म-सूखा अनुमान, फ्लैश फ्लड और ग्लेशियर झील फटने का खतरा, इथेनॉल पर एक्साइज़ छूट, दिल्ली में फायर सेफ्टी नियम और यमुना फ्लड प्लेन पुनर्वास प्लान—सुनिए पर्यावरण आज।

आज की हेडलाईन्स

इथेनॉल मिश्रण पर एक्साइज़ छूट: नए फ्यूल स्टैंडर्ड्स को मंज़ूरी मिलने के बाद सरकार ने 22%, 25%, 27% और 30% इथेनॉल वाले पेट्रोल मिश्रणों पर एक्साइज़ ड्यूटी से छूट दी है। इससे E20 से ज़्यादा इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा मिलेगा, कच्चे तेल का आयात घटेगा, घरेलू बायोफ्यूल बढ़ेगा और एनर्जी सिक्योरिटी मज़बूत होगी।


मानसून का अपडेट: मानसून की बंगाल की खाड़ी वाली ब्रांच बिहार पहुंच गई है, जबकि मुंबई में मानसून पीछे है। अगले 3 दिन में झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में एंट्री संभव है। 4 जून को केरल में एंट्री के बाद 8 दिन में मानसून 17 राज्यों तक पहुंच चुका है। दिल्ली-NCR और हरियाणा में तेज हवाओं से गर्मी से राहत मिली, जबकि बिहार के 12 जिलों में आंधी-बारिश के दौरान बिजली गिरने से 10 लोगों की मौत हो गई।


दिल्ली में फायर सेफ्टी नियम: दिल्ली की 90% बिल्डिंग्स में फायर सेफ्टी इंतज़ाम नहीं हैं। सरकार अब सभी गेटेड सोसाइटी, रेसिडेंशियल बिल्डिंग और घरों में स्मोक डिटेक्टर व फायर एक्सटिंग्विशर अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है, जो अभी सिर्फ कमर्शियल और 15 मीटर से ऊंची बिल्डिंग्स में ज़रूरी है।


गुरुग्राम का गर्मी से राहत प्लान: गुरुग्राम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने 5 करोड़ रुपए का प्लान बनाया है, जिसके तहत कूल रुफ, ग्रीन रुफ, हाइड्रेशन पॉइंट और पब्लिक टॉयलेट बनेंगे, साथ ही ट्रेडिशनल वॉटर बॉडीज़ को भी रीजुवनेट किया जाएगा।


यमुना फ्लड प्लेन पुनर्वास: दिल्ली की यमुना फ्लड प्लेन के O ज़ोन में रह रहे 5 लाख लोगों के पुनर्वास के लिए 1 लाख फ्लैट्स की ज़रूरत होगी। मकसद है फ्लड प्लेन को खाली कराकर उसे पुराने रूप में लाना, ताकि बाढ़ से नुकसान रुके और इकोसिस्टम बहाल हो सके।


हिंदूकुश हिमालय में सूखे की चेतावनी

वाहिद भट्ट, ग्राउंड रिपोर्ट

Glaciers cling to the peaks above Kashmir's alpine meadows. Researchers say warming temperatures are causing rapid glacier retreat across the region.
Glaciers cling to the peaks above Kashmir’s alpine meadows. Researchers say warming temperatures are causing rapid glacier retreat across the region. Photo credit: Wahid Bhat/Ground Report

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 का मानसून हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र के बड़े हिस्से में सामान्य से ज़्यादा गर्म और सूखा रह सकता है। साथ ही, कम समय में बहुत तेज़ बारिश होने का खतरा भी बना रहेगा।

11 जून 2026 को जारी इस “HKH मानसून आउटलुक 2026” में कहा गया है कि भूटान, नेपाल, भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में इस सीज़न में सामान्य से कम बारिश और ज़्यादा तापमान रह सकता है। प्रशांत महासागर में बन रही ‘अल नीनो’ जैसी परिस्थितियां इस मौसम को प्रभावित कर सकती हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि लंबे सूखे के बीच अचानक बहुत भारी बारिश हो सकती है, जिससे एक ही सीज़न में सूखा और बाढ़ दोनों का खतरा बना रहेगा। इसके अलावा ग्लेशियर झीलों के अचानक फटने (GLOF) का खतरा भी बढ़ सकता है—यह तब होता है जब झीलों में जमा पानी एक झटके में बहुत तेज़ी से और तेज़ रफ्तार से बाहर निकलता है, जिससे नीचे के इलाकों में भारी तबाही हो सकती है।

हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र आठ देशों में फैला है और ध्रुवीय इलाकों के बाहर बर्फ और ग्लेशियर का सबसे बड़ा भंडार यहीं है। सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, यांगत्ज़े और मेकांग जैसी एशिया की बड़ी नदियां यहीं से निकलती हैं, जिन पर अरबों लोगों की ज़िंदगी निर्भर है।

यह रिपोर्ट कई संस्थाओं के पूर्वानुमानों को मिलाकर तैयार की गई है, जिसमें ICIMOD का अपना सिस्टम, चीन की एकेडमी ऑफ साइंसेज़, एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन क्लाइमेट सेंटर और यूरोपियन कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस शामिल हैं।

ज़्यादातर पूर्वानुमानों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है, सिवाय अफगानिस्तान, म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों के, जहां बारिश सामान्य या उससे ज़्यादा हो सकती है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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