मुंबई में सिर्फ 45 दिन का पानी भंडार बचा, दिल्ली होटल आग हादसे में 21 लोगों की मौत, एनसीआर में ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम और पशु आहार में यूरिया मिलावट जैसे बड़े मुद्दों पर सुनिए आज का “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट।
मुख्य सुर्खियां
दिल्ली के मालवीय नगर में होटल में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। पुलिस ने होटल मालिक को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है।
मुंबई की झीलों में सिर्फ 45 दिन का पानी बचा है। मौसम विभाग ने सूखे का अलर्ट दिया है, जिससे बीएमसी की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने 2027 तक पानी की जरूरत पूरी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
राजस्थान में बिक रहे कई पशु आहार ब्रांड जांच में फेल हुए हैं। कुछ सैंपल में 4 प्रतिशत तक यूरिया मिला, जिससे दूध और जानवरों की सेहत पर खतरा बढ़ा है। सरकार ने जांच और कार्रवाई तेज करने की बात कही है।
सरकार ने इस सीजन में 3.5 करोड़ टन से ज्यादा गेहूं खरीदा है। यह पिछले साल और तय लक्ष्य दोनों से ज्यादा है। पंजाब और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा खरीद हुई है।
केंद्र सरकार ने ओडिशा में नए तटीय हाईवे को मंजूरी दी है। यह सड़क रामेश्वरम से पारादीप तक बनेगी और कई जिलों को जोड़ेगी। सरकार का कहना है कि इससे व्यापार और यात्रा दोनों आसान होंगे।
नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जलवायु रिसर्च के उपकरण बनाने में पीछे है। वैज्ञानिकों को अब भी विदेशों के महंगे उपकरणों पर निर्भर रहना पड़ता है। रिपोर्ट ने देश में रिसर्च और तकनीक मजबूत करने की जरूरत बताई है।
महाराष्ट्र कांग्रेस ने नई कर्ज माफी योजना पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि सख्त नियमों की वजह से आधे किसान योजना से बाहर हो जाएंगे। सरकार ने योजना को किसानों के लिए राहत बताया है।
उत्तर प्रदेश के 8 एनसीआर जिलों में बिना पीयूसी वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा। यह नियम 1 अक्टूबर से लागू होगा। सरकार ने इसे प्रदूषण कम करने की बड़ी पहल बताया है।
विस्तृत चर्चा
दिल्ली होटल में भीषण आग, 21 की मौत
आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट से जानिए दिल्ली होटल आग हादसे में सामने आई सुरक्षा लापरवाही और इसके बड़े सवाल। साथ ही हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी बता रहे हैं इस साल गेहूं खरीद में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और किसानों पर उसके असर की पूरी कहानी।
दिल्ली के मालवीय नगर में हुए दर्दनाक आग हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक गेस्ट हाउस में लगी भीषण आग में अब तक कम से कम 21 लोगों की मौत हो चुकी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह हादसा सिर्फ आग का नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और नियमों की खुली अनदेखी का मामला है।
यह हादसा दक्षिण दिल्ली के हौज खास इलाके में मौजूद फ्लस्टे नाम के बेड एंड ब्रेकफास्ट यानी बी एंड बी में हुआ। सुबह करीब 8:40 बजे आग लगी और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं और लपटों से भर गई। रेस्क्यू के दौरान कई लोग कमरों में फंसे मिले, जबकि कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगाई।
जांच में पता चला है कि जिस इमारत को सिर्फ छह कमरों की अनुमति मिली थी, वहां 26 कमरे चलाए जा रहे थे। बेसमेंट से लेकर ऊपरी मंजिलों तक हर जगह कमरे बनाए गए थे। इतना ही नहीं, ग्राउंड फ्लोर पर सिर्फ चाय और स्नैक्स की अनुमति थी, लेकिन वहां पूरा रेस्टोरेंट चल रहा था।
अधिकारियों के मुताबिक इमारत के पास न तो मंजूर बिल्डिंग प्लान था, न फायर एनओसी और न ही जरूरी सुरक्षा इंतजाम। बिल्डिंग में सिर्फ एक सीढ़ी थी, जिसका इस्तेमाल एंट्री और एग्जिट दोनों के लिए होता था। बेसमेंट का इमरजेंसी रास्ता बंद मिला और आग लगते ही मुख्य सीढ़ी धुएं और आग की चपेट में आ गई।
फायर अधिकारियों का कहना है कि इमारत चारों तरफ से बंद थी और वेंटिलेशन बेहद खराब था। कई खिड़कियां सील थीं, जिससे धुआं तेजी से फैल गया। कुछ कमरों में डिजिटल लॉक लगे थे और लोगों को दरवाजे खोलने में भी दिक्कत हुई। जब तक लोग बाहर निकलने की कोशिश करते, तब तक आग पूरी तरह फैल चुकी थी।
स्थानीय लोगों ने राहत कार्य में बड़ी भूमिका निभाई। कई लोगों ने नीचे गद्दे बिछाए ताकि लोग कूदकर अपनी जान बचा सकें। अब तक 58 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया है। मरने वालों में 12 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें लीबिया, नाइजीरिया और बांग्लादेश के नागरिक शामिल हैं।
पुलिस ने गेस्ट हाउस के मालिक लोकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। उनके खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया गया है। इस हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने शहर के सभी गेस्ट हाउस और बी एंड बी प्रॉपर्टीज की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रियल जांच का ऐलान करते हुए कहा है कि फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यह हादसा एक बार फिर दिखाता है कि फायर सेफ्टी और बिल्डिंग नियम सिर्फ कागजी प्रक्रिया नहीं हैं। जब इनकी अनदेखी होती है, तब ऐसी त्रासदियां सामने आती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने हादसे पर दुख जताया है।
देश में गेहूं की रिकार्ड खरीद
साल 2026-27 के रबी मार्केटिंग सीजन में सरकार की गेहूं खरीद में पिछले साल के मुकाबले 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस सीजन में अब तक कुल सरकारी खरीद 35 मिलियन टन (MT) को पार कर चुकी है। यह आंकड़ा सरकार द्वारा तय किए गए 34.5 मिलियन टन के लक्ष्य और पिछले साल की कुल 30 मिलियन टन की खरीद, दोनों से अधिक है।
राज्यों के स्तर पर, पंजाब इस सीजन में भी गेहूं खरीद में सबसे आगे रहा है, जहाँ कुल 12.1 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया, जो पिछले साल के 11.9 मिलियन टन से अधिक है। इसके बाद मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद में एक बड़ा उछाल देखा गया है, जो पिछले साल के 7.8 मिलियन टन से बढ़कर इस बार 10.4 मिलियन टन तक पहुँच गई है। देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं खरीद का काम पूरा हो चुका है।
इस साल देश में गेहूं का कुल घरेलू उत्पादन मजबूत रहा है और यह लगभग 120.65 मिलियन टन दर्ज किया गया है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण स्थानीय स्तर पर फसलों को हुए नुकसान के बावजूद यह उत्पादन हासिल हुआ। इस मजबूत उत्पादन के कारण खुली मंडियों में गेहूं के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चल रहे थे, जिसने सरकारी केंद्रों पर अधिक खरीद दर्ज करने में मदद की।
गेहूं की यह पूरी खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) और अन्य राज्य स्तरीय सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की गई है। इस सरकारी खरीद का मुख्य उद्देश्य ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम’ (NFSA) और सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनाज की जरूरतों को पूरा करना है। आमतौर पर गेहूं खरीद का सीजन अप्रैल से मार्च तक चलता है, लेकिन खरीद का अधिकांश हिस्सा शुरुआती कुछ महीनों में ही पूरा हो जाता है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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