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अयोध्या बायपास 10 लेन सड़क को एनजीटी की मंज़ूरी

देश के सबसे गर्म शहर बांदा से लेकर भोपाल के अयोध्या बायपास तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

यूपी का बांदा लगातार 5वें दिन सबसे गर्म, केंद्रीय मंत्री परिषद की बैठक में ईधन संकट पर चर्चा, रिकॉर्ड 274 पर्वतारोहियों ने माउंट एवरेस्ट फतह किया और भोपाल में अयोध्या बायपास 10 लेन रोड को एनजीटी की मंज़ूरी। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ। 


मुख्य सुर्खियां

उत्तर प्रदेश का बांदा शहर 47.6 डिग्री तापमान के साथ लगातार पांचवें दिन देश का सबसे गर्म स्थान रहा। इसके बाद मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों में भीषण लू की स्थिति बनी हुई है और लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


पश्चिम एशिया संकट और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, विशेष रूप से एलपीजी के विकल्प के रूप में बायोगैस को तेजी से अपनाने का निर्देश दिया है। सरकार स्थानीय स्तर पर पेट्रो उत्पादों के उत्पादन को बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है।


एक ही दिन में रिकॉर्ड 274 पर्वतारोहियों ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने में सफलता हासिल की। इसी सप्ताह अनुभवी गाइड कामी रीता शेरपा ने 32वीं बार शिखर पर चढ़कर अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ा है।


दिल्ली में भीषण गर्मी और पानी के गिरते स्तर के कारण संजय झील में सैकड़ों मछलियां मृत पाई गई हैं। इसके कारणों में पाइपलाइन की मरम्मत के कारण पानी की कमी और अनुपचारित सीवेज का बहाव शामिल बताया जा रहा है।


कांगो में इबोला प्रकोप को लेकर फैले गुस्से और डर के कारण लोगों ने एक उपचार केंद्र में आग लगा दी। इसके अलावा, बर्लिन के एक अस्पताल में इबोला से संक्रमित एक अमेरिकी मरीज के परिवार को एहतियातन आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।


मध्य प्रदेश के 35 शहरों में रात का तापमान 30 डिग्री के पार पहुंच गया है, और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ पल्लव जैन बता रहे हैं भोपाल के अयोध्या बायपास को मंज़ूरी देते हुए एनजीटी ने क्या कहा? साथ ही असोसिएट एडिटर वाहिद भट बता रहे हैं पहली इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस समिट के स्थगन के बारे में। 

आईबीसीए समिट का स्थगन और नई योजना

अगले महीने जून में नई दिल्ली में आयोजित होने वाला पहला इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) समिट फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, यह समिट पहले 1 और 2 जून को होना था। इसे चौथे भारत-अफ्रीका फोरम समिट के साथ आयोजित किया जा रहा था क्योंकि अफ्रीका के कई देश बिग कैट्स के लिए महत्वपूर्ण हैबिटेट (प्राकृतिक आवास) माने जाते हैं। अफ्रीकी देशों और अफ्रीकी संघ की बेहतर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, उनके साथ परामर्श के बाद इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। समिट की नई तारीखों की घोषणा जल्द ही की जाएगी।

समिट के मुख्य उद्देश्य और ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’

इस समिट का एक बड़ा केंद्र बिंदु ‘दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन बिग कैट कंजर्वेशन’ को अपनाना था। इस डिक्लेरेशन का मुख्य मकसद निम्नलिखित है:

बिग कैट्स के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करना।

संरक्षण के लिए साझा प्राथमिकताएं तय करना।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समिट में लगभग 13 देशों के राष्ट्राध्यक्षों (Heads of State) के शामिल होने की उम्मीद थी।

इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) का परिचय

स्थापना: भारत ने साल 2024 में आधिकारिक तौर पर IBCA की स्थापना की थी। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2023 में मैसूर में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के 50 साल पूरे होने के अवसर पर इसे लॉन्च किया था।

नोडल संस्था: नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) इसकी नोडल संस्था है।

लक्ष्य: बाघ, तेंदुआ, शेर, स्नो लेपर्ड और चीता जैसे बिग कैट्स के संरक्षण के लिए सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना।

सदस्यता: अब तक 25 देश इस अलायंस का हिस्सा बन चुके हैं और 5 ऑब्जर्वर देश भी इससे जुड़े हैं। सऊदी अरब के भी जल्द ही इसमें शामिल होने की संभावना है।

वाइल्ड लाइफ डिप्लोमेसी और भविष्य की चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change), प्राकृतिक आवासों का नुकसान (Habitat Loss) और मानव-वन्यजीव संघर्ष (Wildlife Conflict) के इस दौर में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बहुत जरूरी हो गया है। इसी कारण IBCA समिट को ‘वाइल्ड लाइफ डिप्लोमेसी’ के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। भारत सरकार ने दोहराया है कि वह जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर काम कर रही है।


अयोध्या बायपास रोड को एनजीटी की हरी झंडी

नैशनल ग्रीन ट्राईब्यूनल ने आखिरकार भोपाल के अयोध्या बायपास चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट के खिलाफ पूरे भोपाल में प्रोटेस्ट्स हुए थे, लोगों ने चिपको आंदोलन किया था और एनजीटी ने लंबे वक्त तक इस प्रोजेक्ट पर स्टे लगाकर रखा था। आज भोपाल के वो लोग हार गए जो इस मार्ग पर लगे वर्षों पुराने हरे भरे पेड़ों को बचाना चाहते थे।

एनजीटी का आदेश 

भोपाल में आसाराम तिराहा से रत्नागिरी तिराहा तक 16 किमी लंबे अयोध्या बायपास को 4 लेन से बढ़ाकर 10 लेन करने के लिए 836 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की कानूनी बाधाएं पूरी तरह समाप्त हो गई हैं, एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने पेड़ कटाई के खिलाफ दायर याचिका का अंतिम निपटारा करते हुए प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। 

हालांकि कोर्ट ने यहां की हरियाली बचाने के लिए सख्त निर्देश भी दिए हैं। अगर पौधारोपण और वनीकरण में लापरवाही बरती गई तो सीधे कॉंट्रैक्टर का भुगतान रोका जाएगा।

7871 पेड़ काटे जाएंगे इसके बदले 80 हज़ार पौधे लगाने होंगे। और पहले वर्ष 90 फीसदी पौधों के जीवित रहने पर ही कॉंट्रेक्टर को पेमेंट मिलेगा। 

हर पौधे की जियो टैगिंग होगी, और अगले 15 वर्षों  तक ड्रोन और सैटेलाईट से मॉनिटरिंग होगी। 

मॉनसून शुरु होते ही पौधारोपण शुरु होगा। 6 फीट से कम हाईट वाले पौधे नहीं लगेंगे। नेटिव प्लांट जैसे पीपल ,नीम, अर्जुन, शीशम, करंज, बबूल लगाना होगा। ऑर्नमेंटल प्लांट नहीं लगाए जा सकेंगे जैसे पाल्म ट्री। 

इसमें से 10 हज़ार पौधे तो नई सड़क के किनारे लगेंगे बाकी के पौधे राजस्व विभाग से 85 हेक्टेयर ज़मीन लेगी, उस पर लगेंगे। यह ज़मीन हुज़ूर तहसील के झिरनिया और झागरिया खुर्द, और नगर निगम के पार्क में लगेंगे। 

क्यों ख़ास है प्रोजेक्ट?

यह पहला ऐसा प्रोजेक्ट है जो नैशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया शहर के अंदर की सड़क बना रही है। प्रोजेक्ट के रुके होने से हर दिन करोड़ों का नुकसान हो रहा था। इस प्रोजेक्ट को ज़रुरी बताया गया है क्योंकि इस रोड पर बड़ी मात्रा में हैवी वहीकल्स गुज़रते हैं जिससे स्थानीय ट्रैफिक को समस्या होती है और ऐक्सीडेंट का खतरा रहता है। 

भारी वाहनों के प्रदूषण को मुख्य शहर से दूर रखने के लिए यह प्रोजेक्ट ज़रुरी माना गया है। 

एक और जो प्रावधान एनजीटी ने इस प्रोजेक्ट के लिए किया है वो यह है कि सड़क में आदमपुर लैंडफिल साईट के कचरे को इस्तेमाल करने का निर्देष दिया गया है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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