नए हाइडल प्रोजेक्ट पर सरकार का रुख, सुप्रीम कोर्ट ने कहा आईसीयू के लिए मानक तय हों, 30% एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए अधिसूचना जारी, परमाणु ऊर्जा पर भारत-अमेरिकी साझेदारी का प्रस्ताव और मप्र में फर्जीवाड़े की भेंज चढ़ी एमएसपी की राशि। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आईसीयू और क्रिटिकल केयर सेवाओं के लिए न्यूनतम मानक तय करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अस्पतालों में आईसीयू बेड की उपलब्धता का सार्वजनिक डिस्प्ले होना चाहिए।
केंद्र सरकार ने 30% तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए नई अधिसूचना जारी की है। सरकार ने 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य भी 2030 से घटाकर 2025-26 कर दिया है।
भारत ने अमेरिकी परमाणु मिशन के सामने अपनी घरेलू परमाणु क्षमता बढ़ाने और ‘स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स’ (SMRs) की तकनीक पर सहयोग करने का प्रस्ताव रखा है। 6 महीने पहले ही भारत ने अपना परमाणु सेक्टर निजी क्षेत्र के लिए खोला है।
भीषण गर्मी के कारण हिमालयी क्षेत्रों के जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं। पिछले दो दिनों में आग के 612 अलर्ट जारी हुए हैं और ऋषिकेश जैसे क्षेत्रों में तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया है।
मध्य प्रदेश में पिछले एक साल में पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या में 3 लाख से अधिक की गिरावट आई है। ई-केवाईसी और आधार लिंक न होने के कारण हजारों किसानों की किस्तें अटक गई हैं।
शिवपुरी जिले में किसानों के गेहूं के भुगतान में बड़ी साइबर सेंधमारी हुई है। बिना दस्तावेजों के फर्जी बैंक खाते खोलकर और उन्हें आधार से लिंक कर किसानों की मेहनत की कमाई उन खातों में ट्रांसफर कर ली गई।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ बता रहे हैं कि अपर गंगा बेसिन और उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में नए हाइडल प्रोजेक्ट की मंज़ूरी पर सरकार ने क्या कहा? साथ ही असोसिएट एडिटर वाहिद भट बता रहे हैं एनटीसीए की नई गाइडलाइन के बारे में।
नई जलविद्युत परियोजनाओं पर सरकार का रुख
केंद्र सरकार का रुख और सुप्रीम कोर्ट का मामला केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि वह अपर गंगा बेसिन और उत्तराखंड के हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में नई जलविद्युत परियोजनाएं शुरू करने के पक्ष में नहीं है। यह मामला 2013 की केदारनाथ बाढ़ के बाद से ही कोर्ट में है, जहां गंगा नदी के ऊपरी इलाकों में बांध बनाने की अनुमति पर सवाल उठाए गए थे।
परियोजनाओं पर सीमा
सरकार ने कहा है कि अलकनंदा और भागीरथी रिवर बेसिन में केवल उन्हीं 7 जलविद्युत परियोजनाओं पर काम जारी रहेगा जो या तो पहले से चालू हैं या जिनका निर्माण काफी उन्नत चरण (advanced stage) में है।
शुरुआत में यहां लगभग 28 बांध प्रस्तावित थे, लेकिन पर्यावरणविदों के विरोध और पारिस्थितिक संवेदनशीलता को देखते हुए अब नई परियोजनाओं को अनुमति नहीं दी जाएगी।
पारिस्थितिक महत्व और संरक्षण
विशिष्टता: सरकार के अनुसार, गंगा नदी प्रणाली अन्य नदी प्रणालियों से भिन्न है और इसके लिए विशेष व्यवहार की आवश्यकता है।
जैव विविधता: अलकनंदा और भागीरथी बेसिन की भू-पारिस्थितिक अखंडता को बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि ये गंगा की मुख्य धाराएं हैं और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र में पोषक तत्वों और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
2013 की त्रासदी, जिसमें 5000 लोगों ने जान गवाई थी, उत्तराखंड के इस नाजुक (fragile) क्षेत्र में बड़े निर्माण कार्यों के खतरों को रेखांकित करती है।
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस पर एनटीसीए की एडवाइज़री
मुख्य समस्या और एनटीसीए की एडवाइज़री देश के टाइगर रिजर्व के लिए कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है। यह वायरस मुख्य रूप से कुत्तों में पाया जाता है, लेकिन अब यह कुत्तों से बाघों और अन्य वन्यजीवों तक पहुँच रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने एक एडवाइज़री जारी की है, जिसमें टाइगर रिजर्व के आसपास रहने वाले पालतू और आवारा कुत्तों के टीकाकरण (vaccination) का निर्देश दिया गया है।
हाल की घटनाएं और प्रभावित क्षेत्र
मध्य प्रदेश: कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघिन और उसके पांच बच्चों की मौत के बाद यह कदम उठाया गया है, जहाँ विशेषज्ञों को CDV का संदेह है।
राजस्थान: जोधपुर बायोलॉजिकल पार्क में इसी वायरस के कारण एक भेड़िये की मौत हो चुकी है।
सुरक्षा घेरा: एनटीसीए ने टाइगर रिजर्व के आसपास एक ‘इम्यूनाइजेशन बफर’ बनाने का सुझाव दिया है ताकि वायरस वन्यजीवों तक न पहुंच सके।
चुनौतियां और विशेषज्ञों की राय
व्यावहारिक कठिनाइयां: जमीनी स्तर पर इस योजना को लागू करना चुनौतीपूर्ण है। उदाहरण के लिए, राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व के भीतर या आसपास हजारों मवेशी और लगभग 200 कुत्ते रहते हैं, जिनका टीकाकरण करना एक बड़ा कार्य है।
मौसम का प्रभाव: विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में (जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है) जानवरों का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
गंभीरता: यदि कोई बाघ इस वायरस से संक्रमित हो जाता है, तो 24 घंटे के भीतर स्थिति अत्यंत गंभीर हो सकती है। यह संकट वन्यजीवों, मनुष्यों और पालतू जानवरों के बीच बढ़ते संपर्क का भी संकेत है।
ग्राउंड रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश में बाघों की मौत और इसके कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संबंध पर विस्तार से रिपोर्ट की है। इसे आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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