यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-208 है। सोमवार, 04 मई को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर तेज होते सियासी टकराव और उठते बड़े पर्यावरणीय सवालों के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स की निगरानी को लेकर परमाणु ऊर्जा विभाग और विद्युत मंत्रालय के बीच मतभेद सामने आए हैं। प्राइवेट सेक्टर की एंट्री के बीच कंट्रोल और रेगुलेशन को लेकर कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट की चिंता जताई जा रही है।
आंध्र प्रदेश में नया साउथ कोस्ट रेलवे जोन बनाया गया है, जिसकी शुरुआत जून से हो सकती है। इससे कनेक्टिविटी और प्रशासन बेहतर होने की उम्मीद है, लेकिन ओडिशा में इसके विरोध की आवाज भी उठ रही है।
भारत में नया सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम लागू किया गया है, जो आपदा के समय मोबाइल पर तुरंत अलर्ट भेज सकता है। यह तकनीक बिना इंटरनेट या कॉल के काम करती है और एक साथ बड़े इलाके में मौजूद लाखों लोगों तक चेतावनी पहुंचाने में सक्षम है, जिससे समय रहते सुरक्षा कदम उठाए जा सकें।
उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध तेज हो गया है और कई जिलों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि इससे बिजली बिल बढ़ रहे हैं और बिना सहमति के सिस्टम लागू किया जा रहा है, जबकि सरकार इसे पारदर्शिता और बिलिंग सुधार का कदम बता रही है।
दिल्ली सरकार ने करीब 97 किलोमीटर लंबे 7 नए मेट्रो कॉरिडोर को मंजूरी दी है, जिनमें कई नए स्टेशन भी शामिल होंगे। इस विस्तार का मकसद बाहरी और कम कनेक्टेड इलाकों को जोड़ना, ट्रैफिक दबाव कम करना और शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत बनाना है।
गुजरात के कांडला पोर्ट पर आक्रामक पौधों को बायो-मेथनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पहल के जरिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली प्रजाति को साफ ईंधन में बदलने की कोशिश है, जिससे एक साथ वेस्ट मैनेजमेंट और क्लीन एनर्जी दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
मेघालय में दो सीमेंट कंपनियों पर बिना वैध दस्तावेज के बड़ी मात्रा में कोयला लाने का आरोप लगा है। हाई कोर्ट द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में SOP नियमों के उल्लंघन की बात कही है, जिससे खनन और परिवहन की निगरानी पर सवाल खड़े हुए हैं।
केंद्र सरकार ने बच्चों में डायबिटीज की पहचान और इलाज के लिए नई राष्ट्रीय गाइडलाइन जारी की है। इसमें शुरुआती स्क्रीनिंग, मुफ्त इलाज, इंसुलिन की उपलब्धता और नियमित मॉनिटरिंग पर जोर दिया गया है, ताकि बीमारी को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
विस्तृत चर्चा
ग्रेट निकोबार परियोजना पर विवाद
अंडमान निकोबार द्वीपसमूह के दक्षिणी सिरे पर प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट और लॉजिस्टिक हब को लेकर लंबे समय से पर्यावरणीय चिंताएं उठती रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना से संवेदनशील इकोसिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है और वहां रहने वाले आदिवासी समुदायों के अस्तित्व पर असर पड़ सकता है।
हाल के घटनाक्रम में इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप ले लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के द्वीप दौरे के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि यह परियोजना बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई और स्थानीय समुदायों के विस्थापन का कारण बन सकती है। उन्होंने इसे प्रकृति और आदिवासी विरासत के खिलाफ गंभीर कदम बताया। इससे पहले भी कांग्रेस नेतृत्व इस परियोजना पर सवाल उठा चुका है।
सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल बताया है, जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की मौजूदगी मजबूत करना है। सरकार का दावा है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि सरकार का जवाब पर्यावरणविदों, स्थानीय समुदायों और नागरिक समाज की प्रमुख चिंताओं को संबोधित नहीं करता। कांग्रेस ने संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि परियोजना में सीमित भूमि उपयोग का दावा भ्रामक है और जैव विविधता पर व्यापक प्रभाव को नजरअंदाज किया जा रहा है। साथ ही, एक क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की भरपाई दूसरे भौगोलिक क्षेत्र में वृक्षारोपण से करने की नीति पर भी सवाल उठाए गए हैं।
रणनीतिक महत्व के तर्क पर भी मतभेद सामने आए हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को विकास परियोजनाओं से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। इसके अलावा, परियोजना को मिली पर्यावरणीय स्वीकृतियों और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह परियोजना अब पर्यावरण, विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन की एक बड़ी बहस का केंद्र बन चुकी है, जिसका समाधान नीति और पारदर्शिता के स्तर पर स्पष्ट जवाबों की मांग करता है।
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