यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-196 है। सोमवार, 20 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए भारी खर्च के बाद भी गंदी होती गंगा और सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए वाशिंगटन डीसी में आज से तीन दिवसीय बातचीत शुरू हो रही है। इस वार्ता में टैरिफ ढांचे और व्यापारिक जांचों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की है। इनमें गेहूं, मक्का, जौ, कच्ची हल्दी सहित कई फसलें शामिल हैं।
गुड़गांव पुलिस ने एक कैब से लगभग 56 लाख रुपये की वजन घटाने वाली नकली दवा बरामद की है। जांच से पता चला है कि आरोपी इन नकली दवाओं का निर्माण अपने घर से ही कर रहा था।
तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में एक पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई और 8 अन्य घायल हो गए। घायलों में दो की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण) के समर्थन में मध्य प्रदेश सरकार विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाने जा रही है। इस मुद्दे पर जनजागरूकता के लिए भोपाल में एक बड़ी रैली और सम्मेलन का आयोजन भी किया जाएगा जिसमें महिला मंत्री शामिल होंगी।
भोपाल में इस सीजन का सबसे अधिक तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो सामान्य से 3 डिग्री अधिक है। प्रदेश के नौगांव में पारा 44.3 डिग्री तक पहुंच गया है और आगामी दिनों में लू (heatwave) चलने का अलर्ट जारी किया गया है।
विस्तृत चर्चा
उत्तराखंड में गंगा प्रदूषण और कैग की रिपोर्ट
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के एक-तिहाई एसटीपी गंगा नदी को प्रदूषित कर रहे हैं। भौतिक निरीक्षण में पाया गया कि 44 में से 12 एसटीपी बिना उपचारित (untreated) पानी सीधे नदी में बहा रहे थे।
मानकों की अनदेखी और स्वास्थ्य जोखिम: एनजीटी (NGT) द्वारा निर्धारित मानकों पर 44 में से केवल 5 एसटीपी ही खरे उतरे, जबकि 35 इसमें विफल रहे। पानी में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर, जो 1000 MPN प्रति 100 ml से कम होना चाहिए, 1700 MPN से अधिक पाया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
भारी निवेश के बावजूद विफलता: वर्ष 2018 से 2023 के बीच एसटीपी बनाने में ₹1000 करोड़ खर्च किए गए। ‘नमामी गंगे’ प्रोजेक्ट के तहत मिले ₹985 करोड़ में से ₹873 करोड़ खर्च होने के बावजूद एसटीपी और सीवेज कनेक्शन का काम अधूरा है। कई एसटीपी को अभी तक शहर की सीवेज लाइनों से जोड़ा ही नहीं गया है।
प्रशासनिक लापरवाही: रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि ‘स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा’ ने पिछले 13 वर्षों में रिवर बेसिन मैनेजमेंट प्लान ही नहीं बनाया है। इसके अलावा, अनट्रीटेड पानी सीधे गंगा में बहाने वाले ठेकेदारों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।
हाईवे सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हाईवे पर सुरक्षित सफर करना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि व्यक्ति का बुनियादी हक है। कोर्ट ने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि यात्री सुरक्षित घर लौटें।
सिस्टम की नाकामी और दुर्घटनाएं: राजस्थान और तेलंगाना में हुई दो दुर्घटनाओं, जिनमें 34 लोगों की जान गई, का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि एक भी जान सिस्टम की लापरवाही से जाती है, तो यह उसकी नाकामी है। रात में ट्रकों की गलत पार्किंग, लाइट की कमी और चेतावनी बोर्ड न होना दुर्घटनाओं के मुख्य कारण माने गए हैं।
ब्लैक स्पॉट्स और बुनियादी ढांचा: कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हाईवे पर ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (जहाँ बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं) की पहचान की जाए और उन्हें तुरंत ठीक किया जाए। साथ ही, हाईवे पर प्रॉपर लाइटिंग, साइन बोर्ड्स, लेन मार्किंग, क्रैश बैरियर और वैज्ञानिक तरीके से योजनाबद्ध चेतावनी प्रणाली को अनिवार्य बताया गया है।
कोर्ट द्वारा अवैध पार्किंग, विशेषकर भारी वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, नियमित पेट्रोलिंग और नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने कहा है कि राज्यों को इसके लिए समयबद्ध (time-bound) योजना बनानी होगी और प्रोग्रेस रिपोर्ट देनी होगी।
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