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पानी खर्चने से पहले जानिए अबकी बार कैसा रहेगा मानसून?

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-191 है। मंगलवार, 14 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए इस बार मौसम किस करवट लेगा और कैसा रहेगा मानसून?


मुख्य सुर्खियां

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने घोषणापत्रों में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के कई वादे किए हैं। इनमें सौर-पवन ऊर्जा का विस्तार, औद्योगिक प्रदूषण पर सख्ती से लेकर और जलाशयों के पुनर्जीवन जैसी योजनाएं शामिल हैं।


केंद्र सरकार ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार करने के लिए आवश्यक बेसलाइन डेटा संग्रह से जुड़े नियमों में कुछ ढील दी है। इस फैसले का उद्देश्य परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया को तेज करना बताया गया है।


तेलंगाना में तेज गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए मौसम विभाग (IMD) ने अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने और गर्म हवाएँ चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


मौसम विभाग ने इस साल मध्य प्रदेश और भोपाल में ‘कमजोर’ मानसून के संकेत दिए हैं। जून से सितंबर के बीच सामान्य से कम, यानी केवल 92% बारिश होने का अनुमान जताया गया है।


छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में आदिवासियों का ‘मिट्टी-आकाश सत्याग्रह’ 9वें दिन भी जारी रहा। सामूहिक भूख हड़ताल के कारण कई प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने लगी है।


भोपाल के आदमपुर खंती में देश का दूसरा टोरीफाइड चारकोल प्लांट शुरू हो गया है, जहाँ सूखे कचरे से कोयला बनाया जाएगा। इससे नगर निगम को सालाना लगभग 4.84 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है।

विस्तृत चर्चा

अबकी बार 92% तक ही बरसेंगे बादल 

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के 2024 के पहले लॉन्ग रेंज फोरकास्ट के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम (लगभग 92%) रहने का अनुमान है।

मानसून का स्वरूप और वितरण: इस साल न केवल कुल बारिश कम रहने की संभावना है, बल्कि इसके वितरण में भी असामान्यता देखी जा सकती है, जिसका अर्थ है कि बारिश के बीच लंबे अंतराल (gaps) हो सकते हैं। यह स्थिति उन किसानों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जो पूरी तरह से मानसून पर निर्भर हैं। प्री-मानसून के दौरान हुई ओलावृष्टि और बाढ़ के बाद, कमजोर मानसून उनके लिए ‘डबल झटका’ साबित हो सकता है।

कम बारिश के वैज्ञानिक कारण: मानसून में इस कमी का मुख्य कारण प्रशांत महासागर में ‘एल नीनो’ (El Niño) का सक्रिय होना है, जो समुद्री सतह के तापमान को बढ़ाकर हवाओं के वैश्विक पैटर्न को बदल देता है। डेटा के अनुसार, 1980 के बाद से जब भी एल नीनो की स्थिति बनी है, उनमें से 70% बार मानसून कमजोर रहा है। हालांकि, हिंद महासागर में ‘पॉजिटिव फेज’ (Indian Ocean Dipole) की स्थिति भारत के लिए कुछ उम्मीद जगाती है, क्योंकि यह बारिश को सहारा दे सकती है, जैसा कि 1997 में देखा गया था।

क्षेत्रीय प्रभाव:

उत्तर भारत: यहां बारिश में 10% से 20% तक की कमी आने का अनुमान है।

दक्षिण भारत: कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में सूखे (drought) का गंभीर खतरा है।

पश्चिम भारत: गुजरात जैसे क्षेत्रों में बारिश कम रहने के संकेत हैं, जबकि मध्य भारत में भी कुछ कमी देखी जा सकती है।

पूर्व और उत्तर-पूर्व भारत: इन क्षेत्रों की स्थिति देश के बाकी हिस्सों की तुलना में कुछ बेहतर रह सकती है।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव:

कृषि और महंगाई: सोयाबीन, चावल और मक्के जैसी फसलें सीधे तौर पर मानसून पर निर्भर हैं। यदि उत्पादन कम होता है, तो बाजार में आपूर्ति कम होगी और महंगाई बढ़ सकती है।

जल और बिजली संकट: कम बारिश से बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर गिरेगा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संकट पैदा होगा। साथ ही, भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ेगी, जिससे सप्लाई चेन पर भारी दबाव आएगा।

वर्तमान स्थिति और भविष्य की तैयारी: फिलहाल देश के कई हिस्सों में तापमान अभी से 40°C से 44°C के बीच पहुंच गया है और रातें भी गर्म हो रही हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस पूर्वानुमान को एक अवसर मानकर जल संरक्षण की रणनीतियां और गर्मी से निपटने की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। मानसून की अधिक सटीक और स्पष्ट तस्वीर मई के अंत में आने वाले आईएमडी के अगले अपडेट से प्राप्त होगी।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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