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कलपक्कम परमाणु रिएक्टर के ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल करने के क्या मायने हैं?

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-186 है। बुधवार, 8 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए देश के पहले स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल करने क्या मायने हैं?


मुख्य सुर्खियां

अमेरिकन प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 2 हफ्ते के लिए सीज फायर का ऐलान किया है। ईरान ने भी इसे स्वीकार करते हुए कहा कि वह अपनी सेना के तालमेल से होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित आने-जाने देगा।


नासा के आर्टेमिस II मिशन के अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के सबसे दूर के हिस्से से गुजरते हुए अंतरिक्ष में उस दूरी तक पहुंचे हैं जहां पहले कभी कोई इंसान नहीं गया। एस्ट्रानौट्स ने चंद्रमा की तस्वीर भी जारी की है।


आज यूपी-राजस्थान समेत 20 राज्यों में आंधी और बारिश की संभावना है। वहीं 10 राज्यों में ओले गिर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर के रामबन में लैंडस्लाइड से जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद हो गया। वहीं हिमाचल के चंबा में मंगलवार सुबह लैंडस्लाइड से निर्माणाधीन पुल टूट गया।


मध्य पूर्व में तनाव के कारण चीन से आने वाला दवाओं का कच्चा माल (API) महंगा हो गया है। बताया गया है कि अगले 15-20 दिनों में दवाओं की कीमतें 30% तक बढ़ सकती हैं।


मध्य प्रदेश फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें विज्ञान स्नातकों (Science Graduates) को दवाएं बेचने की अनुमति देने की बात कही गई है।


मध्य प्रदेश कैबिनेट ने शिक्षा और कृषि सहित 10 परियोजनाओं के लिए 16,720 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसमें चने की 25% और मसूर की 100% सरकारी खरीद का फैसला भी शामिल है।

विस्तृत चर्चा

परमाणु कार्यक्रम की महत्वपूर्ण सफलता

तमिलनाडु के कलपक्कम में भारत के पहले स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने ‘क्रिटिकैलिटी’ हासिल कर ली है। देश के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से है जिसे न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और पावर जनरेशन का लंबा अनुभव है। भारत का परमाणु कार्यक्रम मुख्य रूप से तीन चरणों (Stages) पर आधारित है:

प्रथम चरण: प्रेशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर (PHWR), जो प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन और भारी पानी (ड्यूटेरियम ऑक्साइड) को कूलेंट के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

द्वितीय चरण: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR), जो भविष्य के लिए ईंधन बनाने और अधिक ऊर्जा उत्पादन पर केंद्रित हैं।

तृतीय चरण: थोरियम आधारित रिएक्टर, जिसका लक्ष्य भारत के विशाल थोरियम भंडारों का उपयोग करके बिजली बनाना है।

कलपक्कम FBR: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित देश के पहले स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) ने हाल ही में ‘क्रिटिकैलिटी’ (Criticality) प्राप्त कर ली है।

क्रिटिकैलिटी का अर्थ: इसका मतलब है कि रिएक्टर के भीतर एक स्व-सस्टेनिंग (Self-sustaining) परमाणु विखंडन प्रक्रिया शुरू हो गई है।

क्षमता: यह उपलब्धि अंततः 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक क्षमता के साथ बिजली उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

महत्व: यह दर्शाता है कि रिएक्टर का कोर डिजाइन सही ढंग से काम कर रहा है और पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रॉन रिलीज कर रहा है, जिससे रिएक्शंस की श्रृंखला जारी रह सकेगी।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की कार्यप्रणाली

एफबीआर (FBR) को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे जितना ईंधन इस्तेमाल करते हैं, उससे ज्यादा ईंधन पैदा कर सकते हैं।

ईंधन: शुरुआत में यह यूरेनियम-प्लोटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करेगा।

ब्रीडिंग प्रक्रिया: रिएक्टर के कोर के चारों ओर यूरेनियम आइसोटोप U238 की एक ब्लैंकेट होती है। ‘न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन’ के माध्यम से यह ब्लैंकेट और अधिक ईंधन बनाती है, इसीलिए इसे ‘ब्रीडर’ कहा जाता है।

दक्षता: एफबीआर प्राकृतिक यूरेनियम से प्राप्त ऊर्जा को रिसाइकिल करके 60 गुना तक बढ़ा सकते हैं।

ऊर्जा स्वतंत्रता की ओर एक कदम

यह सफलता भारत की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:

थोरियम का उपयोग: एफबीआर को तीसरे चरण तक पहुंचने के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे भारत के थोरियम भंडार का पूर्ण उपयोग संभव हो सकेगा।

ऊर्जा सुरक्षा: थोरियम आधारित उत्पादन में संक्रमण भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता (Energy Independence) को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक है।

स्वदेशी इंजीनियरिंग: प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश की वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग उद्यम की ताकत का प्रमाण बताया है।

यह प्रगति न केवल भारत की तकनीकी गहराई को दर्शाती है, बल्कि आने वाले समय में क्लीन और सस्टेनेबल एनर्जी की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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