यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-181 है। गुरुवार, 2 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए अप्रैल से जून के बीच कैसा रहेगा मौसम और आपको किन बातों का ध्यान रखना पड़ेगा?
मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत का नॉन-फॉसिल फ्यूल एनर्जी में बदलाव सिर्फ़ पॉलिसी चुनने का मामला नहीं है, बल्कि पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ी एक “बुनियादी ज़रूरत” है।
मधुमेह और मोटापे के इलाज में इस्तेमाल होने वाली GLP-1 दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने निगरानी कड़ी कर दी है। बिना डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं के सेवन से स्वास्थ्य जोखिमों की चेतावनी दी गई है।
कानपुर में पुलिस ने एक बड़े किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें 5 डॉक्टरों सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिछले 2 वर्षों में 10 अस्पतालों में करीब 40-50 अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने की बात सामने आई है।
जम्मू-कश्मीर सरकार उरी, बारामुला में स्थित 120 साल पुराने ‘मोहरा पावर प्रोजेक्ट’ को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रही है। यह प्रोजेक्ट 1992 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त होने के बाद से बंद पड़ा था।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में अवैध रेत उत्खनन रोकने गई सोन घड़ियाल अभयारण्य की टीम को रेत माफिया ने बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट की। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर-उज्जैन और उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को अब ‘नॉन-एक्सेस कंट्रोल’ (सामान्य 4-लेन) हाईवे बनाने का फैसला किया है। इससे परियोजना की लागत में करीब 500 करोड़ रुपये की बचत होगी और स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा होगी।
विस्तृत चर्चा
मौसम अपडेट: कैसे गुजरेंगे अगले 3 महीने?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा अप्रैल से जून 2026 के लिए जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अप्रैल से जून के बीच देश में मौसम का एक मिश्रित पैटर्न देखने को मिलेगा। यानि अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग अनुभव होंगे।
गर्म रातें: आईएमडी के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में रातें सामान्य से अधिक गर्म रहने की संभावना है।
दिन का तापमान: उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में दिन का तापमान सामान्य या उससे कम रह सकता है, जबकि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में दिन बहुत गर्म होंगे।
पूर्वानुमान में बदलाव: मार्च-मई के पिछले पूर्वानुमान की तुलना में, नए आउटलुक में पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में दिन का तापमान नियंत्रण में रहने की बात कही गई है।
हीट वेव (लू) और सार्वजनिक स्वास्थ्य
हीट वेव के दिनों में वृद्धि: इस बार सामान्य से अधिक हीट वेव डेज (लू के दिन) देखने को मिल सकते हैं, विशेषकर अप्रैल से जून के दौरान।
प्रभावित क्षेत्र: कोस्टल ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इसका असर ज्यादा होगा, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में छिटपुट लू चल सकती है।
हीट स्ट्रेस का खतरा: रात का तापमान अधिक रहने के कारण शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाएगा, जिससे हीट स्ट्रेस की संभावना बढ़ जाएगी।
जोखिम वाले समूह: बढ़ती गर्मी का स्वास्थ्य जोखिम विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, बाहर काम करने वाले मजदूरों और पहले से बीमार लोगों पर अधिक होगा।
कृषि और फसलों पर प्रभाव
फसलों पर तनाव: चावल, मक्का, मूंग, उड़द और सब्जियों (जैसे टमाटर, मिर्च, बैंगन) पर हीट स्ट्रेस बढ़ सकता है, जिससे उनकी फ्लावरिंग (फूल आने की अवस्था) प्रभावित हो सकती है।
उत्पादन में कमी का जोखिम: गेहूं और चने की फसलें समय से पहले मैच्योर हो सकती हैं, जिससे उनके दाने भरने का समय कम हो जाएगा और उत्पादन पर असर पड़ेगा।
फलों का गिरना: आम और केले के बागानों में फलों के गिरने (फ्रूट ड्रॉप) का जोखिम बताया गया है।
किसानों के लिए सलाह: आईएमडी ने फसलों के लिए हल्की और बार-बार सिंचाई करने की सलाह दी है। उत्तर-पश्चिम भारत में गेहूं और सरसों की जल्दी कटाई करने का सुझाव दिया गया है ताकि गर्मी के नुकसान से बचा जा सके।
बुनियादी सेवाओं और संसाधनों पर दबाव
पानी और बिजली की मांग: अत्यधिक गर्मी के कारण पानी की मांग और बिजली की खपत अपने चरम (पीक) पर पहुंच जाएगी, जिससे बुनियादी सेवाओं पर बोझ बढ़ेगा।
अनिश्चितता की चुनौती: मौसम के पैटर्न में बढ़ती अनिश्चितता के कारण भविष्य की योजना बनाना मुश्किल होता जा रहा है, जैसा कि मार्च में कुछ क्षेत्रों में हुई अप्रत्याशित बारिश से देखा गया।
स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में गर्मी केवल एक मौसमी बदलाव नहीं है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, बिजली की मांग और खेती पर एक गंभीर दबाव की स्थिति पैदा करेगी। इसलिए लोगों को अपनी दैनिक आदतों और यात्रा योजनाओं में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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