यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-178 है। सोमवार, 30 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए पीएम कुसुम 2.0 में आने वाले नए अपडेट के बारे में।
प्रमुख सुर्खियां
गुजरात में एक दशक बाद ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का चूजा पैदा हुआ, जो संरक्षण के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह खास तरीके से दूसरे राज्य से लाए गए अंडे से हुआ, क्योंकि यहां प्राकृतिक तरीके से प्रजनन संभव नहीं था।
सरकार ने गैस पर दबाव कम करने के लिए 60 दिन के लिए राज्यों को केरोसिन देने का फैसला लिया है। इससे लोगों को खाना पकाने और रोशनी के लिए एक विकल्प मिल सकेगा।
मध्य प्रदेश में एक रेडियो कॉलर लगे बाघ को जहर देकर मार दिया गया और उसका शव दबा हुआ मिला। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, बताया जा रहा है कि बाघ ने उनका पशु मारा था।
मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में मौसम बदला रहेगा, बादल और हल्की बारिश से तेज गर्मी नहीं पड़ेगी। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण लू कमजोर रहेगी और अगले कुछ दिन ऐसा ही मौसम बना रहेगा।
एलपीजी की मांग अचानक बढ़ने से शहर में हर दिन हजारों बुकिंग बढ़ गई हैं और डिलीवरी में देरी हो रही है। लोगों को गैस के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, कई जगह लंबी लाइनें लग रही हैं और स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
कुसुम 2.0 में बड़ा बदलाव
पीएम-कुसुम योजना, जो 2019 में किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू हुई थी, अब अपने अगले चरण की ओर बढ़ रही है। मौजूदा चरण मार्च में समाप्त हो रहा है और केंद्र सरकार इसके उन्नत संस्करण कुसुम 2.0 को लॉन्च करने की तैयारी में है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए संस्करण में बैटरी स्टोरेज को शामिल किया जा सकता है, जिससे सौर ऊर्जा को संग्रहित कर जरूरत के समय उपयोग किया जा सके। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सौर और पवन ऊर्जा निरंतर उपलब्ध नहीं रहती, जिससे ग्रिड संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ी है, लेकिन ऊर्जा भंडारण की क्षमता अभी पर्याप्त नहीं बन पाई है। ऐसे में कुसुम योजना के साथ बैटरी स्टोरेज को जोड़ना इस कमी को दूर करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
हालांकि, योजना की प्रगति अब तक अपेक्षाकृत धीमी रही है। 34 गीगावाट के लक्ष्य के मुकाबले फरवरी 2026 तक केवल लगभग 12,164 मेगावाट क्षमता ही हासिल हो सकी है। वहीं करीब 10 लाख सोलर पंप लगाए जा चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, बैटरी स्टोरेज जोड़ने से योजना की लागत बढ़ सकती है, जिससे किसानों के लिए शुरुआती निवेश और महंगा हो सकता है। यह भी एक बड़ा सवाल है कि स्टोरेज की अवधि 2 घंटे होगी या 4 घंटे, जिस पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
इस पृष्ठभूमि में यह देखना अहम होगा कि कुसुम 2.0 की नई गाइडलाइंस किस तरह तैयार होती हैं और योजना को किसानों के लिए अधिक व्यवहारिक और आकर्षक कैसे बनाया जाता है, क्योंकि भारत के स्वच्छ ऊर्जा और नेट जीरो लक्ष्यों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
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