यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-171 है। शनिवार, 21 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान और राहत के लिए सरकार की तैयारी के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई में कोस्टल रोड परियोजना के लिए करीब 46,000 मैंग्रोव पेड़ काटने की अनुमति दे दी है। साथ ही बीएमसी को 10 वर्षों तक स्ट्रिक्ट एफोरेस्टेशन और उसकी ऑडिट रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन से जलीय जीवों को नुकसान पर MP, राजस्थान और UP को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि खनन न रोकने पर अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाएगा।
कर्नाटक के शिवमोग्गा चिड़ियाघर में गर्भवती दरियाई घोड़े के हमले में पशु चिकित्सक डॉ. समीक्षा रेड्डी की मौत हो गई। यह घटना नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान हुई है।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत ने अमेरिका से 1,76,000 टन LPG आयात किया। ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत रूस और जापान जैसे देशों से भी संपर्क बढ़ा रहा है।
पिछले 10 वर्षों में MP में 38,553 हेक्टेयर वन भूमि विकास परियोजनाओं में बदली गई, जो देश में हुए कुल डाइवर्जन का 22% है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष और पारिस्थितिक सूखे का खतरा बढ़ा है।
प्रदेश के 21 जिलों में बारिश और 14 जिलों में ओलावृष्टि की घटनाएं देखी गई हैं। इससे गेहूं, चना और सरसों की फसलों को भारी नुकसान हुआ। वहीं भोपाल का तापमान 4.8°C तक गिरा।
विस्तृत चर्चा
पश्चिमी विक्षोभ से किसानों को हुआ भारी नुकसान
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई है। इससे पककर तैयार रबी की फसलें खेतों में गिर गई हैं, जिससे दानों के काले पड़ने, गुणवत्ता में गिरावट और पैदावार में कमी की आशंका है। चर्चा में बताया गया है कि 2022 की तरह ही इस बार (2026) भी फरवरी-मार्च की असामान्य गर्मी ने पहले ही फसलों को प्रभावित किया था, और अब इस बारिश ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
सरकार की कार्रवाई और निर्देश: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्च स्तरीय बैठक की और अधिकारियों को फसल नुकसान का त्वरित और वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने फसल बीमा के तहत किसानों को समय पर भरपाई सुनिश्चित करने और राज्यों को SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष) के माध्यम से राहत देने को कहा है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य और खरीद की चुनौतियां: कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया है कि रबी की फसल का उत्पादन बंपर हुआ है और सरकार किसानों से उनकी इच्छा के अनुसार पूरी उपज खरीदेगी। हालांकि, चर्चा में यह चिंता जताई गई है कि गुणवत्ता गिरने और दानों में नमी (moisture) अधिक होने के कारण किसानों को अपनी फसल MSP पर बेचने में समस्या हो सकती है, क्योंकि सरकारी खरीद के कड़े मानक होते हैं।
खरीफ सीजन की रणनीति: आगामी खरीफ सीजन की तैयारी के लिए देश को पांच जोन (उत्तर, दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और उत्तर-पूर्व) में बांटकर क्षेत्रीय सम्मेलन (Regional Conferences) आयोजित किए जाएंगे, ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार बेहतर रणनीति बनाई जा सके।
किसान संगठनों की मांग: अखिल भारतीय किसान सभा ने सरकार पर नुकसान की कम रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाया है। किसान संगठनों का कहना है कि फसल बीमा का लाभ बहुत कम मिलता है, इसलिए वे सभी प्रभावित किसानों के लिए एक व्यापक राहत पैकेज और तत्काल मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
यदि सरकार किसानों की उपज खरीदने की नीति में ढील देती है, तो गुणवत्ता खराब होने के बावजूद किसान अपनी फसल MSP पर बेचकर कुछ हद तक नुकसान की भरपाई कर पाएंगे।
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