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कमर्शियल सिलेंडर पर रोक, होटल-कैटरिंग बिजनेस परेशान

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-160 है। मंगलवार 10 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ आज के पॉडकास्ट में जानिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाय में रोक कैसे कर सकती है भारत के व्यवसायों को प्रभावित।


मुख्य सुर्खियां

मध्य प्रदेश सरकार आज 5800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है, जो इस वित्तीय वर्ष में लिया जाने वाला आखिरी कर्ज होगा। होली से पहले सरकार 6300 करोड़ रुपये पहले ही उधार ले चुकी है। एक साल में यह 19वीं बार है जब सरकार बाजार से कर्ज उठा रही है।


कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया है। भारत में अब तक जन्मे 33 चीतों में से 14 ज्वाला के परिवार से हैं। नए शावकों के बाद कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर लगभग 50 हो गई है।


देश के कई हिस्सों में मार्च की शुरुआत में ही तापमान सामान्य से 5 से 12 डिग्री तक ज्यादा दर्ज किया गया है। तीन राज्यों में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। भोपाल में भी तापमान 36.8 डिग्री दर्ज हुआ और आगे और गर्मी बढ़ने की संभावना है।


भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में कई निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से बाहर हो सकते हैं। 480 में से करीब 295 अस्पतालों के पास जरूरी एनएबीएच सर्टिफिकेट नहीं है। इससे गरीब मरीजों को इलाज कराने में ज्यादा परेशानी हो सकती है।


ऑयल कंपनियों ने फिलहाल कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी रोक दी है। कहा गया है कि यह कदम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। लेकिन शादी के सीजन में इससे होटल और कैटरिंग कारोबार प्रभावित हो सकता है।


दिल्ली में पानी की गुणवत्ता को लेकर सामने आई रिपोर्ट के बाद सरकार ने दोबारा सैंपलिंग कराने का आदेश दिया है। एक जांच में शहर के 18 नमूनों में से 8 में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया या ई.कोलाई पाए गए, जो पानी के दूषित होने का संकेत है।


विस्तृत चर्चा

ईरान–इज़राइल तनाव का असर, भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की किल्लत

ईरान–इज़राइल युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने लगी है और इसका असर अब भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता पर भी दिख रहा है। सोमवार 9 मार्च को कई ऑयल कंपनियों ने होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई करने में असमर्थता जताई। होटल और रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि उन्हें बाजार में सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने तो यहां तक कहा कि गैस की कमी के कारण कुछ प्रतिष्ठानों को अपना काम बंद करने की नौबत आ रही है। ऐसी ही स्थिति मुंबई, भोपाल और देश के कई अन्य शहरों में भी देखी जा रही है।

सरकार का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी सप्लाई पर किसी तरह का आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा कि सरकार भले ही बैन से इनकार कर रही हो, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक सप्लायर्स कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराने में असमर्थता जता रहे हैं, जिससे बाजार में किल्लत की स्थिति बन गई है।

दरअसल सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी है। इसी के तहत तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिए गए हैं कि एलपीजी उत्पादन का बड़ा हिस्सा घरेलू उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए। होटल और रेस्टोरेंट संगठनों का कहना है कि इसी वजह से कई ऑयल कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई सीमित कर दी है, जिसके कारण बाजार में उनकी उपलब्धता तेजी से घट गई है।

हालत यह है कि घरेलू उपभोक्ताओं को भी सिलेंडर आसानी से नहीं मिल रहे हैं। ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने वेटिंग पीरियड लागू किया है, जिसके तहत अब सिलेंडर लेने के लिए करीब 25 दिन पहले बुकिंग करनी पड़ रही है। इस बीच कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम करीब 60 रुपये बढ़ाए गए थे, जबकि कमर्शियल सिलेंडर पहले ही 1700 रुपये से बढ़कर 1800 से 1850 रुपये के आसपास पहुंच चुका है।

होटल और रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि वे बढ़ी हुई कीमतों पर भी सिलेंडर खरीदने को तैयार हैं, लेकिन सप्लायर्स के पास स्टॉक नहीं है। इससे होटल, कैटरिंग और अन्य व्यवसायों पर बड़ा असर पड़ सकता है। खासकर शादी के मौसम में कमर्शियल एलपीजी की मांग सबसे ज्यादा होती है, इसलिए अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो देशभर में होने वाली शादियों और समारोहों पर भी असर पड़ सकता है।

इसी स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोमवार 9 मार्च को एक तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया है। यह पैनल कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई से जुड़ी मौजूदा स्थिति की समीक्षा करेगा और संकट से निपटने के लिए संभावित समाधान सुझाएगा।


दिल्ली में पानी की गुणवत्ता पर सवाल, कई इलाकों के नमूने दूषित पाए गए

दिल्ली में एक बार फिर पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। एक स्वतंत्र परीक्षण में शहर के अलग अलग इलाकों से लिए गए 18 पानी के नमूनों में से 8 नमूने दूषित पाए गए। जांच में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और ई.कोली की मौजूदगी मिली, जो इस बात का संकेत है कि पानी में सीवेज या गंदगी मिल सकती है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दिल्ली सरकार ने मामले में कार्रवाई की बात कही है। जल मंत्री ने दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि जिन इलाकों में दूषित पानी की शिकायत मिली है वहां टेस्टिंग बढ़ाई जाए और समस्या की वजह जल्द पता लगाई जाए। दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा सैंपलिंग की जाएगी और जहां भी गड़बड़ी मिलेगी वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार समस्या की एक बड़ी वजह शहर की पुरानी पाइपलाइनें हैं। दिल्ली में करीब 15,400 किलोमीटर लंबा जल आपूर्ति नेटवर्क है, लेकिन इसमें से लगभग 5,200 किलोमीटर पाइपलाइन 30 साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी है और करीब 2,700 किलोमीटर पाइपलाइन 20 से 30 साल पुरानी है। ऐसी पाइपलाइनों में लीकेज या क्षति होने से सीवेज के पानी के मिल जाने का खतरा बढ़ जाता है।

दिल्ली जल बोर्ड ने इस समस्या से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक योजना भी शुरू की है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से अगले चार वर्षों में जल आपूर्ति प्रणाली में सुधार कर प्रदूषण के मामलों को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत पुरानी पाइपलाइनों को बदलना, सीवर लाइनों की निगरानी बढ़ाना और शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करना प्रमुख कदम बताए गए हैं।

फिलहाल कुछ विधानसभा क्षेत्रों में पाइपलाइन बदलने का काम शुरू किया गया है और वर्ष के अंत तक इसे पूरे शहर में विस्तार देने की योजना है। इस बीच रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों का कहना है कि केवल चुनिंदा इलाकों में जांच पर्याप्त नहीं है। उनका सुझाव है कि पूरे शहर में पानी की गुणवत्ता का व्यापक ऑडिट कराया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन इलाकों में पानी सुरक्षित है और कहां दूषित होने का खतरा बना हुआ है।

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