Skip to content

होली के पहले मध्य प्रदेश से लाखों की मिलावटी खाद्य सामग्री जब्त

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-156 है। मंगलवार, 03 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए प्रदेश में मिलावटी खाद्य सामग्रियों पर हुई कार्रवाई और चीफ सेकेट्री ने पोषण की फ़ाइल क्यों लौटाई?


मुख्य ख़बरें 

मध्य प्रदेश के इंदौर में बीती शाम सीवर टैंक में दम घुटने से नगर निगम के दो कर्मचारियों की मौत हो गई। सीएम ने उनकी मौत पर 30-30 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है.


पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच भारत रूसी कच्चे तेल के आयात में बढ़ोतरी पर विचार कर रहा है। वर्तमान में भारत के कुल तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।


बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी और कांग्रेस नेता करण सिंह ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से अपील की है कि वे उत्तराखंड सरकार द्वारा भागीरथी इको-सेंसिटिव ज़ोन में नेताला बाईपास और झाला-जंगला हिस्से के लिए दी गई फॉरेस्ट क्लीयरेंस कैंसिल कर दें। 


महाराष्ट्र के पालघर जिले स्थित तारापुर MIDC में एक रासायनिक इकाई से ओलियम गैस रिसाव के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। करीब 2,600 लोगों को एहतियातन सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।


ओडिशा में प्रस्तावित रणनीतिक तेल भंडार का काम अवैध खनन के कारण अटका हुआ है। हिन्दुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार राज्य सरकार और ISPRL ने जाजपुर जिले में तेल भंडार स्थापित करने का समझौता किया था, पर जमीन हज़ारों अवैध ब्लैकस्टोन खनन के काम से आज भी खाली नहीं हो सकी है।


मध्य प्रदेश के बडवानी में पहली कृषि कैबिनेट का आयोजन किया गया। इस दौरान 16 कृषि योजनाओं के लिए कुल 27 हज़ार 500 करोड़ रूपए मंज़ूर किए गए साथ ही मार्च 2026 में ख़त्म हो रही योजनाओं का कार्यकाल 5 साल के लिए बढ़ाया गया है।

विस्तृत चर्चा

खाद्य सुरक्षा और मिलावट के खिलाफ अभियान

होली के त्यौहार के मद्देनजर बाजारों में मिलावटी खाद्य सामग्री की बाढ़ आ गई है। इसके जवाब में मध्य प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक विशेष अभियान शुरू किया है। पिछले 10 दिनों में इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में की गई कार्रवाई के दौरान करीब ₹26 लाख का नकली खाद्य उत्पाद जब्त किया गया है और 17 कारोबारियों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। सबसे ज्यादा मिलावट नमकीन, पनीर, मावा, घी और मिठाइयों में पाई गई है।

निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया: FSSAI के सीईओ राजद पुन्हानी ने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर सक्रिय होने के निर्देश दिए हैं ताकि त्यौहारों के दौरान लोगों को सुरक्षित भोजन मिल सके। नियमों के अनुसार, पंजीकृत खाद्य केंद्रों का साल में कम से कम एक बार नियमित निरीक्षण अनिवार्य है। इसमें रैंडम सैंपलिंग, स्पॉट टेस्टिंग और सरप्राइज चेक (बिना बताए जांच) जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

स्रोतों के अनुसार, भारत में खाद्य सुरक्षा का बुनियादी ढांचा काफी कमजोर है:

प्रयोगशालाओं की कमी: पूरे देश में केवल 243 प्राइमरी और 22 रेफरल लैब ही नोटिफाई की गई हैं।

रिपोर्ट में देरी: मध्य प्रदेश में लिए गए नमूनों की रिपोर्ट आने में 14 दिन का समय लगता है, जो त्वरित कार्रवाई में बाधा है।

ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा: शहरों में चेकिंग बेहतर है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर यह व्यवस्था बहुत कमजोर है।

अस्थाई विक्रेता: त्यौहारों पर कई गैर-पंजीकृत विक्रेता घरों से सामान बनाकर खुले बाजार में बेचते हैं, जिन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है।


मध्य प्रदेश में पोषण आहार योजना का विवाद

मध्य प्रदेश का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय पोषण आहार बनाने का काम नाफेड (NAFED) को सौंपना चाहता है। इसका कारण यह है कि 31 मार्च से आजीविका मिशन के तहत चलने वाले सात सरकारी प्लांट बंद होने वाले हैं। हालांकि, मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस फाइल को फिलहाल लौटा दिया है।

हाई कोर्ट की रूलिंग: इंदौर हाई कोर्ट ने 2017 में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था, जिसके अनुसार पोषण आहार का निर्माण और वितरण केवल स्थानीय महिला समूहों, महिला मंडलों और ग्राम समुदायों के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। कोर्ट का मानना है कि यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं के जीवन के अधिकार से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें किसी भी निजी ठेकेदार की भागीदारी नहीं हो सकती।

नाफेड और आउटसोर्सिंग का मुद्दा: विवाद का मुख्य कारण यह है कि नाफेड स्वयं उत्पादन नहीं करता, बल्कि वह ई-प्रोक्योरमेंट और आउटसोर्सिंग के जरिए निजी कंपनियों और ठेकेदारों से काम करवाता है। यदि मंत्रालय नाफेड को यह काम सौंपता है, तो यह सीधे तौर पर हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हो सकता है।

गुणवत्ता बनाम रोजगार का संकट

सरकार का तर्क: सरकार की नई पोषण नीति का उद्देश्य पुरानी मशीनरी को हटाना और गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को दूर करना है, जिसके लिए निजी कंपनियों की भागीदारी और आउटसोर्सिंग को जरूरी माना जा रहा है। स्व-सहायता समूहों के काम में क्वालिटी के मुद्दे आ रहे थे।

विपक्ष और रोजगार: सात प्लांट बंद होने से हजारों महिलाएं बेरोजगार हो गई हैं। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि एक तरफ सरकार ‘लखपति दीदी’ बनाने की बात करती है और दूसरी तरफ महिलाओं से उनका मौजूदा रोजगार छीन रही है।

कुपोषण की स्थिति: मध्य प्रदेश में कुपोषण की स्थिति पहले से ही चिंताजनक है, ऐसे में इस योजना पर सही निर्णय लेना राज्य के स्वास्थ्य भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ SpotifyAmazon MusicJio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।

Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins