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मप्र आर्थिक सर्वे: प्रदेश का कितना हुआ विकास, कितनी बढ़ी देनदारी

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-146 है। बुधवार, 18 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए मध्य प्रदेश के आर्थिक सर्वे में क्या-क्या कहा गया। कितना हुआ विकास और कितनी बढ़ी देनदारी।


मुख्य सुर्खियां

NHAI राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे “बी कॉरिडोर” विकसित करने की योजना बना रहा है ताकि मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं का संरक्षण हो सके। इसके तहत 2026–27 में लगभग 40 लाख पेड़ लगाने और कम से कम तीन परागण कॉरिडोर बनाने की योजना है। 


केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित भारत विस्तार योजना को शुरू किया। इस योजना का उद्देश्य किसानों को तकनीक की मदद से कृषि संबंधित विभिन्न जानकारी प्रदान करना है।


हेल्थ सेक्टर में AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए SAHI और BODH नाम के प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गया। इसका उद्देश्य भरोसेमंद AI स्वास्थ्य समाधान विकसित करना है, जिससे दवा खोज, क्लिनिकल रिसर्च और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके।


अडानी ग्रुप ने मंगलवार को कहा कि वह 2035 तक रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले AI-रेडी डेटा सेंटर बनाने के लिए $100 बिलियन का निवेश करेगा।


मध्य प्रदेश सरकार ने विधानसभा में बताया कि बीते 5 साल में किसानों ने 15 हज़ार करोड़ रूपए का प्रीमियम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जमा किया है मगर उन्हें केवल 5 हज़ार करोड़ रूपए के बीमे का ही भुगतान किया गया है। 


मध्य प्रदेश के बजट से पहले विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। 2024-25 में विकास दर 8.04% दर्ज की गई जो राष्ट्रिय औसत से अधिक है। प्रदेश में दलहन उत्पादन 29% तक घटा है जबकि मांस 9% तक बढ़ा है।

विस्तृत चर्चा

मध्य प्रदेश बजट 2026-27 और कृषि परिदृश्य

बजट अनुमान और भविष्य का रोडमैप मध्य प्रदेश विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 4.70 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12% से 15% अधिक है। इस बजट की सबसे खास बात यह है कि सरकार बजट के साथ-साथ अगले 3 साल का रोडमैप भी पेश करेगी, जो किसी भी राज्य सरकार द्वारा पहली बार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब समावेशी विकास के साथ एक गतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है।

कृषि क्षेत्र की उपलब्धियां और ‘कृषि वर्ष’ वर्ष 2026 को मध्य प्रदेश में ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा, जिसके कारण कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाओं की उम्मीद है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2024-25 में राज्य के कुल फसल उत्पादन में 7.6% और खाद्यान्न उत्पादन में 14.6% की वृद्धि दर्ज की गई है। 

इसके अतिरिक्त:

उद्यानिकी क्षेत्र: 28.3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 425 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ है।

दुग्ध उत्पादन: यह 225 लाख टन के स्तर तक पहुंच गया है।

दलहन और सोयाबीन उत्पादन में गिरावट की चिंता सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद, दलहन (दालों) और सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है, जो एक चिंता का विषय है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनने और आयात कम करने पर जोर दिया है, ऐसे में राज्य में गिरता उत्पादन एक चुनौती है। सोयाबीन के मामले में, लगातार खराब मौसम के कारण फसल को नुकसान हो रहा है, जिससे किसान अब इसे उगाने से कतरा रहे हैं।


राज्य की वित्तीय स्थिति और देनदारियां

बढ़ता कर्ज और वित्तीय देनदारियां बजट से पहले राज्य की बढ़ती देनदारियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं, जो अब 5.31 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई हैं। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक यह आंकड़ा 20 साल पहले की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक होने का अनुमान है। यदि 2011 की जनगणना को आधार माना जाए, तो मध्य प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति पर लगभग 70,000 से 75,000 रुपये की देनदारी बैठती है।

कर्ज की संरचना और बाजार निर्भरता राज्य की कुल देनदारी में सबसे बड़ा हिस्सा बाजार से लिए गए स्टेट गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (बॉन्ड्स) का है। इसके अलावा अन्य वित्तीय विवरण इस प्रकार हैं:

केंद्र सरकार से ऋण: एमपी सरकार ने केंद्र से लगभग 14,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है।

ब्याज का भुगतान: राज्य सरकार को हर साल लगभग 28,000 करोड़ रुपये केवल ब्याज चुकाने में खर्च करने पड़ते हैं।

अन्य स्रोत: इसमें राष्ट्रीय लघु बचत कोष (NSSF), बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋण भी शामिल हैं।

सरकार का तर्क है कि कर्ज मुख्य रूप से पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) बढ़ाने के लिए लिया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता सड़क, सिंचाई, बिजली और अन्य स्थाई परियोजनाओं पर निवेश करना है। उनका मानना है कि इस तरह के निवेश से भविष्य में राज्य की आय बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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