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एनजीटी ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को दी मंजूरी

गुड मॉर्निंग और नमस्कार, आप सुन रहे हैं ग्राउंड रिपोर्ट का डेली मोर्निंग पॉडकास्ट। मैं हूँ शिशिर और हम बात करेंगे पर्यावरण से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण खबरों की। मगर चर्चा की ओर बढ़ने से पहले नज़र डालते हैं मंगलवार 17 फरवरी की हेडलाइंस की ओर।

मुख्य सुर्खियां

राजस्थान के भिवाड़ी की केमिकल फैक्ट्री में सोमवार सुबह करीब 9.30 बजे अचानक तेज धमाका हुआ। इसमें 8 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें दिल्ली एम्स रेफर किया गया है।


वहीं हरियाणा के फरीदाबाद में भी एक केमिकल फैक्ट्री में मशीन में शार्ट सर्किट होने से आग लग गई। देर शाम तक फरीदाबाद के सिविल और निजी अस्पताल में 5 पुलिसकर्मी समेत 42 लोगों के झुलसी हालत में पहुंचने की जानकारी सामने आई है।


NGT ने 80,000 करोड़ रुपये के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के ‘स्ट्रेटेजिक महत्व’ को ध्यान में रखते हुए इसे मंज़ूरी दे दी है। ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के खिलाफ याचिकाओं के बैच का निपटारा करते हुए, ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों और रेगुलेटरी एजेंसियों को “EC शर्तों का पूरी तरह और सख्ती से पालन” करने का निर्देश दिया। 


कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि भारत-US ट्रेड एग्रीमेंट के पहले हिस्से के लीगल टेक्स्ट को फाइनल करने के लिए एक इंडियन ट्रेड डेलीगेशन अगले हफ़्ते वाशिंगटन जाएगा। चीफ नेगोशिएटर, दर्पण जैन, लीगल एग्रीमेंट को फाइनल करने के लिए US जाने वाले डेलीगेशन को लीड करेंगे। 


राष्ट्रीय राजधानी में बीता सोमवार साल का सबसे गर्म दिन के रूप में दर्ज किया गया. IMD के अनुसार शहर के बेस स्टेशन सफदरजंग ऑब्जर्वेटरी में अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 7.2 डिग्री अधिक है।


मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में सोमवार को एक नर बाघ का शव मिला है. वन विभाग के एक अधिकारी ने शव मिलने की जानकारी देते हुए बताया कि बाघ को एक माह पहले ही कान्हा से रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया गया था.


स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ), भोपाल ने रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) एवं वनमंडल भोपाल के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए रेल नेटवर्क के माध्यम से दुर्लभ एवं प्रतिबंधित प्रजाति के कछुओं की तस्करी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान कुल 313 जीवित दुर्लभ कछुए और 2 जीवित रोज-रिंग्ड पैराकीट बरामद किए गए।


विस्तृत चर्चा

NGT ने 80,000 करोड़ रुपये के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के ‘स्ट्रेटेजिक महत्व’ को ध्यान में रखते हुए इसे मंज़ूरी दे दी है। इस माले में ट्रिब्यूनल ने क्या के कहा है बता रहे हैं वाहिद भट. हिमाचल प्रदेश में 37 हेक्टेयर भूमि को इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन के लिए चिन्हित किया गया था, लेकिन राज्य कैबिनेट ने इसी क्षेत्र में टाउनशिप को मंजूरी दे दी। पूरी खबर जानते हैं पल्लव जैन से.

एनजीटी ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को दी मंजूरी

इस पॉडकास्ट चर्चा में ग्रेट निकोबार द्वीप समूह पर प्रस्तावित मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा मिली मंजूरी (Green Signal) का विश्लेषण किया गया है। यहाँ चर्चा के मुख्य बिंदु दिए गए हैं: प्रोजेक्ट को हरी झंडी: एनजीटी ने ग्रेट निकोबार के लगभग 92,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस विशाल प्रोजेक्ट के तहत एक इंटरनेशनल पोर्ट, एयरपोर्ट, टाउनशिप और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा। फैसले का आधार: ट्रिब्यूनल ने कहा कि प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व (strategic importance) को देखते हुए इसमें दखल देने की कोई ठोस वजह नहीं है और अधिकारियों को पर्यावरण नियमों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। एनजीटी ने माना कि विकास और पर्यावरण के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

पर्यावरण संबंधी विवाद: आलोचकों और याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई थी कि इससे इकोलॉजी और कछुओं की नेस्टिंग साइट्स को नुकसान होगा। यह भी तर्क दिया गया कि पर्यावरण प्रभाव का अध्ययन (EIA) नियमों के मुताबिक तीन मौसमों के बजाय सिर्फ एक सीजन के डेटा पर आधारित था। राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां: पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इस फैसले को निराशाजनक बताया है और चेतावनी दी है कि इससे लंबे समय में पर्यावरण को नुकसान होगा। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए हाई पावर्ड कमिटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। भविष्य की बाधाएं: एनजीटी की मंजूरी के बावजूद कानूनी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। फॉरेस्ट क्लीयरेंस का मामला अभी भी कोलकाता हाईकोर्ट में लंबित है और स्थानीय समुदाय ने भी प्रोजेक्ट को लेकर चिंता जाहिर की है


शीतलपुर टाउनशिप पर पर्यावरण विवाद गहराया

शिशिर हिमाचल-चंडीगढ़ बॉर्डर पर शीतलपुर में राज्य सरकार वर्ल्ड-क्लास टाउनशिप बनाने जा रही है, लेकिन अब यह विवादों में हैं क्योंकि इस ज़मीन का 37 हेक्टेयर हिस्सा इकोलॉजिकल रीस्टोरेशन के लिए चिन्हिंत किया गया था। लेकिन राज्य सरकार ने इसके बावजूद यहां 30 दिसंबर 2025 को टाउनशिप बनाने की मजूरी दे दी है।

इस केस के इतिहास में अगर हम जाएं तो यह मामला 2024 में एक स्थानीय नागरिक विजय चंदेल की NGT में की गई शिकायत से शुरू हुआ।
इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शीतलपुर में एक्सकेवेटर और टिपर जैसी भारी मशीनों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी माइनिंग और खुदाई की जा रही है।

शिकायत में पेड़ों को उखाड़ने, शीतलपुर रोड को नुकसान पहुंचाने, और खुदाई की गई मिट्टी को रेलवे को गैर-कानूनी तरीके से बेचने का भी आरोप लगाया गया था।

इसके बाद, पुलिस और माइनिंग अधिकारियों ने कानून तोड़ने पर करीब 25 चालान जारी किए, और सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने इंवायरमेंटल कंपंसेशन की कुल 1.08 करोड़ रुपये की रिकवरी के लिए नोटिस दिए। जब ​​डिफॉल्टरों से पूरी रिकवरी नहीं हुई, तो एनजीटी ने राज्य सरकार को 30 मार्च, 2025 तक डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड से रकम जमा करने का निर्देश दिया।
इसके बाद यह रकम 2 अप्रैल, 2025 को पर्यावरण, विज्ञान और टेक्नोलॉजी और क्लाइमेट चेंज विभाग में जमा कर दी गई।

NGT ने स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को वसूले गए मुआवजे के इस्तेमाल के लिए एक एक्शन प्लान तैयार करने का भी निर्देश दिया था। इसके मुताबिक, बद्दी फॉरेस्ट रेंज में प्लांटेशन, ड्राई-स्टोन डैम, क्रेट-वायर डैम बनाने और उससे जुड़े इकोलॉजिकल कामों का एक प्रस्ताव पेश किया था।

पिछले साल 17 दिसंबर को अपनी हालिया कार्रवाई में, NGT ने मुआवजे की रकम के इस्तेमाल पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। लेकिन, अब उसी ज़मीन पर टाउनशिप प्रोजेक्ट को मंज़ूरी मिलने के बाद, प्लान किए गए पेड़ लगाने और मिट्टी बचाने के काम को ज़मीन को फ़ाइनल करने और बदले हुए एनवायरनमेंटल रेस्टोरेशन प्लान की तैयारी तक रोक दिया गया है।


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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

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