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अमेरिका से भारत में कृषि निर्यात बिना बड़े समझौते के भी बढ़ गया है और व्यापार संतुलन बदल रहा है। टैरिफ और नीतियों के कारण दोनों देशों के किसानों और बाजार पर अलग असर दिख रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट में जमे हुए भ्रूण के दान से जुड़े नियमों को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा कानून से कई दंपतियों के प्रजनन अधिकार सीमित हो रहे हैं।
हाइड्रोजन लीक मिलने के बाद नासा ने चंद्र मिशन को कम से कम मार्च तक टाल दिया है। सुरक्षा जांच और नई टेस्टिंग पूरी होने के बाद ही लॉन्च का फैसला होगा।
सेब के बागानों को नुकसान की आशंका के कारण दक्षिण कश्मीर की रेल परियोजनाएं फिलहाल रोक दी गई हैं। स्थानीय किसानों और नेताओं के दबाव के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
अरुणाचल प्रदेश ने अब तक परियोजना के लिए जरूरी वृक्षारोपण योजना पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हाइड्रो पीकिंग से हाथियों के आवागमन और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।
अमेरिका में टैरिफ घटने से आंध्र प्रदेश के झींगा निर्यातकों को राहत मिली है। उद्योग को उम्मीद है कि धीरे धीरे ऑर्डर वापस आएंगे, हालांकि प्रतिस्पर्धा अभी भी मजबूत है।
टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत होने से यूपी के लेदर निर्यातकों को फिर से कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। पहले भारी शुल्क के कारण कई यूनिट्स बंद होने की कगार पर पहुंच गई थीं।
नोएडा के एक अपार्टमेंट में कई महीनों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत है। जांच में बैक्टीरिया मिलने के बाद भी स्थायी समाधान न मिलने से लोग परेशान हैं।
सरकार का कहना है कि नए व्यापार समझौते में किसानों और डेयरी क्षेत्र के हित सुरक्षित रखे गए हैं। भारत अगले पांच साल में अमेरिका से बड़े पैमाने पर ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कृषि सामान खरीदने की योजना बना रहा है।
यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-132 है। बुधवार, 4 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए ट्रेड डील और कश्मीर के सेब के बागानों को बचाने के लिए रद्द हुई रेलवे परियोजनाओं के बारे में।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: टैरिफ में बड़ी कटौती, कृषि हितों पर बहस तेज
सोमवार को भारत और अमेरिका के बीच नई ट्रेड डील की घोषणा हुई, जिसके तहत भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कृषि उत्पाद, कोयला समेत कई अमेरिकी प्रोडक्ट्स की बड़े पैमाने पर खरीद करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत अगले पांच वर्षों तक हर साल करीब 100 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान आयात करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो पिछले साल के आयात से दोगुने से भी अधिक है। वित्त वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका से 45 अरब डॉलर का आयात किया था, जबकि अमेरिका को निर्यात 86.51 अरब डॉलर रहा।
इस डील में एयरक्राफ्ट, टेक्नोलॉजी उपकरण, कीमती धातुएं, तेल, न्यूक्लियर प्रोडक्ट और कृषि से जुड़े सामान प्रमुख रूप से शामिल होंगे। हालांकि कृषि क्षेत्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि भारत ने पहले भी अपने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आयात समझौतों में सतर्क रुख अपनाया है, जैसा यूरोपीय संघ के साथ वार्ताओं में देखा गया था। मौजूदा समझौते में कुछ कृषि उत्पादों के आयात पर सहमति बनी है, लेकिन भारत ने जेनेटिकली मॉडिफाइड उत्पादों, सोया मील, पोल्ट्री, मक्का और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बरकरार रखी है। कपास, दालों, शाहबलूत और प्याज समेत कुछ उत्पादों के लिए कोटा एक्सेस दिया गया है, जबकि सेब जैसे उत्पादों को सीमित बाजार पहुंच मिली है।
अमेरिकी कृषि सचिव ब्रूक रोलिंस ने कहा कि इस समझौते से भारत के विशाल बाजार में अमेरिकी कृषि निर्यात बढ़ेगा और ग्रामीण अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के साथ 1.3 बिलियन डॉलर के कृषि व्यापार घाटे को कम करने में यह डील अहम भूमिका निभाएगी। वहीं, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने दावा किया कि इस समझौते में भारत के कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की पूरी तरह रक्षा की गई है और यह डील अन्य देशों को मिली शर्तों से बेहतर है। सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री ने किसानों और पशुपालन से जुड़े लोगों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया, लेकिन विशेषज्ञों के बीच यह बहस जारी है कि बढ़ते आयात और घरेलू सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाएगा।

एप्पल बागानों को बचाने के लिए साउथ कश्मीर की प्रस्तावित रेलवे परियोजनाएं फिलहाल स्थगित
साउथ कश्मीर से जुड़ी एक अहम खबर में केंद्र सरकार ने कुछ प्रस्तावित रेलवे लाइनों को फिलहाल होल्ड पर डाल दिया है। यह फैसला संभावित एप्पल ऑर्चर्ड्स को होने वाले नुकसान को देखते हुए लिया गया। संसद में केंद्रीय रेल मंत्री ने बताया कि जम्मू कश्मीर सरकार और स्थानीय सांसदों के अनुरोध पर इन परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। बारामूला श्रीनगर लाइन के अलावा सोपोर से कुपवाड़ा, अवंतीपुरा से शोपियां और अनंतनाग से बिजबेहड़ा होते हुए पहलगाम तक तीन नए रूट प्रस्तावित थे, जिनकी कुल लंबाई दर्जनों किलोमीटर में फैली हुई थी और जिन पर सर्वे की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी।
ये सभी इलाके कश्मीर के प्रमुख एप्पल उत्पादन क्षेत्रों में आते हैं। जैसे ही रेलवे ट्रैक का प्रस्ताव सामने आया, शोपियां और अनंतनाग के किसानों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि सीमित कृषि भूमि में कटौती से सीधे उनकी आजीविका प्रभावित होती। स्थानीय अनुमानों के मुताबिक इन परियोजनाओं के आगे बढ़ने पर शोपियां और पुलवामा जिलों में करीब सात लाख पेड़ों की कटाई करनी पड़ सकती थी। कश्मीर की अर्थव्यवस्था में बागवानी क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी है और करीब 33 लाख लोगों की रोजी रोटी इससे जुड़ी मानी जाती है।
फैसले के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों ने राहत जताई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी सांसदों की भूमिका का जिक्र करते हुए नेताओं ने कहा कि लोगों की चिंताओं को समय पर सुनना जरूरी था। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी इसे घाटी की हॉर्टिकल्चर इकॉनमी के लिए जरूरी कदम बताया और कहा कि परियोजनाएं उपजाऊ जमीन और रोजगार के लिए खतरा बन सकती थीं। यह पूरा मामला विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। साउथ कश्मीर के लिए यह केवल रेलवे लाइन का मुद्दा नहीं था बल्कि एप्पल बागानों, स्थानीय रोजगार और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा हुआ फैसला था।
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