2023 में प्रदूषित हवा से 20 लाख लोगों की मौत, महाराष्ट्र के किसानों को ₹5,000 की सूखा राहत, महंगाई के बीच नासिक में सड़ गई प्याज़, मप्र में पैराक्वाट डाइक्लोराइड बैन। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
‘इंडिया एयर पॉल्यूशन 2026’ रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में भारत में प्रदूषित हवा के कारण 20 लाख लोगों की मौत हुई। यह वर्ष 2000 की तुलना में 43% अधिक है। डब्ल्यूएचओ मानकों के अनुरूप स्वच्छ हवा मिलने पर भारतीयों की औसत जीवन प्रत्याशा 3.5 वर्ष (दिल्ली में 8.2 वर्ष) बढ़ सकती है।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा गंभीर संकट से जूझ रहे 305 तालुकों के किसानों को ₹5,000 की अग्रिम सूखा राहत देने की घोषणा की है. इस पर विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। ऑल इंडिया किसान सभा और विपक्षी नेताओं ने इसे किसानों के साथ क्रूर मजाक और अपमान बताया है।
देशभर में प्याज के खुदरा भाव ₹60 प्रति किलो पहुंचने के बीच नासिक के गोदामों में खरीदा गया लगभग 9 से 10 लाख क्विंटल प्याज सड़ गया। सरकार ने नाफेड और एनसीसीएफ के जरिए लासलगांव मंडी से ₹23 प्रति किलो के भाव पर करीब 12 लाख क्विंटल प्याज खरीदा था, जिसमें से केवल 2.3 लाख क्विंटल ही बाजार में बिक सका। तीन बार नीलामी निकालने के बावजूद यह प्याज ₹1 प्रति किलो में भी नहीं बिका.
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद के अनुसार, भारत को 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त 91 गीगावाट जोड़ना होगा. इसके लिए ₹15 लाख करोड़ के निवेश की आवश्यकता होगी। वर्तमान में देश की स्थापित परमाणु क्षमता लगभग 8.8 गीगावाट है, जिसे 2030-31 तक 22 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
मध्य प्रदेश सरकार ने पैराक्वाट डाइक्लोराइड के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है, जिसका इस्तेमाल किसान 24 से 72 घंटे में मूंग की फसल को सुखाने के लिए कर रहे थे। कृषि कल्याण एवं कृषि विकास विभाग ने विनिर्माता कंपनियों को इसकी बिक्री और भंडारण तुरंत बंद करने, पंजीकरण प्रमाण पत्र लौटाने तथा बाजार से स्टॉक वापस मंगाकर नष्ट करने का निर्देश दिया है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोनल बेंच ने सर्दियों से पहले मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) तलब की है। एनजीटी ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) और त्योहारों पर पटाखों से जुड़े नियमों का कड़ा अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024-25 में भोपाल का वार्षिक औसत PM10 स्तर 3% घटकर 110 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ, जबकि इंदौर का स्तर 99 से बढ़कर 108 माइक्रोग्राम पहुंच गया।
विस्तृत चर्चा
मध्य प्रदेश के 18 जिलों में 2 से 12 घंटे तक की अघोषित बिजली कटौती हो रही है। इस पर प्रदेश में प्रदर्शन भी हुए हैं। पल्लव जैन बता रहे हैं पूरा मामला क्या है?
बिजली कटौती से परेशान ग्रामीण
मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के ग्रामीण इलाकों में रात के समय 2-10 घंटे तक अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। इससे परेशान ग्रामीण सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सीहोर के कोठरी में किसानों ने इंदौर-भोपाल स्टेट हाईवे जाम किया तो गुना में बिजली विभाग के दफ्तर पर ताले लगा दिए गए। राजगढ़, भोपाल, श्योपुर , ग्वालियर समेत 18 से अधिक जिलों में विरोध प्रदर्शन दर्ज किये गए।
बिजली की बढ़ती हुई मांग
दरअसल मध्य प्रदेश में अक्टूबर में समान्यत: 11 हज़ार मेगावॉट बिजली की मांग रहती है, जो इस वर्ष 15-17 हज़ार मेगावॉट पर पहुंच गई है। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में इस समय 800 मेगवॉट बिजली की कमी है। ऊर्जा विभाग इस कमी को पूरा करने के लिए पावर एक्चेंज से बिजली खरीदने के साथ सभी मौजूदा विकल्पों पर विचार कर रही है।
ऊर्जा सचिव विशेष गढ़पाले के मुताबिक राज्य में बारिश की अनियमितता तापमान में कमी न आने के कारण अक्तूबर में मांग अचानक बढ़ी है। उनका कहना है कि अतिरिक्त मांग पूरी करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के मुताबिक मानसून के दौरान कोयले से बिजली का उत्पादन 1% से 2% तक कम हो जाता है। कोयले से बिजली उत्पादन को अधिकतम करने और मेंटेनेंस (रखरखाव)से गुजर रहे बिजली संयंत्रों को जल्द से जल्द फिर से शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। तोमर ने कहा कि “राज्य में कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। बिजली की मांग को पूरा करने के लिए जलविद्युत संयंत्रों (हाइडेल पावर प्लांट) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार किसानों को 10 घंटे बिजली देने और अन्य उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
2-4 घंटे ही बिजली मिल रही
हालांकि राज्य में कई जिलों में किसान 10 घंटे बिजली न मिलने के आरोप लगा रहे हैं। रायसेन में किसानों का कहना है कि उन्हें केवल 2-4 घंटे ही बिजली मिल रही है। इधर राजगढ़ में खेती की बिजली तो पर्याप्त मिल रही है लेकिन ग्रामीण इलाकों में घरेलू बिजली कटौती जारी है।
राज्य में इस समय खरीफ की फसल की कटाई चल रही है, अक्तूबर के अंत में रबी की फसल की बुवाई शुरु होगी। ऐसे में किसानों को बुवाई के लिए पानी की ज़रुरत होगी। अगर जल्द बिजली संकट नहीं सुलझाया गया तो किसानों की फसलें प्रभावित हो सकती है। यह संकट और बड़ा बन सकता है क्योंकि राज्य के कई जिलों में अल नीनो की वजह से औसत से कम बारिश हुई है और कई जलाशयों में पानी कमी है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।
Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India
We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.
Connect With Us
Send your feedback at greport2018@gmail.com
Newsletter
Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.
When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.
Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

