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वन विभाग की ‘बुल्डोजर कार्रवाई’ के खिलाफ शिवराज धरने पर

विंटर मानसून से लेकर शिवराज के धरने तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

हफ्ते भर बाद ‘विंटर’ मानसून सक्रिय होगा, कैंसर की दवाओं पर सरकार का एक्शन, अरुणाचल में जलविद्युत परियोजना के खिलाफ आन्दोलन, अवैध जुताई रोकने गए वन अमले पर हमला। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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मुख्य सुर्खियां

दक्षिण-पश्चिम मानसून की 15 अक्टूबर तक विदाई के तुरंत बाद 20 अक्टूबर से 8 नवंबर के दौरान देश में उत्तर-पूर्व (‘विंटर’) मानसून सक्रिय रहेगा। अल-नीनो की उपस्थिति के बावजूद मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि दक्षिण भारत में भारी बारिश होगी और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत के पहाड़ों व मैदानी क्षेत्रों में वर्षा होगी।


केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि जीवन रक्षक कैंसर रोधी दवाओं पर अत्यधिक मुनाफाखोरी रोकने के लिए ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% तक सीमित किया जाएगा। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि इसके दायरे में आने वाली आवश्यक दवाओं की सूची जल्द अधिसूचित की जाएगी।

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गुजरात में 13 से 17 अक्टूबर के बीच तेज गर्मी पड़ने की संभावना है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। राजकोट में पहले ही 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है, जबकि पोरबंदर सहित अन्य इलाकों में भी गर्मी का असर बना हुआ है।


अरुणाचल प्रदेश की सियांग घाटी में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की बहुउद्देश्यीय जलविद्युत परियोजना के खिलाफ स्थानीय आदि (Adi) जनजातीय समुदाय बड़े पैमाने पर आंदोलन कर रहा है। प्रोजेक्ट के प्री-फीजिबिलिटी सर्वे और भारी सिक्योरिटी फोर्स की तैनाती के बाद चार प्रोटेस्टर्स पर UAPA के तहत एक्शन लिया गया, जिससे गुस्सा फैल गया और यूथ ऑर्गनाइज़ेशन्स ने पब्लिक हियरिंग का बॉयकॉट करने का ऐलान किया है।


सागर जिले के अंबेडकर अभयारण्य से लगी वनभूमि पर अवैध जुताई रोकने गए वन अमले पर ग्रामीणों ने लाठी-पत्थरों से हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प में डिप्टी रेंजर शैलेंद्र तिवारी का सिर फूट गया और 5 अन्य वनकर्मी घायल हो गए, जबकि एक आरोपी ने वनकर्मियों पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास भी किया।

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विस्तृत चर्चा

मध्य प्रदेश के बुधनी के कोसमी गांव में बीते दिनों वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई किए जाने के बाद केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने काफी विरोध किया। तो हमने सोचा कि आज पल्लव जैन से समझा जाए कि पूरा मामला क्या है?

आदिवासी ‘वोटरों’ के लिए शिवराज का धरना 

रविवार 11 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे सीहोर मध्य प्रदेश के बुधनी ब्लॉक के कौसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के घरों पर बुल्डोज़र चला दिया गया। खेत में लगी फसल तबाह कर दी गई और सिंचाई के कुएं मिट्टी से भर दिये गए। 

वन विभाग का आरोप है कि ये आदिवासी परिवार वन भूमि पर कब्ज़ा कर रह रहे थे। वन विभाग के मुताबिक लाड़कुई परिक्षेत्र की कौसमी बीट के कक्ष क्रमांक 426 में 183 हेक्टेयर प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट एरिया है, जहां वन विभाग ने वर्ष 2021 में प्लांटेशन किया था। इस भूमि के लगभग 32 हेक्टेयर हिस्से पर वर्ष 2022 में सिंगपुर गांव के 10 परिवारों ने प्लांटेशन को नष्ट कर जमीन को समतल किया और खेती शुरु कर दी। धीरे-धीरे यहां कच्चे घर बने और कब्जा होता चला गया। वन विभाग ने मॉनसून का इंतज़ार किया और अब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। 

शिवराज से मिले पीड़ित

यह इलाका केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र है। जब उनको यह खबर मिली तो वो घटना स्थल पर पहुंचे और अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। जो पीड़ित हैं उन्होंने रोते हुए अपनी गाथा शिवराज को बताई जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए तभी से यह मामला सुर्खियों में छाया हुआ है। 

शिवराज का कहना है कि यहां जुल्म की इंतहा हुई है, क्योंकि न सिर्फ घर तोड़े गए हैं, इन आदिवासियो ने जो फसल उगाई थी उसके पकने का भी इंतज़ार नहीं किया गया और इनकी मेहनत पर बुल्डोज़र चलाया गया। 

पहले भी उठा चुके हैं सवाल

शिवराज का गुस्सा इसलिए भी सातवे आसमान पर था क्योंकि उन्हों 2025 में भी इन लोगों को न हटाने के लिए वन विभाग से कहा था और जब अभी वो घटना स्थल पर पहुंचे तो जिले का कोई बड़ा अधिकारी या वन विभाग का अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था। शिवराज धरने पर बैठे हुए हैं, उनके साथ उनके बेटे कार्तिकेय और विधायक रमाकांत भार्गव भी हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस पूरे मामले को शिवराज और मोहन यादव के बीच तनाव के साथ जोड़ा है। उन्होंने कहा कि इसका खामियाज़ा आदिवासियों को भुगतना पड़ रहा है। 

सीएम मोहन यादव का भी इस मामले पर बयान आया है उन्होंने कहा कि अगर हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता कुछ कह रहे हैं तो उसे सुनने में कोई बुराई नहीं है। जांच करवा लेते हैं दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। 

बुरी तरह नष्ट होते जंगल

पूरे मीडिया की नज़र इस मामले पर हो रहे राजनीतिक घमासान पर है। लेकिन हम बताना चाहेंगे की इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2025 के मुताबिक बुधनी वो क्षेत्र हैं जहां पिछले 10 सालों में जंगलों को बुरी तरह नष्ट किया गया है। यहां घने जंगल न के बराबर बचे हैं। अगर हम पुराने अखबार उठाकर देंखें तो लाड़कुई बीट से लगातार जंगलों के अवैध कटाई के मामले छपे मिलते हैं। वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक राज्यभर में 6 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर कब्ज़ा हो रखा है। इसमें वन विकास मंडल की ज़मीनें भी हैं। 

जैसा कहा जा रहा है कि ये आदिवासी यहां पीढ़ियों से रह रहे हैं तो यहां जो सवाल है कि आखिर आदिवासियों को वनाधिकार पट्टे क्यों वितरित नहीं किये गए, ये आदिवासी झोपड़ी बनाकर रहने को क्यों मजबूर हैं? जैसा वन विभाग कह रहा है कि इन आदिवासियों ने पिछले कुछ वर्षों में ही कब्ज़ा किया है तो उनकी ऐसी क्या मजबूरी है जो वो ऐसा कर रहे हैं? 

शिवराज यहां साफ कहते है कि ये लोग भाजपा के वोटर हैं इसलिए इनका संरक्षण होना चाहिए। तो यहां सवाल है कि क्या अगर ये भाजपा के वोटर नहीं होते तो शिवराज इस कार्रवाई को वाजिब मानते। 

यहां सवाल जांच का है और आदिवासियों के वनाधिकारों की स्थापना और आजीविका के संकट पर ध्यान देने का अधिक है।      

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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