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रिपोर्टर से बात: चरम मौसम, किसान परिवार और मानसिक सेहत

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गोमती में बाढ़ से लखनऊ के 25,000 लोग प्रभावित हैं, पनामा में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया, और ओरंगुटान शावक इंडोनेशिया भेजा जाएगा। आज की खास चर्चा में जानिए कि मध्य प्रदेश में चरम मौसमी घटनाओं से फसलें बर्बाद होने पर किसान परिवार कैसे टूट रहे हैं, आत्महत्याएं क्यों बढ़ रही हैं, और मानसिक स्वास्थ्य की व्यवस्थाएं कितनी दुरुस्त हैं।

प्रमुख हेडलाईन्स

गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से उत्तरी लखनऊ के कुछ इलाके डूब गए हैं जिससे हज़ारों लोगों को विस्थापन और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। 5,000 परिवार — यानी करीब 25,000 लोग यहां बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं।


2 साल पहले ठाणे, महाराष्ट्र के जंगलों में मिले ओरंगुटान शावक को इंडोनेशिया भेजने की तैयारी पूरी हो गई है। फिलहाल यह गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा में रह रहा है।

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दक्षिणी पनामा में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और हज़ारों लोग सड़कों पर आ गए। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक जब ज़मीन हिली, तो चौराहों, पार्कों और इमारतों के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई।


2023-24 के अल नीनो वर्षों के दौरान, दुनिया के 75 प्रतिशत से ज़्यादा ट्रॉपिकल जंगलों में सामान्य से कहीं ज़्यादा गंभीर सूखा और हीटवेव देखी गई।

रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि उत्सर्जन के संभावित हालात को देखते हुए, 20 साल से भी कम समय में ट्रॉपिकल जंगलों वाले इलाकों के लिए भीषण गर्मी new normal बन सकती है।

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आज की चर्चा

एक्सट्रीम वेदर इवेंट, आत्महत्या और मानसिक तनाव से जूझते किसान परिवार

मध्य प्रदेश देश के उन राज्यों में से एक है जहां जलवायु परिवर्तन की वजह से चरम मौसमी घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसकी वजह से होने वाली मौतों के मामले में भी मध्य प्रदेश शीर्ष राज्यों में से एक है। चरम मौसमी घटनाओं का सबसे अधिक असर कृषि से जुड़े समुदायों पर पड़ रहा है। फसलों को होने वाले नुकसान की वजह से किसानों पर बढ़ता आर्थिक बोझ उन्हें आत्महत्या की कगार तक ले जा रहा है। हमारे रिपोर्टर शिशिर अग्रवाल ने मध्य प्रदेश के कुछ ऐसे ही परिवारों से बात की है जहां फसल खराब होने की वजह से परिवार में किसी सदस्य ने आत्महत्या की हो। उनकी रिपोर्ट गहराई से इस बात को समझने का प्रयास करती है कि कैसे चरम मौसमी घटनाएं किसान परिवारों पर मानसिक दबाव बढ़ा रही हैं और इस मानसिक तनाव को कम करने के लिए जो स्वास्थ्य व्यवस्थाएं उपलब्ध होनी चाहिए, वे कितनी दुरुस्त हैं।

शिशिर अग्रवाल, एडिटर हिंदी, ग्राउंड रिपोर्ट

बागला में रहने वाली राजूबाई (47) दिन का ज़्यादातर समय चुपचाप गुजारती हैं | फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल

पल्लव जब हम ये चर्चा कर रहे हैं तब दुनिया अल नीनो के बुरे प्रभाव से जूझ रही है. मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और गुजरात के सौराष्ट्र में सूखे जैसे हालात हैं. वहीं महाराष्ट्र के 358 तालुकाओं में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। कर्नाटक में भी 240 में से 217 तालुका में सूखा घोषित हो चुका है. इसी बीच हम महाराष्ट्र में किसान आत्महत्याओं की भी ख़बरें देख सुन रहे हैं।

पिछले साल अतिवृष्टि के बाद मध्य प्रदेश में भी कुछ किसानों ने आत्महत्या की थी. मैंने श्योपुर में ऐसे ही एक किसान पर खबर भी की थी. आम तौर पर किसानों की आत्महत्या की खबरें मुआवज़े तक सीमित रह जाती हैं और उनका कोई फॉलोअप होता नहीं दिखता. मैं ऐसे ही कुछ परिवारों के संपर्क में था जहां आत्महत्या की घटना हुई थी.

मैंने महसूस किया कि ये परिवार इन घटनाओं के बाद मानसिक दिक्कतों से जूझ रहे हैं. इसी विचार के साथ मैंने ये इन्वेस्टिगेट करना शुरू किया की आखिर इन लोगों की स्थिति क्या है, एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स और इन घटनाओं का इन पर क्या असर हुआ है? साथ ही ये कि आखिर मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाएं कहां स्टैंड करती हैं?

इसके लिए मैं उज्जैन गया जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का गृह जिला भी है. यहां कम से कम 5 किसानों ने अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच आत्महत्या की थी. पल्लव मैंने पाया कि इन किसान परिवारों में कम से कम एक सदस्य अनिद्रा, घबराहट और डिप्रेशन के अर्ली सिम्पटम्स से जूझ रहा है. जिन परिवारों में केवल महिलाएं ही बची हैं वहां स्थित और ख़राब थी. ऐसे ही एक परिवार में इसी साल भारी बारिश के बाद सोयाबीन के बीज ही बह गए और उन्हें दोबारा बोवाई करनी पड़ी. यानि अब भी एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स और उससे होने वाला घाटा जारी है.

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 13.90% लोग मानसिक बीमारियों से ग्रसित हैं जो राष्ट्रीय औसत 10.70% से भी ज्यादा है। इससे निपटने के लिए भारत में डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम देश के 767 जिलों में संचालित हो रहा है। फिर भी हमने जिन 5 परिवारों से संपर्क किया उनमें से किसी को भी जिला अस्पताल में इस सुविधा के बारे में नहीं पता था।

इसी तरह मेंटल काउंसलिंग के लिए टेलीफोनिक सेवा टेली मानस है. मगर कैग की रिपोर्ट के अनुसार टैली मानस के 16% कॉल अनुत्तरित थे जबकि 78% समय से पहले ही ड्रॉप हो गए। हमने खुद जब इन नंबरों पर कॉल किया तो ज्यातर समय लाइन व्यस्त थी और हमारी बात किसी से भी नहीं हुई.

ये रिपोर्ट विस्तार से एक्सट्रीम वेदर इवेंट, उसके चलते मानसिक तनाव से जूझते किसान परिवार और लचर व्यवस्था की कहानी कहती है. ये रिपोर्ट अभी हिंदी में प्रकाशित हुई है और इसे एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज्म के क्लाइमेट चेंज मीडिया हब का सहयोग मिला है. जल्द ही रिपोर्ट इंग्लिश में भी प्रकाशित होगी. उम्मीद करता हूँ हमारे श्रोता इसे पढ़ेंगे.

रिपोर्ट लिंक मध्य प्रदेश में चरम मौसम से किसान परिवारों पर बढ़ता मानसिक दबाव

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