सरकार ने महंगाई थामने के लिए 17 शहरों में सस्ता प्याज बांटा; महाराष्ट्र डेटा सेंटरों के लिए नई SOP बनाएगा; केरल में नेट मीटर की कमी से 50,000 सोलर प्लांट ठप; बिहार में गंगा खतरे के निशान से ऊपर, हाई अलर्ट; मध्य प्रदेश में रेलवे परियोजना के लिए ढाई लाख पेड़ कटेंगे; सीधी में तेंदुए की खाल के साथ शिकारी गिरोह पकड़ा गया; और आज की चर्चा में बात करेंगे सागर जिले में जहरीली शराब से 15 मौतों पर।
आज की प्रमुख हेडलाईन्स
भारत सरकार ने महंगाई पर काबू पाने के लिए 10 दिनों के भीतर 17 शहरों में अपने बफर स्टॉक से 4,000 टन प्याज जारी किया है। सरकार ने यह रियायती प्याज बाजारों में ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया है। केंद्र सरकार के पास वर्तमान में 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है।
महाराष्ट्र देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जो डेटा सेंटरों के लिए व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करेगा। इसके तहत डेटा सेंटरों और आवासीय क्षेत्रों के बीच अनिवार्य बफर जोन बनाए जाएंगे। सर्वर की कूलिंग के लिए पीने के पानी के बजाय पुनर्चक्रित (recycled) और उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग अनिवार्य होगा।
केरल में नेट मीटर की अनुपलब्धता के कारण लगभग 50,000 घरेलू रूफटॉप सोलर प्लांट ठप पड़े हैं। इस कमी के कारण अच्छी धूप के बावजूद बिजली ग्रिड से नहीं जोड़ी जा पा रही है। केरल राज्य विद्युत बोर्ड (KSEB) ने इस समस्या को हल करने के लिए 10 अगस्त को 82,000 सिंगल-फेज मीटर और 21,000 थ्री-फेज नेट मीटर का ऑर्डर दिया है।
पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर अपने पिछले सर्वोच्च स्तर (HFL) को पार कर गया है, जिसके बाद बिहार सरकार ने निचले जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। गंगा, कोसी, गंडक, पुनपुन और सोन नदियां उफान पर हैं। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और ₹5,000 करोड़ की तत्काल वित्तीय सहायता जारी करने की मांग की है।
मध्य प्रदेश में इंदौर के पास चोरल के जंगलों में एक नई रेलवे लाइन परियोजना के लिए अक्टूबर से पेड़ों की कटाई शुरू होगी, जिसमें अगले तीन वर्षों में 2.5 लाख पेड़ काटे जाएंगे। लकड़ी के परिवहन के लिए 25 ट्रकों का उपयोग किया जाएगा। बदले में रेलवे ने ₹10 करोड़ की क्षतिपूर्ति राशि दी है, और वन विभाग 5 लाख नए पौधे लगाने का दावा कर रहा है।
डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की टीम ने सीधी जिले में वन्यजीव शिकारियों के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। टीम ने एक सफेद महिंद्रा थार गाड़ी को घेरकर तलाशी ली, जिसमें से तेंदुए की खाल बरामद हुई। इस मामले में गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।
आज की चर्चा
अब्दुल वसीम अंसारी, ग्राउंड रिपोर्ट
सागर जिले में ज़हरीली शराब से मौतें
मध्य प्रदेश के सागर जिले से आई एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर पर, जिसने हमारे सरकारी सिस्टम की आंखें खोल दी हैं—या यूं कहें कि सिस्टम की आंखें मूंदने की आदत को बेनकाब कर दिया है। मामला है जहरीली शराब का, जिससे अब तक 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। लेकिन इस खबर में सबसे हैरान और गुस्सा दिलाने वाली बात यह है कि जिस शराब ब्रांड को पीने से ये मौतें हुईं, उसे हमारे आबकारी विभाग ने मौत से ठीक एक दिन पहले क्लीनचिट दे दी थी और अपनी सरकारी रिपोर्ट में उसे पूरी तरह से सुरक्षित बताया था।
आइए इस पूरी घटना की क्रोनोलॉजी समझते हैं कि लापरवाही का यह खेल कैसे खेला गया:
- सबसे पहले 2 सितंबर 2026 को दैनिक भास्कर अखबार ने एक बड़ा खुलासा किया कि सागर के गांवों में, खास तौर पर बंडा और शाहगढ़ तहसील में, अमानक और बेहद खतरनाक शराब बेची जा रही है।
- अखबार की रिपोर्ट के बाद सरकारी महकमे में थोड़ी हलचल हुई। 5 सितंबर को आबकारी विभाग ने एक जांच रिपोर्ट जारी की और बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना तरीके से कह दिया कि शराब सुरक्षित है।
- और ठीक इसके अगले दिन, यानी 6 सितंबर को, उसी तथाकथित सुरक्षित शराब को पीने के बाद एक-एक करके 15 लोगों की मौत हो गई।
- आनन-फानन में पुलिस को एफआईआर दर्ज करनी पड़ी, जिसमें उसी ‘बॉम्बे व्हिस्की’ और ‘गोरा गोल्ड’ ब्रांड का नाम सामने आया, जिसे विभाग एक दिन पहले सुरक्षित बता रहा था।
अब सवाल उठता है कि इस शराब में ऐसा क्या था। फॉरेंसिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि शराब में मिथाइल अल्कोहल (Methyl Alcohol) मिलाया गया था। यह एक ऐसा खतरनाक केमिकल है, जिसका असर तुरंत नहीं दिखता। शराब पीने के 12 से 24 घंटे बाद इंसानी शरीर पर इसका असर शुरू होता है। पीड़ितों को पहले आंखों में धुंधलापन दिखने लगा, फिर भयंकर उल्टियां हुईं और तेज बुखार आया। देखते ही देखते गांवों के कई घरों के चिराग बुझ गए। इस समय भी 150 से ज्यादा लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत 30 लोगों पर केस दर्ज किया है और 10 को हिरासत में लिया है।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री और सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी और बंडा थाना प्रभारी समेत 5 बड़े अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपये के मुआवजे का एलान भी हुआ है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि पिछले 5 साल में मध्य प्रदेश में जहरीली शराब की यह 8वीं बड़ी घटना है। उज्जैन, खरगोन, मुरैना से लेकर आज सागर तक… आखिर कब तक मासूमों की जान जाने के बाद ही हमारा प्रशासन जागेगा?
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।




