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अर्ली फ्लड वार्निंग में कैसे मदद करेगा मप्र का ‘गरुण’? 

फ्लड वार्निंग के लिए 'गरुड़' के इस्तेमाल से लेकर सफाई कर्मियों की हड़ताल तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें

परमाणु ऊर्जा को ग्रीन एनर्जी का दर्जा देने की मांग, आंध्र प्रदेश में मलेरिया रोधी गोली खाने के बाद मौत, हरियाणा में 13000 सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, बच्चों की मौत के बाद बलाघाट के सीएमएचओ को हटाया गया। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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मुख्य सुर्खियां

निजी कंपनियां परमाणु ऊर्जा को ग्रीन एनर्जी का दर्जा देने की मांग कर रही हैं। इससे उन्हें ग्रीन बॉन्ड और ग्रीन लोन के माध्यम से फंड जुटाने में मदद मिलेगी। भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इन्वेस्ट इंडिया की निवृत्ति राय के अनुसार, इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कम से कम 228 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी।


आंध्र प्रदेश के गोल्लागुप्पा गांव में मलेरिया रोधी गोलियां खाने के बाद एक सात साल की बच्ची की मौत हो गई। इसके अलावा, 70 से अधिक लोग बीमार पड़ गए हैं। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

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हरियाणा में करीब 13,000 सफाई कर्मचारी नियमितीकरण की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। बुधवार को इस हड़ताल का 28वां दिन था। इस हड़ताल से राज्य के शहरों में सफाई व्यवस्था ठप हो गई है और सड़कों पर कचरे के ढेर लग गए हैं। सरकार ने सफाईकर्मियों के साथ छह दौर की बैठकें की हैं। 


तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मेट्टूर बांध के गेट खोलने के आदेश दिए हैं। इससे कावेरी डेल्टा के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। सामान्य तौर पर यह बांध 12 जून से 28 जनवरी तक खुलता है, जिससे 230 दिनों की सिंचाई अवधि मिलती है। इस वर्ष कमजोर मानसून और कर्नाटक द्वारा पानी नहीं छोड़े जाने के कारण इसमें काफी देरी हुई। 


बालाघाट में समय पर बीमारी का प्रबंधन न करने से 27 आदिवासी बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने सीएमएचओ डॉ। परेश उपलप को हटा दिया गया है। उनकी जगह डिंडोरी के डॉ। मनोज पांडे को नया सीएमएचओ नियुक्त किया गया है। बालाघाट में अभी भी 132 बच्चे बीमार हैं। 

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मध्य प्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STF) अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने में शामिल हो गई है। एसटीएफ तस्करों और उनके मार्गों के सुराग सीबीआई (CBI), डीआरआई (DRI) और इंटरपोल के साथ साझा करेगी। यह सिंडिकेट थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया से भारत तक फैला हुआ है।

विस्तृत चर्चा

मध्य प्रदेश के नगरीय विकास विभाग ने जीआईएस आधारित ‘गरुड़’ (Garud) प्लेटफॉर्म को ई-नगर पालिका से जोड़ा है। इस प्लेटफॉर्म में ‘फ्लड सिमुलेशन’ मॉड्यूल भी शामिल है, जो बाढ़ और भारी बारिश के समय पानी के बहाव का सटीक अनुमान लगाता है। इस बारे में और जानिए वाहिद भट से। 

मध्य प्रदेश जीआईएस-आधारित बाढ़ पूर्वानुमान 

मध्य प्रदेश में एक ओर जहां भारी मानसूनी बारिश और अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का खतरा बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार एक ऐसी आधुनिक तकनीक का परीक्षण (ट्रायल) कर रही है जो बाढ़ का पानी शहरों के किन इलाकों में प्रवेश कर सकता है, इसकी सटीक जानकारी पहले से दे सकती है।

इस प्रणाली का नाम जीआईएस-आधारित ग्रिड प्लेटफॉर्म (GIS-based Grid Platform) है।

मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग (Urban Development and Housing Department) ने इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को ई-नगर पालिका (e-Nagar Palika) तथा अन्य संबंधित विभागों के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत (लिंक) किया है।

वर्तमान में इस अभिनव बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली का व्यावहारिक परीक्षण नर्मदापुरम में किया जा रहा है।

मुख्य तकनीकी विशेषताएं

यह अनूठा डिजिटल प्लेटफॉर्म न केवल बाढ़ की निगरानी करता है, बल्कि शहरों के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण में भी मदद कर रहा है:

पेयजल आपूर्ति नेटवर्क का मानचित्रण: इसके तहत राज्य के 377 शहरी स्थानीय निकायों के पेयजल आपूर्ति नेटवर्क (Water Supply Network) का डिजिटल मानचित्र (डिजिटल मैप) तैयार किया गया है।

सीवरेज नेटवर्क का मानचित्रण: इसके साथ ही 46 शहरी स्थानीय निकायों के सीवरेज नेटवर्क को भी डिजिटल मानचित्र के रूप में विकसित किया गया है।

जल प्रदूषण से बचाव (Overlapping Identification): यह प्रणाली पानी की पाइपलाइनों और सीवरेज लाइनों के आपस में टकराने (ओवरलैप) वाले संवेदनशील क्षेत्रों की सटीक पहचान करती है, जिससे पेयजल को दूषित होने से बचाया जा सके और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।

बाढ़ प्रबंधन से परे, यह प्लेटफॉर्म नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए कई अन्य क्षेत्रों में काम कर रहा है।

राजस्व में सुधार (संपत्ति कर का दायरा): सैटेलाइट तस्वीरों और जीआईएस डेटा के विश्लेषण से इस प्लेटफॉर्म ने राज्य के 413 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में 52,000 से अधिक ऐसी संपत्तियों की पहचान की है, जो पहले टैक्स रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं थीं। इससे स्थानीय निकायों की कर से होने वाली आय (राजस्व) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

नियमों और अतिक्रमण की डिजिटल निगरानी: यह तकनीक निम्नलिखित महत्वपूर्ण गतिविधियों पर डिजिटल नजर रखने में सक्षम है:

शहरों में मास्टर प्लान के नियमों का उल्लंघन।

हवाई अड्डा क्षेत्रों (एयरपोर्ट जोन) में सुरक्षा मानकों के अनुरूप इमारतों की निर्धारित ऊंचाई की निगरानी।

ऐतिहासिक धरोहर स्थलों (Heritage Sites) का संरक्षण।

सरकारी जमीनों पर होने वाले अवैध कब्जों (अतिक्रमण) की पहचान।

बाढ़ पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन

भारी या मध्यम बारिश के दौरान जल स्तर बढ़ने पर कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से यह अंदाजा लगाया जाता है कि पानी शहरों के किन हिस्सों में घुस सकता है।

इसका मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों (Disaster Management Agencies) को बाढ़ आने से पूर्व ही सचेत करना है, ताकि वे समय रहते प्रभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने (निकासी) और राहत सामग्री की व्यवस्था समय पर सुनिश्चित कर सकें।

यह प्लेटफॉर्म भविष्य में शहरी क्षेत्रों में बाढ़ के जोखिमों को पहले से समझने और दीर्घकालिक बचाव की योजनाएं तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।

वर्तमान मौसम संबंधी स्थिति और अलर्ट 

इस तकनीक का महत्व वर्तमान मानसूनी परिस्थितियों में और भी बढ़ गया है, क्योंकि राज्य के कई हिस्से इस समय भारी वर्षा का सामना कर रहे हैं:

अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की चेतावनी: मौसम विभाग (Meteorological Department) ने रीवा सहित राज्य के 15 जिलों के कुछ क्षेत्रों के लिए ‘कम से मध्यम’ (लो से मॉडरेट) स्तर की अचानक आने वाली बाढ़ की चेतावनी जारी की है।

सक्रिय मौसमी प्रणालियां: मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र (Well-marked Low Pressure Area) बना हुआ है, और मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) भी राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से से होकर गुजर रहा है।

भारी वर्षा से प्रभावित जिले: इस प्रणाली के कारण सतना, बालाघाट, छतरपुर, जबलपुर और रीवा सहित कई जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

दर्ज की गई बारिश: पिछले 24 घंटों में पूर्वी मध्य प्रदेश के इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई है, जहां कुछ क्षेत्रों में अधिकतम 154 मिलीमीटर और कुछ अन्य हिस्सों में 103 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।

वर्षा की कमी में सुधार: इस लगातार बारिश के कारण मध्य प्रदेश में वर्षा की कुल कमी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। राज्य में अब तक कुल 714 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जबकि सामान्य बारिश का औसत 799 मिलीमीटर है। इस प्रकार, राज्य में वर्षा की कुल कमी अब घटकर केवल 11% रह गई है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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