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गुरुग्राम में अंडरग्राउंड तालाब से खत्म होगी वॉटरलॉगिंग की समस्या?

नेपाल बाढ़ में मृतकों की संख्या 600 के करीब, हज़ारों लापता। ओडिशा के कॉलेजों में तेल कम इस्तेमाल के निर्देश। कूनो में तेंदुआ शिकार मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस सीईओ की जांच, लुकआउट नोटिस की तैयारी। ...
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नेपाल बाढ़ में मृतकों की संख्या 600 के करीब, हज़ारों लापता। ओडिशा के कॉलेजों में तेल कम इस्तेमाल के निर्देश। कूनो में तेंदुआ शिकार मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस सीईओ की जांच, लुकआउट नोटिस की तैयारी। तमिलनाडु में लिग्नाइट खदान विरोध से बिजली संकट का खतरा। जापान में भालुओं का बड़े पैमाने पर शिकार। ऑस्ट्रिया में 63 साल बाद पर्वतारोही का बैग मिला। गुरुग्राम में जलभराव रोकने हेतु अंडरग्राउंड तालाब योजना।

आज की प्रमुख हेडलाईन्स

नेपाल बाढ़ में अपनी जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 600 के करीब हो गई है, कम से कम 1924 लोग जिसमें 517 विदेशी पर्यटक शामिल हैं अभी भी लापता हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक कम से कम 320 भारतीय बाढ़ में लापता हैं। चीनी हिस्से में फंसे लगभग 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। ये लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं।


ओडिशा सरकार ने अपने कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वे खाना पकाने में तेल का इस्तेमाल कम करें और हॉस्टल व कैंटीन में ज़्यादा तेल वाले और डीप-फ्राई किए गए खाने से बचें। यह कदम दुनिया भर में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक बोझ को कम करने के मकसद से उठाया गया है।

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कूनो नैशनल पार्क और उसके आसपास तेंदुओं का शिकार करने वाले गिरोह की जांच वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश वन विभाग उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है। टाइगर टास्क फोर्स ने उन्हें दो बार पूछताछ के लिए शिवपुरी बुलाया लेकिन वो नहीं पहुंचे। विभाग को आशंका है कि वो देश छोड़ सकते हैं। यह मामला 23 जुलाई को आगरा में 10 तेंदुओं की खाल के साथ चार शिकारियों की गिरफ्तारी से सामने आया। हालांकि वाइल्डलाइफ एसओएस ने शिकार नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप खारिज किए हैं।


तमिलनाडु के नेवेली में ग्रामीण लिग्नाइट खदानों का विरोध कर रहे हैं, इससे कामकाज ठप पड़ गया है। अगर खनन दोबारा शुरू नहीं हुआ तो राज्य में बिजली संकट पैदा हो सकता है। किसानों की मांग है कि ज़मीन के बदले परिवार के सदस्य को स्थायी नौकरी दी जाए।


जापान में इंसानों पर भालुओं के जानलेवा हमले बढ़ने के बाद सरकार ने बड़े पैमाने पर उनका शिकार शुरू किया है। पिछले एक साल में 14 हज़ार से ज्यादा भालू मारे गए हैं और इस साल 8800 और भालू मारने का लक्ष्य बनाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरह शिकार जारी रहा तो देश में भालू विलुप्त हो सकते हैं।

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ऑस्ट्रियाई पर्वतारोही का 63 साल पहले खोया हुआ बैग बर्फ पिघलने के बाद वापस मिल गया। 1963 में चढ़ाई के दौरान वह गहरी दरार में गिर गया था, जिससे उसका बैग वहीं फंस गया था। पुलिस ने पहचान करके 86 वर्ष के हो चुके पर्वतारोही के परिवार को बैग सुरक्षित लौटा दिया। जलवायु परिवर्तन की वजह से पिघल रही बर्फ और सूख रही नदियां दुनियाभर में इतिहास की कई पुरानी चीज़ें बाहर ला रही हैं।


गुरुग्राम में जलभराव का समाधान

गुरुग्राम अपनी वॉटरलॉगिंग की समस्या को सुलझाने के लिए अंडरग्राउंड तालाब और इंजेक्शन वेल बनाने पर विचार कर रहा है। क्या है यह प्लान, समझते हैं हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी से।

आज की चर्चा– अब्दुल वसीम अंसारी, ग्राउंड रिपोर्ट

गुरुग्राम में हर साल बारिश के दौरान कई इलाकों में पानी भर जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए भूमिगत जल-संग्रहण टैंक और वर्षाजल को जमीन के अंदर पहुँचाने वाले विशेष इंजेक्शन कुएँ बनाने की योजना तैयार की गई है।

इस योजना के तहत बारिश के पानी को पहले एकत्र किया जाएगा और फिर साफ करके इंजेक्शन कुओं के माध्यम से जमीन के अंदर पहुँचाया जाएगा। इन कुओं की गहराई लगभग 48 से 80 मीटर तक होगी। जहाँ मिट्टी पानी को प्राकृतिक रूप से सोख नहीं पाती, वहाँ इन कुओं की मदद से पानी को भूमिगत जल-परतों तक पहुँचाया जा सकेगा।

अधिकारियों का अनुमान है कि इस व्यवस्था के माध्यम से लगभग 25 से 30 करोड़ लीटर पानी जमीन के अंदर पहुँचाया जा सकता है। तेज बारिश के दौरान सड़कों पर जमा होने वाले पानी को पहले भूमिगत टैंकों में इकट्ठा किया जाएगा और बाद में उसका उपयोग भूजल रिचार्ज के लिए किया जाएगा।

योजना के पहले चरण में चार प्रमुख जलभराव वाले स्थानों की पहचान की गई है। इनमें सोहना रोड अंडरपास, राजीव चौक, मेदांता अंडरपास और शीतला माता रोड शामिल हैं। नगर निगम ने शहर में जलभराव वाले लगभग 100 स्थानों को चिह्नित किया है और अगले मानसून से पहले करीब 100 वर्षाजल-संचयन संरचनाएँ बनाने का लक्ष्य रखा है।

सरकार के अनुसार, गुरुग्राम में लगभग 99 रिचार्जिंग कुएँ पहले ही बनाए जा चुके हैं और इनके माध्यम से करीब 13,000 मीट्रिक टन वर्षाजल को जमीन के अंदर पहुँचाया जा चुका है।

हालाँकि, विशेषज्ञों ने इस योजना को लेकर कुछ सावधानियाँ भी बताई हैं। उनका कहना है कि केवल तकनीकी उपायों से जलभराव की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। शहर की नालियों, प्राकृतिक जल-निकासी मार्गों, तालाबों और जलाशयों को बचाना भी जरूरी है। अतिक्रमण हटाने और पुराने ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने पर भी ध्यान देना होगा।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि पानी को जमीन के अंदर भेजने से पहले उसकी उचित सफाई और गुणवत्ता की जाँच जरूरी है, वरना भूजल प्रदूषित हो सकता है। इसलिए पूरे सिस्टम की लगातार निगरानी भी आवश्यक होगी।

सरकार अब गुरुग्राम के निचले इलाकों का सर्वे कराकर लंबे समय की क्षेत्रीय जल-निकासी योजना तैयार कर रही है। इसमें गुरुग्राम की जल-निकासी व्यवस्था को यमुना नदी बेसिन से बेहतर तरीके से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

कुल मिलाकर, भूमिगत टैंक, इंजेक्शन कुएँ, बेहतर ड्रेनेज और प्राकृतिक जल-मार्गों का संरक्षण—इन सभी उपायों को साथ लेकर चलना ही गुरुग्राम को जलभराव से राहत दिला सकता है।

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