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भारी बारिश के बिना ही डूब गई ‘मिलेनियम सिटी’ गुरुग्राम

मराठवाड़ा के सूखे से लेकर गुरुग्राम की डूब तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

मराठवाड़ा में औसत से 7% कम बोआई, दिल्ली में ट्रीटेड वाटर के उपयोग की तैयारी, गुजरात में प्याज़ 70 रु प्रति किग्रा तक पहुंची, मप्र के 352 शहरी स्थानीय निकायों में सीवेज सुविधा नहीं। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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मुख्य सुर्खियां

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में कम बारिश के कारण कृषि बुआई का क्षेत्र काफी सिकुड़ गया है। इस सीजन में केवल 46.19 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी है, जो पांच साल के औसत से 7% कम है। क्षेत्र में सामान्य की तुलना में 20.3% बारिश की कमी दर्ज की गई है।


दिल्ली सरकार निर्माण कार्यों और बागवानी के लिए treated water का उपयोग अनिवार्य बनाने की तैयारी कर रही है। दिल्ली जल बोर्ड रोजाना 750 मिलियन गैलन सीवेज का उपचार करता है। रोज़ 483 मिलियन गैलन पानी पुन: उपयोग के लिए उपलब्ध है, लेकिन केवल 120 मिलियन गैलन ही उपयोग में लिया जा रहा है।

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गुजरात में प्याज की खुदरा कीमतें पिछले 15 दिनों में ₹35-40 से बढ़कर ₹60-70 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भारी बारिश के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे थोक दरों में ₹10-15 प्रति सप्ताह की बढ़ोतरी हुई है। किसानों को खेतों में फसल खराब होने के कारण लगभग 25% प्याज का नुकसान उठाना पड़ा है।


मध्य प्रदेश के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नागपुर (महाराष्ट्र) के कलेक्टर और गुजरात के खाद्य सुरक्षा आयुक्त को घटिया व असुरक्षित मावा और मिल्क केक की आपूर्ति के खिलाफ पत्र लिखा है। विभाग ने नागपुर से भेजी गई 300 किलोग्राम असुरक्षित मावा और मिल्क केक की खेप को जब्त किया है।


एनजीटी ने मध्य प्रदेश के 413 शहरी स्थानीय निकायों में से 352 में सीवेज उपचार सुविधाओं की भारी कमी पर गहरी चिंता जताई है। इन निकायों में बिना उपचार के सीवेज सीधे नदियों (नर्मदा, क्षिप्रा और चंबल) में छोड़ा जा रहा है। राज्य में लगभग 12.67 लाख घर सीवर नेटवर्क से बाहर हैं।

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मध्य प्रदेश आपदा प्रबंधन में ‘जेंडर रिस्पॉन्सिव आपदा प्रबंधन मॉडल’ लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके तहत बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान महिलाओं, बच्चियों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर बचाव और पुनर्वास कार्य किया जाएगा।

विस्तृत चर्चा

गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद IFFCO चौक के पास सड़क धंसने और जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ। मिलेनियम सिटी का पूरा हाल बता रहे हैं पल्लव जैन। 

500 करोड़ खर्चने के बाद भी डूब रहा गुरुग्राम

सोमवार को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे के बीच गुरुग्राम में 75 मिलीमीटर बारिश हुई और शहर के कई हिस्से पानी में डूब गए। 204 एमएम बारिश हो 24 घंटे में तो एक्सट्रीम रेनफॉल मानी जाती है, लेकिन 75 एमएम बारिश ने ही गुरुग्राम की हालत खराब कर दी। इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरीके से फेल हो गया। सोशल मीडिया पर अगर हम वायरल वीडियोज़ देखें तो हालात देखकर डर लगने लगता है। 

स्कूल बसें छत तक डूबी नज़र आती है, बच्चे 6-7 घंटे फ्लड में फंसे रहते हैं। उनके मां बाप गोदी में बैठाकर अपने बच्चों को फ्लड से निकालते हैं।

ट्रैफिक इतना कि सुबह निकला व्यक्ति शाम को भी अपनी मंज़िल तक न पहुंच सके। सभी मुख्य सड़कें पानी में डूबी हुई थीं, रिहायशी इलाकों में 3.5 फीट पानी था। 

9 साल में 500 करोड़ खर्च

यह हालत तब है जब गुरुग्राम प्रशासन ने पिछले 9 सालों में यहां का ड्रेनेज सिस्टम सुधारने में 503 करोड़ रुपए खर्च किये हैं। लेकिन कुछ घंटों की बारिश में ही यह शहर डूब जाता है। उदाहरण के लिए यहां सेक्टर 102-102 ए की सड़क ड्रेनेज सिस्टम के साथ 11 करोड़ रुपए में अपग्रेड की गई थी वहां भी पानी भरा मिला। 

यह देश की आईटी इंडस्ट्री का हब है बड़ी बड़ी कंपनियों के दफ्तर यहां पर है। फ्लैट्स की कीमत यहां करोड़ों में है, फ्लैट का किराया लाखों में है, तो ऐसे में टेक्सपेयर्स को आप क्या रिटर्न कर रहे हैं? और देश की क्या छवि पेश कर रहे हैं? यह सवाल है। 

कल दिल्ली का कनॉट प्लेस भी हमें वॉटरलॉग्ड दिखाई दिया और कई सड़कों पर पानी भरा था। ये देश के वो शहर हैं जिनसे छोटे शहर सीखते हैं, लेकिन जब यहीं हालात ऐसे होंगे तो बाकी जगह कैसे हालात होंगे। 

हम जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की वजह से एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स का दौर है, अर्बन प्लानिंग में अगर भविष्य के हिसाब से प्लानिंग नहीं की गई तो टेक्सपेयर्स के अरबों करोड़ों रुपए नाली में बह जाने हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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