बढ़ती कीमतों पर लगाम के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’, भारत ने गेहूं के निर्यात से रोक हटाई, दिल्ली में ख़राब मौसम के चलते 26 उड़ानें रद्द, समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
बढ़ती कीमतों के बीच प्याज को प्रमुख बाजारों तक तेजी से पहुंचाने के लिए नासिक से “कांदा एक्सप्रेस” नामक विशेष रेलवे रैक चलाई जा रही हैं। यह प्याज चेन्नई, दिल्ली और गुवाहाटी जैसे शहरों में पहुंचाई जाएगी। एनसीसीएफ (NCCF) और नैफेड (NAFED) इन प्याज़ों को ₹35 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचेंगे।
भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशालय ने गेहूं, ड्यूरम गेहूं, आटा, मैदा और सूजी के निर्यात पर लगी रोक को पूरी तरह हटा दिया है। भारत ने बढ़ती कीमतों और आपूर्ति चिंताओं के कारण साल 2022 से गेहूं निर्यात पर रोक लगाई थी। वर्तमान में देश के पास तय सीमा से 76 लाख टन से अधिक अतिरिक्त गेहूं मौजूद है।
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में एक कारखाने से अमोनिया गैस का रिसाव होने से कम से कम 25 लोग बीमार हो गए। इसी तरह की दूसरी घटना नागपुर के गोधनी गांव में हुई। यहां पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से 200 मीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा।
दिल्ली में खराब मौसम के चलते 390 उड़ानें लेट हुईं और 26 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। गुरुग्राम में भारी जलभराव के कारण प्रशासन ने 25 अगस्त को स्कूलों और दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू कर दिया है।
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग ने अमेज़न, स्विगी इन्स्टामार्ट, और बिग बास्केट के खाद्य लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिए। इन प्लेटफॉर्म पर डाटूरा (धतूरा) के फल और बीज मानव उपभोग के लिए बिक्री हेतु सूचीबद्ध पाए गए, जबकि यह जहरीला होता है। जांच में कुछ उत्पादों पर FSSAI लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन नंबर भी मिले।
भोपाल में अगस्त के शुरुआती 7 दिनों में रिकॉर्ड 16.18 इंच बारिश दर्ज की गई। यह बारिश इस सीजन की कुल 38 इंच बारिश का लगभग 43% हिस्सा है। भोपाल का कुल बारिश का कोटा 42 इंच है और अब केवल 4 इंच बारिश की आवश्यकता बची है।
विस्तृत चर्चा
कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, 22 अगस्त को दुनिया का रोज़ का औसत समुद्री सतह का तापमान अपने सबसे ऊंचे रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। मगर ऐसा क्यों हुआ और हम पर इसका क्या असर पड़ सकता है जानिए वाहिद भट से?
समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर तक क्यों पहुंचा?
कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (Copernicus Climate Change Service) के अनुसार, 22 अगस्त को दुनिया के ध्रुवेतर महासागरों (Extra-polar Oceans) की सतह का औसत तापमान 21.104 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो कि अब तक का सबसे अधिक तापमान है।
इससे पहले यह रिकॉर्ड वर्ष 2024 में बना था, जब औसत तापमान 21.09 डिग्री सेल्सियस था। नया रिकॉर्ड पिछले रिकॉर्ड से थोड़ा ही अधिक है, लेकिन इसके दर्ज होने का समय बेहद महत्वपूर्ण है।
तापमान रिकॉर्ड के समय का महत्व
आमतौर पर दुनिया के महासागर मार्च और अप्रैल के महीनों में सबसे अधिक गर्म होते हैं, क्योंकि दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) में गर्मियों के बाद समुद्र की सतह का तापमान सबसे अधिक बढ़ जाता है।
इस वर्ष यह सबसे अधिक तापमान मार्च या अप्रैल के बजाय सीधा अगस्त के महीने में दर्ज किया गया है, जो एक असामान्य घटना है।
ऐतिहासिक बदलाव
यदि हम ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें, तो 22 अगस्त 1979 को इसी समुद्री क्षेत्र का औसत तापमान 20.15 डिग्री सेल्सियस था।
इस वर्ष (22 अगस्त को) यह 21.104 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया, जिसका अर्थ है कि पिछले कुछ दशकों में इसमें लगभग 1 डिग्री सेल्सियस की भारी वृद्धि हुई है।
वर्तमान मौसम प्रणालियां और एल नीनो
वर्तमान में उष्णकटिबंधीय प्रशांत (Tropical Pacific) क्षेत्र में एल नीनो (El Niño) प्रणाली मजबूत हो रही है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, आने वाले महीनों में इसके और अधिक मजबूत होने की संभावना है।
हालांकि इस रिकॉर्ड तापमान के लिए केवल एल नीनो जिम्मेदार नहीं है। पिछले कई दशकों से मानवीय गतिविधियों (Human Activities) के कारण महासागर लगातार गर्म हो रहे हैं।
मरीन हीटवेव में वृद्धि
यह रिकॉर्ड महासागरों की बिगड़ती स्थिति की ओर इशारा करता है। आंकड़ों के अनुसार, 1990 के दशक की शुरुआत की तुलना में वर्तमान में दुनिया भर में मरीन हीटवेव (समुद्री लू) के दिनों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ गई है।
21.104 डिग्री सेल्सियस का यह तापमान केवल एक नया रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह महासागरों में लगातार जमा हो रही गर्मी, बदलती मौसम प्रणालियों और मानव-जनित जलवायु परिवर्तन (Human-induced Climate Change) के गंभीर और प्रत्यक्ष प्रभावों को दर्शाता है।
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