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वन्यजीवों तस्करी के आरोपियों ने क्यों लिया वाइल्डलाइफ एसओएस का नाम?  

देश में खरीफ का रकबा 3% तक घटा, सरकार को कम इथेनॉल मिश्रण वाला ईधन लाने की सलाह, मप्र को गैंडा देने से असम का इनकार, मप्र में 11% तक कम बारिश। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” ...

देश में खरीफ का रकबा 3% तक घटा, सरकार को कम इथेनॉल मिश्रण वाला ईधन लाने की सलाह, मप्र को गैंडा देने से असम का इनकार, मप्र में 11% तक कम बारिश। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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मुख्य सुर्खियां

देश में खरीफ धान की बुवाई 14 अगस्त 2026 तक साढ़े 3% से ज्यादा घटकर लगभग 379 लाख हेक्टेयर रह गई है। पिछले साल यह आंकड़ा 393 लाख हेक्टेयर से अधिक था। कर्नाटक में धान के रकबे में सबसे बड़ी गिरावट (2.86 लाख हेक्टेयर) दर्ज की गई। 


मुख्य आर्थिक सलाहकार ने पेट्रोल में कम इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को वापस लाने का सुझाव दिया है। सुझाव के अनुसार, E20 पेट्रोल देश के पुराने दोपहिया वाहनों के इंजनों के लिए समस्या पैदा कर सकता है। आर्थिक सलाहकारों ने उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प देने की वकालत की है।

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तेलंगाना सरकार ने 25 लाख 35 हज़ार से भी अधिक किसानों का ₹20 हज़ार करोड़ से ज्यादा का फसली ऋण माफ किया है। योजना के तहत ₹2 लाख तक के ऋण (मूलधन और ब्याज सहित) माफ किए गए हैं। यह माफी केवल अल्पकालिक फसली ऋणों पर लागू है। दीर्घकालिक कृषि ऋण इससे अलग रखे गए हैं।


पुणे नगर निगम (PMC) मुख्यालय के बाहर जलकुंभी सफाई के टेंडर को रद्द करने की मांग प्रदर्शन किया गया। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि निगम ने 4 वर्षों में जलकुंभी हटाने पर ₹16 करोड़ खर्च किए हैं, जबकि सरकारी आंकड़ा लगभग ₹8 करोड़ है। बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग बताया है।


असम सरकार ने तकनीकी कारणों से भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान को गैंडा (Rhino) देने से मना कर दिया है। अब मध्य प्रदेश सरकार पटना (बिहार) और पश्चिम बंगाल के चिड़ियाघरों से गैंडा लाने का विकल्प तलाश रही है। हालांकि, असम से 50 जंगली भैंसें लाने के समझौते के तहत दो खेपें मध्य प्रदेश को मिल चुकी हैं।

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मध्य प्रदेश में मानसून के ढाई महीने बाद सामान्य से 11% कम बारिश हुई है। 1 जून से अब तक राज्य में 22.39 इंच बारिश हुई है, जबकि सामान्य औसत 25.23 इंच है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 15% और पश्चिमी हिस्से में 7% पानी कम गिरा है। 

विस्तृत चर्चा

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में ग्वालियर-आगरा हाईवे पर दस तेंदुए की खालें ज़ब्त करने के मामले में मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स ने जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ की, उन्होंने दावा किया है कि वे एनजीओ वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ के आदेश पर काम कर रहे थे। पूरी खबर जानते हैं अब्दुल वसीम अंसारी से।

वाइल्डलाइफ एसओएस विवाद और सीईओ की भूमिका

मध्य प्रदेश से आई एक चौंकाने वाली खबर ने पूरे देश के वन्यजीव संरक्षण नेटवर्क को हिलाकर रख दिया है। देश का जाना-माना गैर-सरकारी संगठन (NGO) वाइल्डलाइफ एसओएस (Wildlife SOS) इस समय एक गंभीर विवाद के केंद्र में है।

मध्य प्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने हाल ही में 10 तेंदुओं की खालों की तस्करी के आरोप में भगवान सिंह और उसके साथी वसीम को गिरफ्तार किया है।

एनजीओ से सीधा संबंध

चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए ये दोनों तस्कर कथित तौर पर वाइल्डलाइफ एसओएस की पैरोल पर थे। जांचकर्ताओं और तस्करों के बयानों के अनुसार, इस पूरे मामले में एनजीओ के सीईओ की भूमिका पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं।

गिरफ्तार तस्करों ने पूछताछ के दौरान सीधे तौर पर यह दावा किया है कि वे वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण के इशारे और निर्देशों पर काम कर रहे थे।

जांच एजेंसियों का कहना है कि उन्हें ऐसे पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं जो यह साबित करते हैं कि खुद एनजीओ ने ही इन तेंदुओं का शिकार करवाया था।

अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और छवि चमकाने का खेल 

आरोपों के अनुसार, इस शिकार के पीछे का मुख्य उद्देश्य एनजीओ की एक मजबूत ‘एंटी-पोचिंग’ (शिकार विरोधी) छवि बनाना, खुद का नाम चमकाना और विदेशों से भारी अंतरराष्ट्रीय फंडिंग जुटाना था।

खुद ही शिकार करवाने के बाद, खालों की बरामदगी को एक फर्जी नाटक के जरिए बेहद सफल और जांबाज ‘अंडरकवर ऑपरेशन’ के रूप में पेश किया जाता था। उदाहरण के लिए, जब 23 जुलाई को ग्वालियर-आगरा हाईवे पर 10 तेंदुओं की खालें पकड़ी गईं, तो एनजीओ ने इसका पूरा श्रेय अपनी “फॉरेस्ट वॉच यूनिट” को दिया। लेकिन एसटीएसएफ (STSF) की समानांतर जांच ने इस दावे की परतें उधेड़ दीं।

भौतिक साक्ष्य और अधिकारियों के तीखे सवाल

शिवपुरी और मुरैना के जंगलों से तेंदुओं के अवशेष और लेग-होल्ड ट्रैप (शिकार के फंदे) मिले हैं। जांच में इन फंदों के तार सीधे एनजीओ की गाड़ियों और हरियाणा से मंगवाए गए विशेष जालों से जुड़े पाए गए हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने इस पूरी कार्रवाई पर सीधे और तीखे सवाल उठाए हैं।

अगर यह एनजीओ का एक गुप्त ऑपरेशन था, तो 10 मासूम तेंदुओं की जान जाने का इंतजार क्यों किया गया? अधिकारियों को समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई?

चीतों के लिए बेहद संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों में ये खतरनाक जाल और फंदे क्यों बांटे गए?

इस मामले के सामने आने के बाद वर्ष 2023 में तमिलनाडु के सत्यमंगलम में हुई बाघ के शिकार की एक पुरानी घटना भी अब दोबारा जांच के दायरे में आ गई है।

दूसरी तरफ, वाइल्डलाइफ एसओएस के संस्थापक ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है।

उन्होंने दावा किया है कि यह संगठन को बदनाम करने की एक सुनियोजित साजिश है। इसके साथ ही उन्होंने भारत की न्यायपालिका पर अपना पूरा भरोसा जताया है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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