कावेरी के पानी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, ओडिशा हाई अलर्ट पर; बाढ़ से 5 लाख से ज्यादा प्रभावित, मप्र में बारिश का 86% कोटा पूरा, सरकारी इमारतों के लिए बल्क वेस्ट जेनेरेटर रजिस्ट्रेशन ज़रूरी। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट आज तमिलनाडु सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है जिसमें कर्नाटक से कावेरी का पानी छोड़ने की मांग की गई है। तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक ने कावेरी वाटर रेगुलेशन कमिटी के रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश का पालन नहीं किया।
बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा सरकार ने राज्य में हाई अलर्ट घोषित किया है। इस दौरान प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से 2 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। वर्तमान में बाढ़ की वजह से 900 से भी ज़्यादा गांवों में रहने वाले 5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
ओडिशा की 564 किलोमीटर लंबी तटरेखा का लगभग 28% हिस्सा समुद्र के तेज बहाव और तटीय क्षरण का सामना कर रहा है। राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र के अध्ययन के अनुसार राज्य का जगतसिंहपुर जिला तटीय क्षरण से सबसे ज्यादा प्रभावित है। सरकार इसे रोकने के लिए जियोटेक्सटाइल ट्यूब तटबंध और सी-वॉल का निर्माण कर रही है।
कोलंबिया के राष्ट्रपति ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टैरिफ को निलंबित करने की अपील की है। राष्ट्रपति का कहना है कि कोलंबिया को हाल ही में आए विनाशकारी भूकंप से उबरने के लिए इस आर्थिक मदद की बेहद जरूरत है। गौरतलब है कि कोलंबिया में आए इस भीषण भूकंप में कुल 289 लोगों की जान चली गई थी।
बंगाल की खाड़ी में बने नए सिस्टम के चलते मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिर तेज हो गई हैं। राज्य में अब तक सीजन का लगभग 86% मानसून कोटा पूरा हो चुका है। राजधानी भोपाल में रविवार को 7.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है। भोपाल में अब तक कुल 36 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि यहाँ का सामान्य मानसूनी कोटा 42 इंच है।
भोपाल नगर निगम (BMC) अब अटल भवन, सतपुड़ा भवन, विंध्याचल भवन और जिला न्यायालय जैसी प्रमुख सरकारी इमारतों के लिए बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) पंजीकरण अनिवार्य कर रहा है। अब तक शहर में 100 से अधिक निजी और सरकारी संस्थान पंजीकृत हो चुके हैं। इन सरकारी कार्यालयों से कचरा निपटान के लिए ₹2,400 प्रति टन शुल्क लिया जाएगा।
विस्तृत चर्चा
कैग या भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की एक हालिया रिपोर्ट ने देश के रेलवे स्टेशनों में साफ़ पानी की उपलब्धता पर प्रश्न चिह्न लगा दिए हैं। पल्लव जैन से वितार से जानिए इस रिपोर्ट के बारे में।
रेलवे स्टेशनों में साफ पानी भी नहीं
हाल ही में CAG की रिपोर्ट में सामने आया कि देश भर में 512 स्टेशनों में से 458 स्टेशनों पर तय नियमों के मुताबिक यात्रियों के लिए एक या उससे ज़्यादा बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। इन सुविधाओं में पीने का पानी, वेटिंग रूम, बैठने की जगह, प्लेटफ़ॉर्म शेल्टर, टॉयलेट, पंखे, फ़ुट-ओवर ब्रिज, डस्टबिन और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम शामिल थे।
पानी की गुणवत्ता को लेकर जो एक और अपडेट है। सेंट्रल इंडिया में रेलवे स्टेशनों पर तो पानी की जांच करने की किट भी मौजूद नहीं है।
सीएजी ने पाया कि 28 स्टेशनों पर पीने के पानी की क्वालिटी जांचने के लिए ज़रूरी टेस्टिंग किट नहीं थीं। सेंट्रल रेलवे के चार स्टेशनों – छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनल, कल्याण, भिवंडी रोड और लोनावला – से लिए गए पानी के सैंपल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाए गए।
रेलवे के नियम क्या कहते हैं?
ये नतीजे मुंबई के लिए खास तौर पर अहम हैं, क्योंकि यहां के बड़े स्टेशनों पर रोज़ाना हज़ारों यात्री आते-जाते हैं। NSG-1 कैटेगरी वाले सीएसएमटी स्टेशन पर लिए गए पानी के सैंपल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। यह बैक्टीरिया आम तौर पर मल-मूत्र से होने वाले प्रदूषण से जुड़ा होता है और इसकी कुछ किस्में डायरिया, फ़ूड पॉइज़निंग और सेहत से जुड़ी दूसरी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
रेलवे बोर्ड की गाइडलाइंस के अनुसार स्टेशनों पर पानी सप्लाई सिस्टम की साल में कम से कम दो बार मल्टी-पैरामीटर फील्ड टेस्टिंग किट से जांच होनी चाहिए। हालांकि, 15 रेलवे ज़ोन के 436 स्टेशनों पर ज़रूरी किट उपलब्ध नहीं थीं, जिनमें सेंट्रल रेलवे के 28 स्टेशन भी शामिल हैं। इस कमी से यह सवाल उठता है कि इन स्टेशनों पर यात्रियों को सप्लाई किए जाने वाले पानी की तय नियमों के अनुसार कितनी नियमित रूप से जांच हो पाती है।
ऑडिट में यह सुझाव दिया गया है कि रेलवे तय नियमों के अनुसार पानी की सप्लाई सिस्टम की रेगुलर टेस्टिंग और पीने के पानी की पूरी जांच सुनिश्चित करे। सेंट्रल रेलवे के मामले में, रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि जिन 28 स्टेशनों पर टेस्टिंग किट नहीं हैं, क्या वहां ठीक से निगरानी की जा रही है और क्या यात्रियों को सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
रेलवे की कार्रवाई और बाकि देश का हाल
कैग की रिपोर्ट के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, सीआरबी और सीईओ और सीनियर अधिकारियों ने समीक्षा की है, रेलवे लगभग 20,000 जगहों पर “टैंक टू टैप” (टैंक से नल तक) फिल्ट्रेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम लगाएगा, पानी की टंकियां बदलेगा और रेगुलर क्वालिटी टेस्टिंग, सफाई और रखरखाव को लागू करेगा। इस काम की प्रोग्रेस पर रेलवे बोर्ड सीधे नज़र रखेगा।
पानी में ई कोलाई की समस्या पर हाल ही में एक रिपोर्ट भी ग्राउंड रिपोर्ट डॉट इन पर प्रकाशित हुई है, मैं अपने लिसनर्स को बताना चाहता हूं कि भोपाल में गैस त्रासदी पीड़ित जिन कॉलोनीज़ में रहते हैं वहां सुप्रीम कोर्ट ने भूजल के प्रदूषित हो जाने के बाद नगर निगम को पाईप्स के ज़रिए साफ पानी उपलब्ध कराने का आदेश 2018 में दिया था। लेकिन 8 साल गुज़र जाने के बाद भी यहां लोग दूषित पानी पी रहे हैं, गैस पीड़ित संगठनों ने यहां जब खुद से पानी की जांच कराई तो पता चला कि 68 फीसदी सैंपल्स में ई कोलाई मौजूद था।
तो आज़ादी के 80 वे साल में हम अमृत महोत्सव ज़रुर बना रहे हैं, लेकिन अपने नागरिकों को अमृत तो छोड़ दीजिए साफ पानी तक नहीं दे पा रहे हैं। यह भी एक सच्चाई है, जिसे स्वीकार कर लेना चाहिए।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।
Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India
We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.
Connect With Us
Send your feedback at greport2018@gmail.com
Newsletter
Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.
When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.
Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.



