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लद्दाख के पवित्र क्रेन को बचाने का अभियान

भारी बारिश से यूपी से लेकर हिमाचल तक अस्त-व्यस्त, चमोली में सुरंग में पानी-मलबा घुसने से 7 की मौत, माईंस एंड मिनरल अमेंडमेंट बिल संसद से पास, कोयले की मांग कम होने पर भी बढ़ रहे खनन के प्रस्ताव। जानिए ...

भारी बारिश से यूपी से लेकर हिमाचल तक अस्त-व्यस्त, चमोली में सुरंग में पानी-मलबा घुसने से 7 की मौत, माईंस एंड मिनरल अमेंडमेंट बिल संसद से पास, कोयले की मांग कम होने पर भी बढ़ रहे खनन के प्रस्ताव। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।

मुख्य सुर्खियां

देश भर में मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बारिश और बाढ़ जैसे हालात हैं। यूपी के 16 जिलों में 80 से ज्यादा गांव बाढ़ प्रभावित हैं। उन्नाव में पानी घरों में घुस गया है। लोग छतों पर रहने को मजबूर हैं। कॉलोनियों में नावें चल रही हैं। कानपुर में गंगा का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाट किनारे 100 से ज्यादा छोटे मंदिर डूब गए हैं।

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और लैंडस्लाइड ने रेल और सड़क यातायात प्रभावित किया है। कांगड़ा में पठानकोट-बैजनाथ पपरोला रेल सेक्शन पर ट्रैक पर चट्टानें गिरने से 4 ट्रेन सेवाएं अगले आदेश तक रद्द कर दी गई हैं।


उत्तराखंड के चमोली ज़िले में एक निर्माणाधीन सुरंग में भूस्खलन के बाद पानी और मलबा घुसने से गुरुवार को सात लोगों की मौत हो गई और 14 लोग घायल हो गए। न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पिपलकोटी इलाके में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) लिमिटेड के पनबिजली प्रोजेक्ट साइट पर, जब यह घटना हुई, तो सुरंग में 22 कर्मचारी फंसे हुए थे। 


माईंस एंड मिनरल अमेंडमेंट बिल 2026 राज्यसभा और लोकसभा में पास हो गया है।  आशंका है कि इससे मिनरल निकालने पर लगने वाले टैक्स सेस और दूसरे लेवी से होने वाली राज्यों की कमाई घट जाएगी। इस पर केंद्रीय माइंस मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुरुवार को कहा कि इस कानून से राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा।

यह बिल ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में मिनरल राइट्स और मिनरल वाली ज़मीन पर टैक्स लगाने के राज्यों के अधिकार को सही ठहराया था। कोर्ट ने राज्यों को 1 अप्रैल, 2005 से बकाया टैक्स वसूलने की इजाज़त भी दी थी, लेकिन बिना किसी ब्याज या पेनल्टी के।

सरकार के अनुसार, इस संशोधन का मकसद मुख्य खनिजों की कीमतों में ज़्यादा एकरूपता लाना और उनकी बढ़ती लागत को महंगाई और इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत में शामिल होने से रोकना है।


संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन (ILO) की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में युवाओं की बेरोज़गारी कम हुई थी, लेकिन अब यह फिर से बढ़ने लगी है।  

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में युवाओं की बेरोज़गारी दर बढ़कर 12.4 प्रतिशत हो गई, जिससे 15-24 साल की उम्र के लगभग 6.7 करोड़ युवा बेरोज़गार हो गए। 


ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर (GEM) की लेटेस्ट ‘ग्लोबल कोल माइन ट्रैकर’ (GCMT) रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक कोयले की मांग कम होने के बावजूद कोल माईनिंग के प्रपोज़्ड प्रोजेक्ट 11 फीसदी बढ़ गए हैं। 

प्रस्तावित खनन क्षमता में यह बढ़ोतरी लगभग पूरी तरह से भारत की वजह से हुई। चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, रूस और दक्षिण अफ्रीका – इन पांच देशों की हिस्सेदारी प्रस्तावित वैश्विक कोयला खनन क्षमता में लगभग 92 प्रतिशत (कुल 2,521 Mtpa में से 2,314 Mtpa) रही, जो 2024 में 89 प्रतिशत थी।

विस्तृत चर्चा

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी ने लद्दाख में 2,950 से ज़्यादा आवारा कुत्तों की नसबंदी की है, ताकि खतरे में घिरे ब्लैक-नेक्ड क्रेन (काली गर्दन वाले सारस) को बचाया जा सके। क्या है पूरी खबर समझते हैं हमारे रिपोर्टर वाहिद भट से।

लद्दाख के पवित्र क्रेन को बचाने का अभियान

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने लद्दाख में ब्लैक-नेक्ड क्रेन (काली गर्दन वाले सारस) को बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान शुरू किया है। इसके तहत 2022 से भारतीय सेना, पशुपालन विभाग और वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण विभाग के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। इस मुहिम के दौरान क्रेन की सुरक्षा के लिए 2,950 से अधिक आवारा कुत्तों का स्टेरलाइजेशन/सैनिटाइजेशन किया गया है।

क्रेन्स को कुत्तों से क्या खतरा?

लद्दाख के उच्च पर्वतीय आर्द्रभूमियों (wetlands) में ये आवारा कुत्ते ब्लैक-नेक्ड क्रेन के घोंसलों, अंडों और बच्चों (चिक्स) को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। ये कुत्ते घोंसला बनाने वाले इन पक्षियों को परेशान करते हैं और कई मामलों में इनके बच्चों को मार देते हैं, जिससे इनकी प्रजनन आबादी (breeding population) पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है । क्रेन की स्थिति और महत्व: ब्लैक-नेक्ड क्रेन लद्दाख का राज्य पक्षी है। भारत में इनकी आबादी 100 से भी कम बची है, जबकि वैश्विक स्तर पर इनकी संख्या लगभग 11,000 से 12,000 है, जिसके कारण इन्हें ‘संवेदनशील’ (Vulnerable) श्रेणी में रखा गया है।

लद्दाख की चांगथांग कोल्ड डेजर्ट वाइल्डलाइफ सेंचुरी, हानले और त्सो कार (Tso Kar) इनके प्रमुख प्रजनन क्षेत्र माने जाते हैं। सांस्कृतिक महत्व: बौद्ध संस्कृति में इस पक्षी का एक बेहद खास स्थान है। यहां के स्थानीय समुदाय इस पक्षी को शांति, समृद्धि और प्रकृति के साथ जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखते हैं। इसलिए, इनका संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपरा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

अन्य चुनौतियां और समाधान

कुत्तों के अलावा, आर्द्रभूमियों के आसपास बढ़ती मानव आबादी, सड़कों और बुनियादी ढांचों का निर्माण, पर्यटन का बढ़ता दबाव, पर्यावास का क्षरण (habitat degradation) और जलवायु परिवर्तन भी क्रेन के लिए गंभीर चुनौतियां हैं । आवारा कुत्तों की आबादी बढ़ने का मुख्य कारण मानव-जनित खाद्य कचरा (food waste) है, जो रिहायशी इलाकों, पर्यटक क्षेत्रों और सैन्य शिविरों से निकलता है । इसके समाधान के लिए BNHS ने कचरा प्रबंधन पर काम शुरू किया है और भारतीय सेना की चौकियों पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है ताकि कुत्तों को भोजन के कृत्रिम स्रोत न मिलें।

जैव विविधता संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन सभी संयुक्त प्रयासों से क्रेन के बच्चों की जीवित रहने की दर (survival rate) में कितना सुधार होता है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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