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केन–बेतवा परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन जारी, सर्वे के वादे पर उठे सवाल

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मध्य प्रदेश के पन्ना और छतरपुर जिले के बांध प्रभावित गांवों में एक नई पदयात्रा निकाली जा रही है। जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में “न्याय अधिकार पदयात्रा” चल रही है। इसका मकसद माझगाय और रुन्झ बांध से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों की समस्याओं को सामने लाना है।

यह पदयात्रा पन्ना जिले के प्रभावित गांवों में हो रही है, जहां लोगों का कहना है कि उन्हें भूमि अधिग्रहण कानून, ग्रामसभा और पुनर्वास की प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि उनसे बिना ठीक से पूछे और समझाए परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

पदयात्रा के दौरान बनहरी, टपरियन, कुंवारपुरा और बालूपुर जैसे गांवों में किसान चौपाल लगाई गई, जहां लोगों ने अपने अनुभव और शिकायतें साझा कीं। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे अपना हक मांगने प्रशासन के पास जाते हैं तो उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता।

प्रशासन के आश्वासन के बावजूद गांवों की शिकायतें बरकरार

पन्ना जिले में चल रही “न्याय अधिकार पदयात्रा” दरअसल उसी विवाद की अगली कड़ी है, जो पिछले महीने केन–बेतवा परियोजना को लेकर सामने आया था। फरवरी में छतरपुर के बिजावर में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जब मुआवजे और सर्वे की मांग कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया था। इस प्रदर्शन में करीब 20 गांवों के लोग शामिल थे, जो दौधन बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले हैं।

8 फरवरी को प्रशासन ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि एक महीने के भीतर नया सर्वे कराया जाएगा। इस भरोसे पर ग्रामीणों ने अपना आंदोलन एक महीने के लिए रोक दिया था। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि एक महीने बाद भी उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ और कई सवाल अब भी बाकी हैं। इसी वजह से लोग फिर से सड़कों पर उतर आए हैं।

इसी पृष्ठभूमि में अब जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर “न्याय अधिकार पदयात्रा” निकाल रहे हैं। यह पदयात्रा माझगाय और रुन्झ बांध से प्रभावित गांवों तक पहुंची, जहां किसानों और आदिवासी परिवारों ने अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें भूमि अधिग्रहण कानून, ग्रामसभा और पुनर्वास की प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं दी गई और उनकी सहमति भी नहीं ली गई।

पदयात्रा का उद्देश्य इन शिकायतों को प्रशासन और सरकार तक पहुंचाना है। यात्रा के बाद 10 मार्च को पन्ना में प्रेस वार्ता की जाएगी और 11 मार्च को प्रभावित ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेगा।

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