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यूरोप के कई देशों में रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव, जानिए अभी कैसे हालत हैं?

यूरोप की हीटवेव से लेकर यूपी के गन्ना संकट तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें

पीएम मोदी का क्लाइमेट जस्टिस पर जोर, असम में भारी बारिश से रेल पुल ढहा, कब्ज़ा रोकने गए 40 वनकर्मियों पर हमला, यूपी में गन्ना उत्पादन पर संकट। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


मुख्य सुर्खियां

सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से सबसे कम जिम्मेदार देशों पर सबसे अधिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने “क्लाइमेट जस्टिस” की वकालत करते हुए समावेशी और न्यायपूर्ण वैश्विक विकास पर बल दिया।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर में ‘PM फैमिली केयर ट्रैकर’ और ‘हेल्थ पासपोर्ट’ पायलट परियोजना की शुरुआत की। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म गर्भावस्था से लेकर 18 वर्ष की आयु तक बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की निगरानी करेगा, ताकि कोई भी पात्र परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।


असम के धेमाजी जिले में भारी बारिश के कारण एक रेलवे पुल का बड़ा हिस्सा ढह गया है, जिससे रेल यातायात बाधित हुआ है। इसके साथ ही, मौसम रिपोर्ट के अनुसार इस साल का जून 1901 के बाद से पांचवां सबसे सूखा महीना होने की संभावना जताई गई है।


जलवायु परिवर्तन और बीमारियों के कारण उत्तर प्रदेश के चीनी क्षेत्र में उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जो पिछले एक दशक में सबसे कम स्तर पर है। गन्ने की उत्पादकता घटने से न केवल चीनी की आपूर्ति बल्कि इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम पर भी असर पड़ने की चिंता है।


खंडवा में 100 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जे को लेकर लगभग 200 अतिक्रमणकारियों ने 40 वनकर्मियों की टीम पर गोफन और पत्थरों से हमला किया। इस हिंसक झड़प में 10 से अधिक वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।


केंद्र सरकार की नई आवंटन नीति के कारण मध्य प्रदेश के अनाज आधारित इथेनॉल उद्योग में लगभग 8000 करोड़ रुपये का निवेश संकट में पड़ गया है। मक्का किसानों को भी इससे भारी नुकसान की आशंका है क्योंकि राज्य में उत्पादन क्षमता के अनुसार कोटा नहीं मिल पा रहा है।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट बताएंगे यूरोप क्यों जूझ रहा है भीषण हीटवेव से।

यूरोप में हीटवेव का दौर और जूझता जन-जीवन

हीटवेव के कारण कई देशों में तापमान 40°C से ऊपर चला गया है, जिनमें फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम, स्विट्जरलैंड और डेनमार्क शामिल हैं। मुख्य रिकॉर्ड इस प्रकार हैं:

जर्मनी: कुछ इलाकों में तापमान 41°C के पार पहुंच गया।

स्विट्जरलैंड: बेसल में 38.8°C दर्ज किया गया, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह 40.8°C तक पहुंच गया।

यूनाइटेड किंगडम: जून के सबसे गर्म दिन दर्ज किए गए, जहां तापमान 37.3°C तक रहा।

डेनमार्क: अपने इतिहास के सबसे गर्म दिन देखे, तापमान 37°C तक रिकॉर्ड किया गया।

जलवायु परिवर्तन की भूमिका

विशेषज्ञ इस चरम मौसम का सीधा कारण जलवायु परिवर्तन को मानते हैं। “वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन” समूह के वैज्ञानिकों के अनुसार, मानवीय गतिविधियों से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग के बिना ऐसी रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी मुमकिन नहीं थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन गया है, जहाँ तापमान वैश्विक औसत से लगभग दोगुना तेजी से बढ़ रहा है। जो हीटवेव पहले 50 से 100 साल में एक बार आती थी, वह अब हर साल नजर आने लगी है।

बुनियादी ढांचे पर दबाव

चर्चा में एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह बताया गया है कि यूरोप का बुनियादी ढांचा ठंडी जलवायु के लिए बनाया गया था, न कि अत्यधिक गर्मी के लिए।

आवास: अधिकांश घरों, स्कूलों और कार्यालयों में एयर कंडीशनिंग की सुविधा नहीं है। जब तापमान 40°C के करीब पहुंचता है, तो सर्दियों में गर्मी रोकने के लिए बनाए गए ये घर “तंदूर” की तरह गर्म हो जाते हैं।

परिवहन: जर्मनी में बर्लिन के पास A2 मोटरवे पर कंक्रीट गर्मी की वजह से फट गई। रेलवे पटरियों के मुड़ने और बिजली लाइनों के खराब होने के कारण राष्ट्रीय रेलवे कंपनियों ने अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है। एक घटना में, बिजली गुल होने के कारण एक ट्रेन से 600 यात्रियों को बाहर निकालना पड़ा, जिससे गर्मी से संबंधित बीमारियों के कारण कुछ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

ऊर्जा: फ्रांस में सरकारी बिजली कंपनी EDF को कुछ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में उत्पादन कम करना पड़ा क्योंकि रिएक्टरों को ठंडा रखना मुश्किल हो गया था।

सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट: एक “खामोश कातिल”

हीटवेव का घातक प्रभाव पड़ा है, WHO ने केवल एक सप्ताह में 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतों की सूचना दी है।

फ्रांस: सबसे अधिक प्रभावित देश, जहां 1,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से 85% लोग 65 वर्ष से अधिक आयु के थे।

संवेदनशील आबादी: अकेले रहने वाले कई बुजुर्ग गर्मी का सामना करने में असमर्थ रहे। विशेषज्ञ गर्मी को “साइलेंट किलर” (खामोश कातिल) कहते हैं क्योंकि लोगों को अक्सर यह पता नहीं चलता कि उनका शरीर कितनी तेजी से निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) या हीट स्ट्रेस का शिकार हो रहा है।

आपातकालीन उपाय: इटली के 18 बड़े शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया।

अन्य मौसम संबंधी चरम सीमाएं

भीषण गर्मी के बाद कई देशों में तूफानी बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। स्वीडन और डेनमार्क में एक ही दिन में हजारों बार बिजली गिरने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं।

सुरक्षा सिफारिशें

पूरे महाद्वीप में अधिकारियों ने नागरिकों को तत्काल सलाह जारी की है:

घरों के अंदर रहें और सीधी धूप से बचें।

शरीर में पानी की कमी न होने दें और खूब पानी पिएं।

बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों पर विशेष ध्यान दें।

यह हीटवेव एक कड़ी चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब कोई दूर का खतरा नहीं है, बल्कि यह हर शहर और देश में जीवन को सक्रिय रूप से बदल रहा है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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