यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-203 है। मंगलवार, 28 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए बाघों की मौत के अनसुलझे रहस्य और भारत में बीमार होते लोगों के आंकड़े क्या कहते हैं?
मुख्य सुर्खियां
भारत में इस साल अप्रैल पिछले 4 वर्षों में सबसे गर्म रहा है, जहां बांदा में तापमान 47.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। केंद्र सरकार ने राज्यों को विशेष ‘हीट स्ट्रोक यूनिट्स’ सक्रिय करने और मरीजों के किडनी-लीवर की भी निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
ओडिशा में भीषण गर्मी के बीच जनगणना ड्यूटी पर तैनात दो शिक्षकों की कथित तौर पर लू लगने (हीटस्ट्रोक) से मृत्यु हो गई है। ये मौतें मयूरभंज और सुंदरगढ़ जिलों में हुईं, हालांकि राहत आयुक्त कार्यालय ने अभी तक इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते से भारतीय निर्यात को ज़ीरो ड्यूटी की सुविधा मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समझौता किसानों की आय बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तेज़ी से गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताते हुए 6 हफ्ते में रिपोर्ट तलब की है। ट्रिब्यूनल ने इन राज्यों से पूछा है कि भूजल संरक्षण और रिचार्ज के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
महाराष्ट्र के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा स्वीकृत 14 झील संरक्षण परियोजनाओं के प्रशासनिक अनुमोदन को रद्द कर दिया है। विभाग ने इन परियोजनाओं के लिए पहले से जारी किए गए धन को ब्याज सहित वापस लेने के आदेश भी दिए हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों के पुनस्र्थापन अभियान का शुभारंभ करेंगे। इसके तहत असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए दुर्लभ प्रजाति के जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में बसाया जा रहा है।
विस्तृत चर्चा
भारत में बाघों की मौतों का अनसुलझा रहस्य
सूचना का अधिकार (आरटीआई) के दस्तावेजों से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि वर्ष 2020 से 2021 के बीच हुई 88 बाघों की मौत के मामले अभी भी अनसुलझे हैं। इन मामलों में न तो मौत का कोई पुख्ता कारण पता चला है, न ही जांच पूरी हुई है और न ही किसी की जवाबदेही तय की गई है। कई मामलों को ‘जब्ती’ (सीजर) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जहां बाघों के अंग बरामद हुए हैं, जो सीधे तौर पर अवैध शिकार (पोचिंग) की ओर इशारा करते हैं।
प्रमुख प्रभावित क्षेत्र और राज्य यह समस्या देश के कई प्रमुख बाघ अभयारण्यों में फैली हुई है:
मध्य प्रदेश: यहां बाघों की सबसे अधिक आबादी है और लंबित मामलों का एक बड़ा हिस्सा भी यहीं है, जिसमें बांधवगढ़, कान्हा और पन्ना जैसे संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।
महाराष्ट्र: ताडोबा-अंधारी और चंद्रपुर के इलाकों से कई मामले सामने आए हैं।
असम: काजीरंगा जैसे उच्च सुरक्षा वाले पार्क में भी 2020 से कई बाघों की मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है।
अन्य राज्य: कर्नाटक (नागरहोल), उत्तर प्रदेश (दुधवा) और उत्तराखंड (कॉर्बेट और रामनगर) में भी इसी तरह के अनसुलझे मामलों का अंबार लगा हुआ है।
जांच प्रक्रियाओं में कमी और भविष्य की चिंताएं
पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे के अनुसार, कई मामलों में पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट जैसे जरूरी दस्तावेजों की कमी है। देरी के कारण अहम सबूत नष्ट हो सकते हैं, जिससे दोषियों को सजा मिलना मुश्किल हो जाता है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने राज्यों को 27 जनवरी, 2026 तक रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है, ऐसा न करने पर मामलों को बंद किया जा सकता है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि बिना किसी निष्कर्ष के मामलों को बंद करना “सच्चाई को दफनाने” जैसा है।
भारत में स्वास्थ्य की स्थिति
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर आठ में से एक व्यक्ति (लगभग 13.1%) बीमार है। यह डेटा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी पारिवारिक सामाजिक उपभोग स्वास्थ्य रिपोर्ट (जनवरी-दिसंबर 2025) पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में देश में बीमारी की दर दोगुनी हो गई है।
शहरों में बीमारी की दर (14.9%) ग्रामीण क्षेत्रों (12.2%) की तुलना में अधिक है। वहीं महिलाओं में बीमारी की दर (14.4%) पुरुषों (11.8%) की तुलना में अधिक दर्ज की गई है।
आयु वर्ग के अनुसार बीमारियां रिपोर्ट में विभिन्न आयु वर्गों में बीमारियों के अलग-अलग पैटर्न बताए गए हैं:
बच्चे (0-14 वर्ष): इनमें संक्रमण और सांस से जुड़ी बीमारियां (बुखार, सर्दी, खांसी) सबसे प्रमुख हैं।
युवा (15-29 वर्ष): इस वर्ग में संक्रमण के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य (न्यूरोलॉजिकल) और पेट से जुड़ी समस्याएँ बढ़ रही हैं। चिंता की बात यह है कि युवा भी अब हृदय रोगों की चपेट में आ रहे हैं।
मध्य आयु (30-59 वर्ष): 30 से 44 वर्ष की आयु में दिल की बीमारियों और डायबिटीज का प्रतिशत तेजी से बढ़ता है। 45 से 59 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते जीवनशैली से जुड़ी गैर-संचारी बीमारियां प्रमुख हो जाती हैं।
बुजुर्ग (60+ वर्ष): इस वर्ग में बीमारी की दर सबसे अधिक (42-45%) है, जहाँ हृदय रोग, मेटाबॉलिक बीमारियां और हड्डी व जोड़ों की समस्याएं शीर्ष पर हैं।
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