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राजस्थान में डिलेवरी के बाद महिलाओं की मौत पर केंद्र ने मांगा जवाब

राजस्थान में सी-सेक्शन डिलेवरी के बाद मौत से लेकर मिजोरम के 'पर्यावरणीय घाटे' तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें

दिल्ली में सेप्टिक टैंक में 3 मजदूरों की मौत, मेघालय में 295 करोड़ का ऑर्गेनिक मिशन, प्राकृतिक आपदाओं-पशु रोगों से 1291 करोड़ रु का नुकसान, राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी में सुरक्षा के लिए विशेष दल। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


मुख्य सुर्खियां

दिल्ली के मुंडका स्थित एक फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। पुलिस ने फैक्ट्री मालिक, ठेकेदार और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया है तथा सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जांच जारी है।


मेघालय ने 295 करोड़ रुपये की मेघालय स्टेट ऑर्गेनिक मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत की और किसान सहकारी समितियों को 5.8 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। इस चरण में 44,000 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को जैविक खेती के दायरे में लाकर करीब 46,000 छोटे किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।


पिछले पांच वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं, भूस्खलन, चक्रवात और पशु रोगों के प्रकोप के कारण मिजोरम को लगभग 1,291 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। रिपोर्ट में राज्य की आपदा-प्रबंधन क्षमता मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन से बढ़ते जोखिमों के मद्देनजर बेहतर तैयारी की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।


दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की भारी किल्लत हो गई है क्योंकि भंडारण की जगह न होने के कारण 1.27 लाख से अधिक वायल (vials) की आपूर्ति नहीं हो पाई है। सीरम इंस्टीट्यूट ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज की कमी की वजह से उनकी खेप जनकपुरी स्थित सेंट्रल वेयरहाउस द्वारा स्वीकार नहीं की गई।


मध्य प्रदेश के देवास में तेज आंधी और बारिश के कारण एक मकान का छज्जा गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई और एक बच्ची सहित दो लोग घायल हो गए। शुक्रवार को प्रदेश के 39 जिलों में बारिश दर्ज की गई है और 43 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।


राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की सुरक्षा के लिए 43 साल बाद अब एक समर्पित विशेष बल (Special Force) तैनात किया जाएगा। हाल ही में एक वनकर्मी की हत्या के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा में यह निर्णय लिया गया ताकि घड़ियालों और नदी के घाटों की बेहतर सुरक्षा हो सके।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट बताएंगे राजस्थान में सी-सेक्शन डिलेवरी के बाद माताओं की मौत के मामले में अब तक क्या-क्या सामने आया है?

राजस्थान में सी-सेक्शन डिलेवरी के बाद महिलाओं की मौत

राजस्थान में सी-सेक्शन (C-section) डिलीवरी के बाद हुई माताओं की मौत और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं के मामले ने पूरे देश के हेल्थ सिस्टम को हिला कर रख दिया है। इस संकट पर अब न केवल भारत सरकार, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी कड़ी नजर रख रहा है।

शुरुआती संदेह और ‘ऑक्सीटोसिन’ की जांच

यह संकट तब सामने आया जब कोटा, बीकानेर और जोधपुर के सरकारी अस्पतालों में सी-सेक्शन के बाद कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और मौत होने की खबरें आईं। शुरुआत में शक ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) इंजेक्शन की तरफ गया, जिसका इस्तेमाल प्रसव के दौरान लेबर पेन शुरू करने और बच्चे के जन्म के बाद अधिक खून बहने से रोकने के लिए किया जाता है। दवा के घटिया या नकली होने के अंदेशे के चलते, कोटा के एक ड्रग डिस्ट्रीब्यूटर और पंजाब की दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लाइसेंस कैंसिल कर दिए गए और दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए।

चिकित्सा विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

सरकारी डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का तर्क है कि इन मौतों की वजह सिर्फ दवा नहीं हो सकती। उनके अनुसार, इसके पीछे कई अन्य महत्वपूर्ण चिकित्सीय कारण हो सकते हैं:

हाई-रिस्क प्रेगनेंसी: कई महिलाएं पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, गंभीर एनीमिया (खून की कमी) या संक्रमण जैसी समस्याओं से पीड़ित थीं।

सर्जिकल जोखिम और रक्तस्राव: सी-सेक्शन ऑपरेशन में अत्यधिक खून बहने (bleeding) का खतरा रहता है। यदि समय पर खून का इंतजाम या आपातकालीन उपचार न मिले, तो स्थिति बहुत नाजुक हो सकती है।

देर से रेफर किया जाना (Late Referrals): विशेषज्ञों ने बताया कि अक्सर मरीजों को बड़े अस्पतालों में तब रेफर किया जाता है जब उनकी स्थिति बहुत बिगड़ चुकी होती है और काफी खून बह चुका होता है। ऐसी स्थिति में एक्यूट किडनी फेलियर जैसी गंभीर जटिलताएं पैदा हो जाती हैं।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

मामले की गंभीरता को देखते हुए, WHO ने भारत सरकार से इस पर रिपोर्ट मांगी है ताकि यह समझा जा सके कि क्या यह समस्या केवल राजस्थान तक सीमित है या कहीं और भी ऐसे खतरे मौजूद हैं। इसके जवाब में, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राजस्थान सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसमें प्रत्येक मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, ऑपरेशन के बाद की जटिलताएं, इस्तेमाल की गई दवाएं और इलाज की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी।

व्यवस्थागत चुनौतियां और सुझाव

चर्चा में यह बात भी सामने आई कि हालांकि भारत में मातृ मृत्यु दर (maternal mortality) में कमी आई है, लेकिन उन इलाकों में चुनौतियां अब भी बरकरार हैं जहां स्वास्थ्य सुविधाओं और डॉक्टरों की कमी है। विशेषज्ञों ने बचाव के लिए कुछ प्रमुख सुझाव दिए हैं:

नियमित प्रसव पूर्व जांच (Checkups): एनीमिया, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं की समय पर पहचान मां और बच्चे दोनों की जान बचा सकती है।

बेहतर रेफरल सिस्टम: मरीजों को गंभीर स्थिति होने से पहले ही सही अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंचाना अनिवार्य है।

वर्तमान स्थिति

इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है और अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है कि इन मौतों की मुख्य वजह ऑक्सीटोसिन दवा थी, इलाज में लापरवाही या प्रसव के दौरान होने वाली अन्य मेडिकल जटिलताएं। स्वास्थ्य अधिकारी सभी गर्भवती महिलाओं से अपील कर रहे हैं कि वे गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच करवाएं और किसी भी परेशानी की सूरत में तुरंत डॉक्टरी मदद लें।

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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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