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कोयले के संकट से क्यों जूझ रही प्रिंटिंग इंडस्ट्री?

अरुणाचल में पेड़ों की कटाई से लेकर मध्य प्रदेश की बाघ दीदी तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

अरुणाचल में 23 लाख पेड़ कटेंगे, दिल्ली की हवा ‘बेहद ख़राब’, मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए ‘बाघ दीदी’, इंडोनेशिया में मिला विलुप्त हो चुका जीव। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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प्रमुख ख़बरें

एनएचपीसी ने अरुणाचल प्रदेश में कमला जलविद्युत परियोजना के लिए 23 लाख से अधिक पेड़ों को काटने की वन मंजूरी मांगी है। कमला नदी पर लगभग 24,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पूरा करने के लिए, 3,278 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को गैर-वन कार्यों के लिए इस्तेमाल करना होगा।


दिल्ली में वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है। इसके चलते स्टेज वन ग्रेडेड रिस्पॉंस एक्शन प्लान लागू कर दिया गया। यह तब लागू किया जाता है जब एक्यूआई 200 से 300 के बीच हो। 

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प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली मेट्रो वीकडेज़ पर 20 अतिरिक्त फेरे लगाएगी। उद्देश्य है कि ज्यादा लोग मेंट्रो से सफर कर सकें और सड़कों पर ट्रैफिक कम हो। 


मध्य प्रदेश ने मानव-बाघ संघर्ष को रोकने के लिए ‘बाघ दीदी’ पहल शुरू की है। पहले चरण में कान्हा टाइगर रिज़र्व के आस-पास लगभग 20 ‘बाघ दीदियों’ को नियुक्त किया जाएगा। इस पहल के तहत स्थानीय महिलाओं, खासकर आदिवासी महिलाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।


पृथ्वी के सबसे अनोके प्राईमेट्स में से एक बांका स्लो लोरिस पेड़ों पर रहने वाला एक ऐसा जीव है जो बहुत धीरे चलता है और जहरीला भी होता है। इसे ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ और ‘विलुप्त’ मान लिया गया था। लेकिन अब, इंडोनेशिया के द्वीप ‘बांका’ पर इसे फिर से खोज लिया गया है।

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विस्तृत चर्चा

इंडियन न्यूज़प्रिंट इंडस्ट्री में कोयले का संकट

पल्लव द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन न्यूज़प्रिंट इंडस्ट्री लगातार कोयले की कमी और सप्लाई में रुकावटों से जूझ रही है। इंडियन न्यूज़प्रिंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (INMA) ने इस समस्या को हल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे दखल देने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की सब्सिडियरी कंपनियों के साथ लगातार फ्यूल सप्लाई अरेंजमेंट (FSA) के बावजूद, मैन्युफैक्चरर्स को तय समय पर कोयले के रेक नहीं मिल रहे हैं। 

इस कमी की वजह से मिलों को खुले बाज़ार से ज़्यादा कीमतों पर कोयला खरीदना पड़ रहा है और वे महंगी कोयले की बिजली पर निर्भर हैं। इसके अलावा, लंबे समय के बाद अचानक कई कोयले के रेक आने से मैन्युफैक्चरर्स के लिए फाइनेंसिंग, स्टोरेज, हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़ी गंभीर फाइनेंशियल और लॉजिस्टिक चुनौतियां पैदा हो रही हैं।

INMA ने सरकार से अपील की है कि वह पावर और नॉन-पावर सेक्टर के बीच कैबिनेट कमिटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) द्वारा सुझाए गए 75:25 कोल एलोकेशन रेश्यो को लागू करे। एसोसिएशन के अनुसार, 95% से ज़्यादा कोयले की सप्लाई पावर प्लांट्स को भेजी जा रही है, जिससे न्यूज़प्रिंट बनाने वालों जैसे नॉन-रेगुलेटेड सेक्टर (NRS) के कंज्यूमर्स को कॉन्ट्रैक्ट के बावजूद काफ़ी कोयला नहीं मिल पा रहा है। 

बीते दिनों कोयले की कमी के कारण मध्य प्रदेश की नेपा लिमिटेड की न्यूजप्रिंट मिल में उत्पादन बंद हो गया था. पिछले छह महीनों से कर्मचारियों ने आंतरिक संसाधनों से मशीनें चलाने की कोशिश की, लेकिन कोयले की कमी और वित्तीय संकट के कारण उत्पादन ठप है।  

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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