यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-115 है। बुधवार, 14 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए झारखण्ड में आतंक मचाने वाले हाथी और देश में पड़ रही अप्रत्याशित ठंड के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
दिल्ली जू के वर्कर्स असोशिएशन ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर यह दावा किया है कि वहां एक सियार को जिंदा जलाने का प्रयास किया गया है।
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ने दावा किया है कि दिल्ली में केवल 10% एंड ऑफ़ लाइफ गाड़ियां सडकों पर दौड़ रही हैं। CAQM के अनुसार इस तरह की 66 लाख गाड़ियां दिल्ली में रजिस्टर हैं मगर सभी सड़कों पर नहीं है।
दिल्ली जल बोर्ड को बीते 9 महीनों में दूषित पानी की 45 हज़ार कम्प्लेन मिली हैं। सबसे ज्यादा कम्प्लेन यमुना पार क्षेत्र से मिली हैं।
मध्य प्रदेश में 15 लाख पेड़ कटने की खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए NGT की प्रिंसिपल बेंच ने मध्य प्रदेश सरकार की 5 एजेंसियों को नोटिस जारी किया है। आगामी 9 मार्च को सुनवाई में इनके प्रमुखों को वर्चुअली पेश होने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर डॉग बाईट की घटना और इससे होने वाली मौत को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने पर्याप्त इंतज़ाम नहीं किए तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौत के बाद प्रदेश में पहली जल सुनवाई मंगलवार को हुई। भोपाल में इस दौरान 18 वार्डों से 49 सैम्पल्स आए। इनमें से 3 जगहों पर क्लोरीन शून्य पाया गया।
यूरोपियन यूनियन की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) ने बुधवार को कहा कि ऐसा पहली बार हुआ कि पिछले तीन सालों (2023-25) में ग्लोबल टेम्परेचर प्री-इंडस्ट्रियल लेवल से औसतन 1.5°C ज़्यादा रहा है।
विस्तृत चर्चा

पश्चिमी सिंहभूम में हाथी-मानव संघर्ष
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक अकेला नर हाथी आतंक का पर्याय बना हुआ है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
हिंसा और जनहानि: पिछले 10 दिनों में इस हाथी के हमले से लगभग 20 लोगों की जान जा चुकी है। यह हाथी सामान्य व्यवहार के विपरीत जंगलों से भागने के बजाय गाँवों को ढूंढकर हमला कर रहा है और घरों में घुसकर लोगों को कुचल रहा है।
ग्रामीणों में भय: बेनी सागर, बावरिया और सोवान जैसे गाँवों के लोग रात होते ही छतों या मचानों पर छिपने को मजबूर हैं। हाथी मचानों से भी लोगों को खींचकर नीचे पटक रहा है।
विशेषज्ञों और वन विभाग ने इसके लिए निम्नलिखित कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:
मस्त (Musth): वन विभाग का मानना है कि हाथी संभवतः ‘मस्त’ की स्थिति में है, जहाँ टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर बहुत बढ़ जाता है, जिससे हाथी अधिक आक्रामक हो जाता है।
खनन और आवास का विनाश: वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के शोध के अनुसार, सरांडा और नोवा मुंडी बेल्ट में लगातार हो रही आयरन ओर की माइनिंग ने हाथियों के पारंपरिक माइग्रेशन रूट (गलियारों) को तोड़ दिया है।
अकेलापन और संसाधनों की कमी: खदानों और सड़कों के कारण जंगल छोटे-छोटे हिस्सों में बँट गए हैं, जिससे हाथियों को भोजन की कमी, अकेलापन और इंसानों के साथ सीधे टकराव का सामना करना पड़ रहा है।
वन विभाग इस संकट से निपटने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग कर रहा है:
हाथी की निगरानी के लिए ड्रोन, थर्मल कैमरे और 24 घंटे गश्त की व्यवस्था की गई है।
हाथी को बेहोश करके पकड़ने के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस (Wildlife SOS) जैसे एनजीओ और विशेष टीमें तैनात की गई हैं, हालांकि अभी तक सफलता नहीं मिली है।
वर्तमान में टॉर्च और पटाखों जैसे पारंपरिक उपाय इस हाथी के सामने बेअसर साबित हो रहे हैं।

भारत में भीषण शीत लहर (Coldwave) का प्रकोप
तापमान में भारी गिरावट: दिल्ली के सैनिक फार्म और गुड़गांव के बाहरी इलाकों में तापमान -1 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है। राजस्थान के फतेहपुर शेखावटी में यह गिरकर -3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों के लिए यह ‘सब-जीरो’ तापमान एक असामान्य घटना है।
दक्षिण भारत में अनोखा मौसम: तमिलनाडु में एक दुर्लभ स्थिति देखी गई जहाँ दिन और रात के तापमान में केवल 1 से 2 डिग्री सेल्सियस का अंतर रहा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह अक्सर हिल स्टेशनों में दिखने वाला ट्रेंड है जो इस बार मैदानी शहरों में दिखा।
इस असामान्य ठंड के पीछे कई भौगोलिक और वायुमंडलीय कारक हैं।
आर्कटिक कोल्ड ब्लास्ट: आर्कटिक क्षेत्र से दक्षिण की ओर बढ़ने वाली ठंडी हवाओं का एक दुर्लभ प्रवाह (Southward Cold Blast) भारत के पूर्वी, मध्य और दक्षिणी राज्यों को प्रभावित कर रहा है।
ला नीना (La Niña): यह एनसो (ENSO) घटना का ठंडा चरण है, जिससे वॉकर और हेडली सर्कुलेशन मजबूत होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारत में सामान्य से अधिक ठंड पड़ती है।
पश्चिमी विक्षोभ और जेट स्ट्रीम: सबट्रॉपिकल वेस्टर्ली जेट का तेज होना और दक्षिण की ओर खिसकना, साथ ही बार-बार होने वाले पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) इस ठंड को और बढ़ा रहे हैं।
रेडियेटिव कूलिंग: विक्षोभ के बाद साफ आसमान के कारण होने वाली रेडियेटिव कूलिंग लंबी और ठंडी रातों का कारण बनती है।
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