यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-113 है। सोमवार, 12 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए क्या है महाराष्ट्र सरकार का खनन को लेकर विवादित फैसला और हिमाचल के सेब पर अब कौन-सा संकट गहराया?
मुख्य सुर्खियां
तेलंगाना के करीमनगर जिले में क़रीब 300 कुत्तों को ज़हरीला इंजेक्शन देकर मार दिया गया। इस मामले में 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
सोमवार सुबह दिल्ली के सफ़दरजंग में पारा 3.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी ने उत्तरप्रदेश, जम्मू, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तराखंड में कोल्ड वेव का अलर्ट जारी किया है।
द हिन्दू की एक खबर के अनुसार ट्राइबल मिनिस्ट्री, पर्यावरण मंत्रालय के साथ इस बारे में बात चीत कर रहा है कि वह कम्युनिटी फ़ॉरेस्ट रिसोर्सेज के संरक्षण के फंड करे। अभी फ़ॉरेस्ट राईट एक्ट के तहत कम्यूनिटी फ़ॉरेस्ट रिसोर्स मैनेजमेंट कमिटी जिसमें ग्रामीण ही होते हैं, वह संसाधनों की रक्षा करती है। ट्राइबल मिनिस्ट्री पर्यावरण मंत्रालय से इन्हीं कमिटी को फंड करने का आग्रह कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने रविवार को बताया कि सोयाबीन के बाद सरसों की खरीद भी अब भावान्तर योजना के तहत होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि 2028 से पहले गेहूं की एमएसपी 2700 तक पहुंचा देंगे।
सोमवार सुबह दतिया 5.4 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा। बड़े शहरों में ग्वालियर में सबसे कम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
भोपाल नगर निगम के सत्र में इस बार मॉडर्न स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने पर पक्ष और विपक्ष दोनों एकजुट होकर प्रशासनिक अमले को घेरेंगे। वहीं दूसरा मुद्दा निजी कॉलोनी में सस्ते दाम पर पानी की सप्लाई करना होगा। इस बीच यह याद रखिये कि बीते दिनों भोपाल की 4 लोकेशन के पानी के सैमपल्स में ई-कोलाई की उपस्थिति मिली थी।
विस्तृत चर्चा
महाराष्ट्र में खनन और पारिस्थितिक चिंताएं
लोहार डोंगरी में खनन की मंजूरी: महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ ने लोहार डोंगरी में 36 हेक्टेयर वन भूमि को ओपन कास्ट आयरन ओर माइनिंग के लिए मंजूरी दे दी है। यह क्षेत्र ताडोबा अंधेरी टाइगर रिजर्व और घोड़ा जरी वन्यजीव अभयारण्य को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण और सक्रिय गलियारा (corridor) है।
विशेषज्ञों की चेतावनी और पर्यावरणीय प्रभाव: दो विशेषज्ञ समितियों ने इस प्रस्ताव को खारिज करने की सिफारिश की थी, क्योंकि यह गलियारा बाघों और तेंदुओं द्वारा नियमित रूप से उपयोग किया जाता है। इस परियोजना के कारण लगभग 18,000 पेड़ों की कटाई होने का अनुमान है, जिससे जंगल टुकड़ों में बंट जाएगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है,।
विकास बनाम संरक्षण का विवाद: आलोचकों का तर्क है कि यह फैसला पारिस्थितिक सुरक्षा के बजाय औद्योगिक हितों को प्राथमिकता देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में खनन से होने वाले नुकसान की भरपाई किसी भी अन्य उपायों से संभव नहीं है।
हिमालयी क्षेत्रों में सेब की खेती पर संकट
हिमाचल प्रदेश में सूखे की स्थिति: हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन महीनों से न तो बारिश हुई है और न ही बर्फबारी, जिसके कारण मिट्टी जम रही है और उसमें दरारें पड़ रही हैं। लगभग ₹6000 करोड़ का सेब व्यवसाय अब खतरे में है क्योंकि नए पौधों की खरीद रुक गई है और पुराने पेड़ सूख रहे हैं।
‘चिलिंग ऑवर्स’ और बर्फ का महत्व: विशेषज्ञों के अनुसार, सेब के पेड़ों को सर्दियों में 1000 से 1800 घंटे की ठंड की आवश्यकता होती है, जिसे ‘चिलिंग आवर्स’ कहा जाता है। बर्फ न केवल ठंडक देती है, बल्कि मिट्टी को नमी भी प्रदान करती है और फंगस व कीड़ों को बढ़ने से रोकती है। बर्फ की कमी के कारण जड़ों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
कश्मीर में बदलता मौसम पैटर्न: कश्मीर, जिसे ‘बर्फ का घर’ कहा जाता है, वहां भी इस बार भारी बर्फबारी नहीं हुई है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (Western Disturbance) के कमजोर होने के कारण शोपियां, सोपोर और बारामुल्ला जैसे प्रसिद्ध सेब क्षेत्रों में उत्पादन घट रहा है। यह स्थिति लगभग डेढ़ लाख परिवारों के रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है।
यह चर्चा स्पष्ट करती है कि जहां उत्तर भारत में जलवायु संकट सीधे तौर पर आजीविका को प्रभावित कर रहा है, वहीं पश्चिम भारत में नीतिगत निर्णय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों को खतरे में डाल रहे हैं।
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