राज्यों को चारा उत्पादन की सलाह, अहमदाबाद में सरकारी बिल्डिंग्स पर सोलर लगाना अनिवार्य, कर्नाटक में सूखा के लिए 5000 रु की राहत, मध्य प्रदेश में स्वसहायता समूह क़र्ज़ में। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
प्रमुख ख़बरें
केंद्र ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए एडवाइजरी जारी की है। राज्यों को कार्यक्रम के कुल बजट का कम से कम 5% हिस्सा चारा व पशुधन विकास पर खर्च करने का निर्देश दिया गया है।
अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने बिजली संकट और बढ़ते खर्च के बीच सभी नए सरकारी भवनों के लिए सौर ऊर्जा प्रणाली लगाना अनिवार्य कर दिया है। अब सोलर लगाने के बाद ही बिल्डिंग यूज परमीशन मिलेगी।
कर्नाटक सरकार ने सूखा पीड़ित किसानों के लिए अंतरिम राहत राशि को ₹2,500 से बढ़ाकर ₹5,000 प्रति लाभार्थी कर दिया है। इस राहत योजना के लिए सरकार ने ₹1,250 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
केंद्र सरकार ने कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्टस को गति देने के लिए दो योजनाओं के तहत ₹46,000 करोड़ के वित्तीय प्रोत्साहन की घोषणा की है। इससे अगले 7 वर्षों में ₹1.5 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत का लक्ष्य रखा गया है।
मध्य प्रदेश में स्कूली बच्चों के लिए मिड-डे मील (जुलाई से लंबित) और आंगनवाड़ी पूरक पोषण (अगस्त से लंबित) बनाने वाले लगभग 15,000 स्व-सहायता समूह (SHG) भुगतान न मिलने से लाखों के कर्ज में डूब गए हैं। बकाया राशि जारी करने की मांग को लेकर इन समूहों ने 17 नवंबर को राज्यव्यापी ‘चक्का जाम’ का आह्वान किया है।
विस्तृत चर्चा
भोपाल में दैनिक वेतनभोगी सफाई कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से धनतेरस से पहले शहर के 85 वार्डों में सड़कों पर कचरे के ढेर लग गए हैं। खबर पर विस्तार से बता रहे हैं वाहिद भट।
भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, कचरे के ढेर लगे
भोपाल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है। लगातार दूसरे दिन, यानी गुरुवार को भी शहर के 85 वार्डों से कचरा नहीं उठाया गया। सड़कों और बाजारों में कचरे के ढेर लग गए हैं। दिवाली और धनतेरस से पहले शहर में गंदगी को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
यह हड़ताल दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की चार मांगों को लेकर है। कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें स्थायी किया जाए, ठेका व्यवस्था बंद हो, हर कर्मचारी को कम से कम 25 हजार रुपये मासिक वेतन मिले और पति या पत्नी में से किसी एक की मृत्यु होने पर दूसरे को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। वे सभी कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की भी मांग कर रहे हैं।
टाइमिंग पर सवाल
इस हड़ताल की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सोमवार को भोपाल नगर निगम ने सफाई कर्मचारियों की हाजिरी और काम की निगरानी के लिए नई व्यवस्था लागू की थी। इसके अगले ही दिन कर्मचारी विरोध प्रदर्शन पर उतर आए।
नई व्यवस्था के तहत जोन के अधिकारियों और सफाई कर्मचारियों को एक ही वार्ड में साथ काम करना था। काम शुरू करते और खत्म करते समय लोकेशन के साथ तस्वीरें मुख्यालय भेजना जरूरी था। ड्यूटी का समय सुबह 6 से 11 और दोपहर 12 से 3 बजे तक तय किया गया था। हर वार्ड से रोज उठने वाले कचरे का वजन भी दर्ज करना था।
नगर निगम के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से उन कर्मचारियों की पहचान हो सकती थी, जो रिकॉर्ड में मौजूद हैं, लेकिन असल में ड्यूटी पर नहीं आते। इन्हें घोस्ट कर्मचारी कहा जाता है। यह भी विरोध की एक वजह हो सकती है।
हड़ताल का असर
गुरुवार को हड़ताल का असर सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रहा। हड़ताली कर्मचारियों ने नियमित स्टाफ को भी काम नहीं करने दिया। नगर निगम के दफ्तरों में बिजली कनेक्शन बंद कर दिए गए। स्थिति संभालने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र, पेंशन, विवाह पंजीयन और समग्र आईडी से जुड़े काम भी प्रभावित हुए।
भोपाल नगर निगम में करीब 8,500 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें लगभग 90 प्रतिशत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं।
अब शहर में पानी की सप्लाई को लेकर भी संकट की आशंका है। कर्मचारियों ने शुक्रवार सुबह से जलापूर्ति रोकने और नगर निगम मुख्यालय, अटल भवन में तालाबंदी करने की चेतावनी दी है।
मुख्यमंत्री से बात करने की मांग
जलापूर्ति विभाग में कुल 2,327 कर्मचारी हैं। इनमें 1,263 दैनिक वेतनभोगी, 425 आउटसोर्स और 310 नियमित कर्मचारी शामिल हैं। नगर निगम का कहना है कि जरूरत पड़ने पर आउटसोर्स कर्मचारियों की मदद से पानी की सप्लाई जारी रखी जाएगी।
यूनियन के मुताबिक, मध्य प्रदेश के 10 संभागों, 16 नगर निगमों और 374 नगरपालिकाओं में करीब ढाई लाख दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों की मांग है कि मुख्यमंत्री उनसे सीधे बातचीत करें। यूनियन ने कहा है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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