यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का 80वां एपिसोड है। मंगलवार, 02 दिसंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए प्रदूषण को लेकर सीजेआई की टिप्पणी और मध्य प्रदेश में SIR पर हमारी ग्राउंड रिपोर्ट के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने नया अर्थक्वेक हजार्ड मैप जारी किया है, मैप के अनुसार देश की लगभग 75% आबादी भूकंप के खतरे वाले इलाकों में रहती है। भारत की 61% भूमि मध्यम से उच्च भूकंप खतरे वाले रीजंस में आती है।
नए मैप में जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक पूरे हिमालयी क्षेत्र को जोन VI में रखा गया है। पिछले मानचित्र में हिमालय को अलग-अलग जोन IV और V में बांटा गया था।
1950 के दशक के बाद पहली बार, पश्चिम बंगाल में लुप्तप्राय हिमालयन मस्क डियर की उपस्थिति का फोटोग्राफिक एविडेंस मिला है। नेओरा वैली नेशनल पार्क में एक कैमरा ट्रैप ने दुर्लभ तस्वीरें खींचीं, जिससे यह कन्फर्म हुआ कि यह प्रजाति दशकों तक गायब रहने के बाद भी इस इलाके में ज़िंदा है।
संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन भी लोकसभा में 20 प्रश्न लिस्ट किए गए हैं। इनमें से सबसे ज़्यादा 8 प्रश्न कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से पूछे जाने हैं। इनमें महाराष्ट्र में बाढ़ के चलते हुए नुकसान, MSP और फसल बीमा योजना जैसे कई मसले शामिल हैं। आश्चर्यजनक रूप से पंजाब में आई बाढ़ से संबंधित कोई भी प्रश्न नहीं है।
दितवाह तूफ़ान के चलते चेन्नई सहित कई शहरों में बारिश की आशंका के चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। चेन्नई में स्कूल और कॉलेज आज बंद रहेंगे।
मध्य प्रदेश में विधानसभा सत्र के पहले दिन सरकार ने बताया कि गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी करने के लिए प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि में कमी आई है। 5 साल में गेहूं का समर्थन मूल्य 410 रु प्रति क्विंटल बाधा है जबकि केंद्र ने प्रदेश को दी जाने वाली राशि 6 हज़ार 241 रूपए घटा दी है।
भोपाल में आदमपुर लैंडफिल साईट के कचरे के निपटारे के लिए भोपाल नगर निगम ने नया टेंडर जारी किया है। इसके अनुसार जो भी कंपनी इसके कचरे का प्रबंधन करेगी उसे 2 घंटे के भीतर ही आग पर काबू पाना होगा वर्ना हर दिन जब तक आग नहीं बुझती तब तक 10 लाख रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
विस्तृत चर्चा
प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई (चंद्रप्रताप तिवारी के साथ)
सुप्रीम कोर्ट ने यह तय किया है कि दिल्ली के प्रदूषण के मसले पर अब नियमित सुनवाई होगी। इस मामले की सुनवाई दो जजों की बेंच कर रही थी, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे।
सोमवार को हुई सुनवाई में CJI ने सरकार के सामने सख्त सवाल रखे और कहा कि प्रदूषण फैलने का पूरा दोष किसानों पर डालना सही नहीं। उन्होंने कहा कि पराली जलाने को प्रदूषण का एकमात्र कारण बताना गलत है। CJI ने सवाल उठाया कि लॉकडाउन के दौरान भी पराली जलाई जा रही थी, लेकिन तब आसमान साफ क्यों था।
कोर्ट ने उन कारणों को रोकने के लिए उठाए गए प्रभावी कदमों पर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी जो पराली जलाने से जुड़े हुए नहीं हैं।
प्रमुख प्रदूषक और आंकड़े: सुनवाई के दौरान कई प्रमुख बिंदुओं पर बात हुई
जस्टिस बागची ने कहा कि कंस्ट्रक्शन वर्क से होने वाला प्रदूषण भी एक प्रमुख प्रदूषक हो सकता है।
सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि राज्यों ने ‘जीरो स्टबल बर्निंग’ का लक्ष्य लिया था, लेकिन वे उसे हासिल नहीं कर पाए।
ASG ने 2016 और 2023 में हुई आईआईटी की स्टडीज का हवाला दिया, जो बताती हैं कि गाड़ियों से होने वाला एमिशन (उत्सर्जन) और इंडस्ट्रियल डस्ट अब भी प्रमुख प्रदूषक बने हुए हैं। ASG ने यह भी बताया कि पीएम 2.5 औद्योगिक क्षेत्रों में टॉक्सिक केमिकल्स से कोटेड होकर फेफड़ों में प्रवेश करता है।
लॉकडाउन का प्रभाव: सीपीसीबी (CPCB) की एक रिपोर्ट (Impact of Lockdown on Ambient Air Quality) के आंकड़ों के अनुसार, लॉकडाउन के पहले चरण 25 मार्च-3 मई 2020 तक में पीएम 2.5 का स्तर 38% तक कम हुआ था।
पीएम 10 का स्तर पहले चरण में 37% और दूसरे चरण में 30% तक कम हुआ था।
नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स से मेल खाने वाले दिनों की संख्या 2019 के 8 दिनों से बढ़कर 2020 में लॉकडाउन के दौरान 39 दिन हो गई थी।
एक अन्य स्टडी (जिसका शीर्षक है ‘Impact of the COVID-19 lockdown on air quality in Delhi Metropolitan Region’) भी बताती है कि लॉकडाउन के दौरान दिल्ली क्षेत्र में वायु प्रदूषण के कणों (पीएम 2.5 और पीएम 10) में कमी आई थी।
इस मामले में अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।
बीएलओ के कार्य और उत्पीड़न की कहानी
पॉडकास्ट के इस भाग में एसआईआर (SIR) के काम को लेकर बीएलओ को झेलनी पड़ने वाली समस्याओं पर एक ग्राउंड रिपोर्ट का जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट में मुख्य किरदार और बीएलओ मांगीलाल वर्मा पर केंद्रित है। उन्हें अपने काम में अपने सहायक कर्मचारियों जैसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और ग्राम पंचायत सचिव का सहयोग नहीं मिला। वर्मा ने जब उन्हें सहयोग के लिए फोन लगाया तो उन्होंने आकर मदद करने से साफ इनकार कर दिया।
सहयोग न मिलने के कारण, उन्हें मजबूरन 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों की मदद लेनी पड़ी। फार्म कलेक्ट करते समय उन्हें यह समस्या आई कि मतदाता अक्सर खेत पर होते हैं।
बीएलओ को 1200 मतदाताओं तक सीमित होना चाहिए, लेकिन मांगीलाल वर्मा को 1400 मतदाताओं की जिम्मेदारी दी गई थी। उनकी अतिरिक्त बीएलओ की मांग पूरी नहीं की गई।
उत्पीड़न और जांच: जब यह खबर प्रसारित हुई, तो गांव में तहसीलदार पहुंचे।
मांगीलाल वर्मा ने आरोप लगाया कि तहसीलदार ने उन पर एसआईआर के काम में पिछड़ने का आरोप लगाते हुए उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
मांगीलाल वर्मा द्वारा एसडीएम को शिकायत किए जाने पर, एसडीएम ने इस बात को स्वीकार किया कि बीएलओ उनके पास आए थे।
एसडीएम ने कहा कि पिछली बार उन्हें मदद दी गई थी, लेकिन इस बार हुई गलतियों को लेकर पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद, जो भी अग्रिम कार्रवाई होगी वह की जाएगी और मामला कलेक्टर के संज्ञान में लाया जाएगा।
यह था हमारा डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट। ग्राउंड रिपोर्ट में हम पर्यावरण से जुडी हुई महत्वपूर्ण खबरों को ग्राउंड जीरो से लेकर आते हैं। इस पॉडकास्ट, हमारी वेबसाईट और काम को लेकर आप क्या सोचते हैं यह हमें ज़रूर बताइए। आप shishiragrawl007@gmail.com पर मेल करके, या ट्विटर हैंडल @shishiragrawl पर संपर्क करके अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
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