100% मूंग की फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने को लेकर किसानों ने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में प्रदर्शन का आयोजन किया। विरोध के रूप में सोमवार, 27 जुलाई को ‘किसान क्रांति पदयात्रा’ का आयोजन संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किया गया। यात्रा नर्मदा नदी के किनारे सेठानी घाट से शुरू हुई। किसान यहां से बुधनी, बरखेड़ा और ओबेदुल्लागंज होते हुए भोपाल की ओर बढ़ रहे हैं।
यह किसान मुख्य रूप से मूंग की शत प्रतिशत फसल की खरीदी एमएसपी पर करने की मांग कर रहे हैं क्योंकि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की 100% फसल MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीदी जा सकती है। लेकिन मूंग जैसी अन्य फसलों की खरीद अनुमानित उत्पादन के सिर्फ 25% तक ही सीमित है।
इस साल मूंग का MSP ₹8,768 प्रति क्विंटल तय किया गया है। चूँकि सिर्फ एक-चौथाई (25%) फसल ही MSP पर खरीदी जा सकती है, इसलिए किसानों को बाकी 75% फसल खुले बाजार में बेचनी पड़ रही है। आंदोलन में शामिल नर्मदापुरम के किसान महेंद्र पाठक कहते हैं “हमें ₹6,000-7,000 प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। इस तरह किसानों को हर क्विंटल पर हजारों रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।”

मुख्यमंत्री आवास घेराव की योजना
पदयात्रा में मध्य प्रदेश के 19 किसान संगठन शामिल हैं, ये लोग भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की योजना बना रहे हैं।
यात्रा के पहले दिन पुलिस ने बुधनी क्षेत्र में पांच बैरिकेड लगाए थे, जिन्हें प्रदर्शनकारियों ने हटा दिया। नर्मदापुरम जिले की सीमा पर नर्मदा पुल के पास भी बैरिकेड लगाए गए थे। इसके बाद सेठानी घाट, इंदिरा चौक, भोपाल चौराहा और डोंगरवाड़ा में भी किसानों को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वे आगे बढ़ते रहे। किसान पूरी रात पैदल चलते रहे और 27 जुलाई की देर रात ओबेदुल्लागंज-बैतूल फोरलेन मार्ग से होते हुए बरखेड़ा पहुंचे।
क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के प्रदेश युवा अध्यक्ष अरुण पटेल ने कहा कि “अलग-अलग जिलों के किसान संगठन सेठानी घाट पर नर्मदा पूजा करने के बाद भोपाल के लिए रवाना हुए।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कई जिलों में संगठन के पदाधिकारियों को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया और कई किसानों के घरों के बाहर रातभर पुलिस तैनात रखी, ताकि वे यात्रा में शामिल न हो सकें।

क्या हैं किसानों की अन्य मांगें?
27 जुलाई को नर्मदापुरम में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद किसानों ने अपनी तीन प्रमुख मांगें बताईं। इसमें प्रमुख मांग मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीद एमएसपी पर करना, उर्वरक वितरण के मौजूदा ई-टोकन सिस्टम की जगह आधार आधारित व्यवस्था लागू करना और प्रतिदिन कम से कम 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराना शामिल है।
भारतीय किसान यूनियन के नर्मदापुरम जिला अध्यक्ष राजेश जाट ने बताया कि सरकार प्रत्येक किसान से केवल 1 क्विंटल 20 किलोग्राम मूंग ही खरीद रही है। जबकि प्रति एकड़ सामान्य उत्पादन 4-6 क्विंटल होता है। उनका कहना था कि बाकी फसल खुले बाजार में बेचने पर उन्हें लगभग ₹2,500 प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
नर्मदापुरम के किसान उत्कर्ष यादव, जो लगभग 22 से 23 एकड़ में खेती करते हैं, कहते हैं कि सीजन की शुरुआत में मूंग का पंजीयन इस भरोसे पर कराया गया था कि सरकार एमएसपी पर खरीद करेगी, लेकिन बाद में खरीद सीमित कर दी गई। मोफाड़े गांव के किसान महेंद्र पाठक, जो पिछले आठ से नौ वर्षों से 10 एकड़ में मूंग की खेती कर रहे हैं, कहते हैं कि कम अवधि वाली फसल होने के कारण यह उड़द जैसी दूसरी फसलों की तुलना में अधिक उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि खरीद विवाद के बावजूद वे आगे भी मूंग की खेती जारी रखेंगे क्योंकि दूसरी कोई भी फसल मूंग की तुलना में मौसम के लिहाज़ से बेहतर नहीं है।

राज्य और केंद्र के बीच टकराव
मध्य प्रदेश किसान कल्याण और कृषि विकास निदेशक उमाशंकर भार्गव ने ग्राउंड रिपोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से मूंग खरीद कोटा 25% से बढ़ाकर 40% करने को लेकर पत्र लिखा है।
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 21 मई 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह पत्र लिखा था जिसमें मूंग खरीदी की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। हालांकि चौहान ने इस पत्र के जवाब में कहा कि 16 जुलाई तक राज्य के लिए मंजूर 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीद कोटे में से सिर्फ 7,947 मीट्रिक टन (लगभग 2%) ही खरीदा गया है। इससे अब तक सिर्फ करीब 12,000 किसानों को ही फायदा मिला है।
केंद्र का कहना है, जब मौजूदा कोटा ही पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुआ, तो उसे बढ़ाने का सवाल ही नहीं उठता।
इधर आंदोलन में शामिल किसान नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव मिलने का समय नहीं दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री के साथ बातचीत नहीं हुई या उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे भोपाल में यातायात रोकेंगे। इसके अलावा उन्होंने ओबेदुल्लागंज से मिसरोद के बीच रेल यातायात भी बाधित करने की चेतावनी दी है।
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