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सरकार को नहीं पता कितने प्रतिशत पेट्रोल वाहन ई-20 तैयार

सरकार के ई-20 पर जवाब से लेकर मप्र में किसानों के प्रदर्शन तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

कचरे पर दिल्ली को इंदौर से सीखने की सलाह, ESAs के सीमांकन को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच गतिरोध जारी, पाकिस्तान में मानसूनी घटनाओं में 100 से ज्यादा मौत, मूंग खरीदी को लेकर किसानों का भोपाल मार्च। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


मुख्य सुर्खियां

दिल्ली के उपराज्यपाल ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे कचरे के सोर्स सेग्रीगेशन के लिए इंदौर के सफल मॉडल से प्रेरणा लें और एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करें। इसका मुख्य उद्देश्य डंप साइटों पर बिना छंटनी वाले कचरे को जाने को रोकना और शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाना है।


पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) के सीमांकन को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच जारी गतिरोध के कारण, विशेषज्ञ समिति का कार्यकाल एक और वर्ष के लिए जुलाई 2027 तक बढ़ा दिया गया है। फिलहाल छह राज्यों में फैली लगभग 56,825 वर्ग किमी भूमि को ESA के रूप में अधिसूचित करने के छठे मसौदे पर विचार चल रहा है।


पाकिस्तान में 26 जून से शुरू हुई मानसूनी बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या 100 के पार पहुंच गई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अधिकांश मौतें घरों और छतों के गिरने के कारण हुई हैं और आने वाले समय में और बारिश की चेतावनी दी गई है।


दिल्ली के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील ‘मॉर्फोलॉजिकल रिज’ में एक लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट द्वारा कथित पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और अवैध खुदाई की व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं। एक विशेष पैनल इस बात की जांच कर रहा है कि क्या निर्माण के दौरान रिज संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया गया या अनुमति से अधिक खुदाई की गई है।


मध्य प्रदेश में 100 प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग को लेकर भोपाल की ओर कूच कर रहे किसानों को नर्मदापुरम में पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया है। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई, क्योंकि किसान हर हाल में अपनी मांगों के लिए राजधानी पहुंचने पर अड़े हुए हैं।


भोपाल नगर निगम ने खुले में मेडिकल वेस्ट फेंकने वाले या उसे सामान्य कचरे में मिलाने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों पर सख्ती बढ़ा दी है, जिसके तहत अब 4.05 लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला जा सकता है। निगम का मानना है कि मेडिकल वेस्ट का गलत निस्तारण संक्रमण फैलाने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ पलाव जैन आपको बता रहे हैं ई-20 तैयार पेट्रोल वाहनों पर सरकार ने संसद में क्या कहा? 

ई-20 तैयार वाहनों का कोई आंकलन नहीं: केंद्र

सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि भारत में पेट्रोल से चलने वाले कितने वाहन E20 फ्यूल के लिए पूरी तरह तैयार हैं, इसका कोई आंकलन ही नहीं किया गया है। 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। यह ऐसे समय में दी गई है जब इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आपको बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी के बाद, E20 जनता पार्टी का हैंडल भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय है, जो E20 का विरोध कर रहा है। 

लोगों का आरोप रहा है कि इससे उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है और पुरानी गाड़ियों के इंजन के पार्ट्स जल्दी घिस जाते हैं, क्योंकि उनके इंजन ज़्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण के हिसाब से नहीं बनाए गए थे। 

कौन सी गाड़ियां हैं E20 कम्प्लायंट

ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, अप्रैल 2023 के बाद बनी और बेची गई पेट्रोल गाड़ियां पूरी तरह से E20-कम्प्लायंट मानी जाती हैं, क्योंकि भारत स्टेज 6 (BS6) फेज़ 2 एमिशन नॉर्म्स के तहत यह ज़रूरी कर दिया गया था। 

इसका मतलब है कि अभी मैन्युफैक्चरर्स जो भी गाड़ियां बेच रहे हैं, वे सभी E20 के नियमों के हिसाब से हैं, लेकिन 2023 से पहले बेची गई ज़्यादातर गाड़ियां ऐसी नहीं हैं। 

नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में पेट्रोल गाड़ी की तय उम्र 15 साल है, जिसका मतलब है कि मौजूदा नियमों के अनुसार 2022 में बनी कारें 2037 तक इस्तेमाल की जा सकती हैं। 

सरकार का पक्ष 

सरकार के अनुसार, E20 फ्यूल से पुरानी गाड़ियों (जिनके इंजन इस मिश्रण के लिए नहीं बने हैं) की फ्यूल इकॉनमी 3-5% तक कम हो सकती है, लेकिन शुद्ध पेट्रोल और कम इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रणों की तुलना में यह ज़्यादा साफ़ है और परफ़ॉर्मेंस के दूसरे मामलों में बेहतर है। 

जैसे ज़्यादा ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक, तेज़ी से जलना, बेहतर पिकअप, स्मूद एक्सेलरेशन और इंजन का साफ़ चलना। 

सरकार ने उन दावों को भी लगातार नकारा है कि E20 फ्यूल से इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं। 

लोगों की मांग रही है कि गाड़ी चलाने वालों को शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 फ्यूल चुनने का विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा है, जैसा कि कुछ देशों में होता है?

तो इस पर सरकार का कहना है कि पेंट्रोल पंपों पर कम इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण और शुद्ध पेट्रोल अलग अलग उपलब्ध कराने की कोई योजना नहीं है। इसमें लॉजिस्टिक समस्या आ सकती है। 

भारत में कब शुरू हुई इथेनॉल ब्लेंडिंग?

हम अपने श्रोताओं को भारत में पेंट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की टाईमलाईन बता देना चाहता हूं। e20 पेट्रोल का मतलब वो पेट्रोल जिसमें 80% शुद्ध पेट्रोल होता है और 20 पर्सेंट इथेनॉल मिलाया जाता है जो गन्ना, मक्का, धान और फसल अवशेषों से भारत में बनाया जा रहा है। 

इथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। इसका इस्तेमाल दुनिया भर में एक सदी से भी अधिक समय से हो रहा है, और ब्राजील जैसे देश दशकों से उच्च इथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं। भारत में, इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी, 2006 में E5 पेश किया गया था। हालांकि 2013-14 तक 1.5 %  ब्लेंडिंग ही हो रही थी।  

जरूरी उत्पादन क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के बाद इसे धीर धीरे बढ़ाया गया। यह 2021-22 में बढ़कर 10% और 2025-26 में 20% पर आया है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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