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होर्मुज स्ट्रेट से निकले जहाज, क्या खरीफ सीजन में खाद का संकट टल गया?

मुंबई की बारिश से लेकर मध्य प्रदेश की मूंग खरीद तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

मुंबई में भारी बारिश से अस्त-व्यस्त जीवन, भारत में तांबे का संकट, चाय बागान श्रमिकों के लिए ₹313.30 करोड़, मप्र की मूंग ख़रीदी बढ़ाने की मांग। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


मुख्य सुर्खियां

मुंबई में 24 घंटे के भीतर 12 इंच बारिश दर्ज की गई, जिससे स्कूल-कॉलेज बंद रहे और उड़ानों पर बुरा असर पड़ा। दूसरी ओर, दिल्ली ने 38.6 डिग्री सेल्सियस के साथ पिछले 2 साल का सबसे गर्म जुलाई का दिन दर्ज किया, जहां अब बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।


लगातार हो रही तेज बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए पुणे–मुंबई एक्सप्रेसवे और पुराने मुंबई–पुणे हाईवे पर यातायात अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजना शुरू किया है और यात्रियों से मौसम सामान्य होने तक सतर्क रहने की अपील की है।


अंतरराष्ट्रीय कॉपर एसोसिएशन इंडिया के अनुसार, भारत को बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हर पांच साल में 5 लाख टन अतिरिक्त तांबा शोधन क्षमता जोड़ने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में बुनियादी ढांचे और स्वच्छ ऊर्जा के कारण तांबे की खपत 9% तक बढ़ सकती है, जो मौजूदा आपूर्ति से कहीं अधिक है।


पश्चिम बंगाल और असम के 10 लाख से अधिक चाय बागान श्रमिकों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार ने ₹313.30 करोड़ के पैकेज को लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत ₹177 करोड़ शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ₹72 करोड़ स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर खर्च किए जाएंगे।


मध्य प्रदेश में अगले सप्ताह मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना है, जिससे भोपाल सहित कई जिलों में तीन दिनों तक अच्छी बारिश हो सकती है। फिलहाल मानसून का दबाव ओडिशा की ओर बढ़ रहा है, जिससे प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ‘येलो’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किए गए हैं।


मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मूंग खरीदी का कोटा उत्पादन का 25% से बढ़ाकर 40% (लगभग 8.06 लाख मीट्रिक टन) करने का आग्रह किया है। किसानों का कहना है कि वर्तमान सीमा कम होने के कारण उन्हें अपनी फसल कम दामों पर खुले बाजार में बेचनी पड़ रही है।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट से जानिए स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में कैसे हैं हालात और खरीफ के सीजन में खाद के संकट से कितनी राहत। 

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज का संकट और भारत में खाद आपूर्ति 

भारत में उर्वरक आपूर्ति की स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार देखा जा रहा है, जो चालू खरीफ बुवाई सीजन के दौरान किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था। केंद्र सरकार ने पुष्टि की है कि उर्वरक और कच्चा माल लेकर आ रहे 15 जहाज सुरक्षित रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुके हैं और भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। ये जहाज यूरिया, डीएपी (DAP) और सल्फेट जैसी आवश्यक सामग्री लेकर आ रहे हैं।

रणनीतिक स्रोत और कूटनीतिक प्रयास

मध्य एशिया में संघर्षों के कारण समुद्री व्यापार में उत्पन्न बाधाओं के बावजूद, सरकार ने उर्वरक की कमी को रोकने के लिए व्यापक कूटनीतिक प्रयास किए हैं। रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा के निर्देशन में, भारत ने वैश्विक भागीदारों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की है:

यूरिया: ओमान, रूस, अल्जीरिया, नाइजीरिया और मलेशिया से प्राप्त किया गया है।

डीएपी और अन्य उर्वरक: मोरक्को, जॉर्डन, सऊदी अरब, अमेरिका और रूस से मंगाए गए हैं।

घरेलू उत्पादन और उपलब्धता

आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है:

वर्तमान स्टॉक: देश में वर्तमान में यूरिया, डीएपी, एमओपी (MOP) और अन्य आवश्यक उर्वरकों का 16 मिलियन टन से अधिक का भंडार है।

खरीफ की आवश्यकताएं: इस सीजन के लिए कुल मांग 38 मिलियन टन होने का अनुमान है, जिसमें से लगभग 20 मिलियन टन (आधे से अधिक) की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है।

उत्पादन में वृद्धि: अप्रैल से जून के बीच यूरिया का उत्पादन 7 मिलियन टन से अधिक रहा। गैस आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से डीएपी का उत्पादन भी अनुमान से बेहतर बताया गया है।

भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियां

स्रोतों के अनुसार, सकारात्मक आपूर्ति के बावजूद कुछ बाहरी दबाव बने हुए हैं:

बढ़ती लागत: भू-राजनीतिक तनाव के कारण शिपिंग और परिवहन खर्च में वृद्धि हुई है।

बीमा जोखिम: हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को अब अक्सर ‘वॉर रिस्क इंश्योरेंस’ (War Risk Insurance) लेना पड़ता है, जिससे खरीद प्रक्रिया पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।

वैश्विक बाजार पर प्रभाव: वैश्विक स्तर पर गैसोलीन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक मुद्दों का असर अब व्यापार और परिवहन पर दिखाई दे रहा है।

खरीफ सीजन के लिए महत्व

इन खेपों का समय पर पहुंचना इस वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि कई राज्यों में मानसून की रफ्तार सुस्त रही है, जिससे बुवाई में देरी हुई है। सरकार को उम्मीद है कि उर्वरक की उपलब्धता में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी, जिससे बुवाई का सीजन प्रभावित होने से बच जाएगा।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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