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नरवर के तालाबों पर कंक्रीट का कब्‍जा, राजा नल की विरासत का दम घोंटता रसूख

शिवपुरी के नरवर का एक तालाब जो अब एनक्रोचमेंट की ज़द में है
शिवपुरी के नरवर का एक तालाब जो अब एनक्रोचमेंट की ज़द में है

शिवपुरी की ऐतिहासि‍क तहसील नरवर इन दिनों एक गंभीर विवाद के केंद्र में है। यह विवाद यहां के पुराने तालाबाें और जलस्रोतों पर हो र‍हे कथि‍त कब्‍जों और निर्माण कार्य से जुड़ा हुआ है। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल (NGT) ने 2 अप्रैल 2026 को कलेक्‍टर शिवपुरी पर 10,000 रूपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना इसलिए लगा क्‍योंकि कलेक्‍टर द्वारा दो साल बाद भी तालाब पर अतिक्रमण चिहिंत नहीं कर पाए। जबकि रसूखदारों की इमारतें जल संरचनाओं के सीने पर खड़ी हाे चुकी है। इस मामले में अगली सुनवाई 20 मई 2026 को होगी। 

प्‍यास की ओर बढ़ता नरवर?

नरवर के तालाबों के आसपास कंक्रीटीकरण, फोटो विशेष प्रबंध
नरवर के तालाबों के आसपास कंक्रीटीकरण, फोटो विशेष प्रबंध

नरवर को ऐतिहासिक रूप से राजा नल की नगरी माना जाता है। नरवर किले के आसपास तालाबों और विशाल खाई (canal system) का एक ऐसा सिस्‍टम था। जोकि पत्‍थरों से पानी निकलने वाली इंजीनियरिंग की मिसाल है। यह तालाब और खाई बारिश के पानी को  सहेजकर जमीन के अंदर पहुंचाता था। इससे पूरे इलाके में कुएं, हैंडपंप और ट्यूबवेल सालभर चलते थे। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्र‍िब्‍यूनल (NGT) में 23 जुलाई 2024 को याचिका दायर हुई थी। 

याचिकाकर्ता देवेंद्र चौरसिया के अनुसार, माफियाओं ने इस तंत्र को मिट्टी से पाटकर उस पर दुकानें, पेट्रोल पंप खड़े किए दिए हैं। 

चौरसिया आगे कहते हैं, ” यदि यह अतिक्रमण नहीं हटा, तो भविष्‍य में नरवर के 36 कुएं और 60 से ज्‍यादा हैंडपंप हमेशा के लिए सूख जाएंगे।” उनके मुताबिक यह विवाद केवल जमीन का नहीं है, बल्कि य‍ह नरवर के हजारों नागरिकों के जीने के अधिकार पर हमला है। 

इस केस की पेरवी कर रहे वकील अभय जैन के अनुसार, ट्रि‍ब्‍यूनल ने प्रशासन को तालाबों का सीमांकन और वास्‍तविक स्थिति की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। लेकिन दो साल बाद भी रिपोर्ट पेश नहीं की गई। 

इस पर ट्रिब्‍यूनल की बेंच, जिसमें न्‍यायमूर्ति पुष्‍पा सत्‍यनारायण शामिल हैं, ने शिवपुरी कलेक्‍टर पर 10 हजार रूपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही यह भी कहा कि जब तक जुर्माना राशि जमा नहीं कराई जाती है तब कलेक्‍टर का कोई भी जवाब मान्‍य नहीं होगा। 

जलस्रोतों पर रिजॉर्ट, पेट्रोल पंप और व्‍यावसायिक कब्‍जे 

नरवर के जल निकायों जमीनी स्‍थ‍िति बेहर खराब है। अदालती दस्‍तावेजों और राजस्‍व रिकॉर्ड की पड़ताल यहां संगठित कब्‍जों की तस्‍वीर सामने आती है। 

नरवर के सबसे चर्चित लखना और दुहाई तालाब को संरक्षित आद्रभूमि का दर्ज प्राप्‍त है। नियमों के मुताबिक ऐसे तालाबों के 50 मीटर के घेरे में कोई पक्‍का निर्माण नहीं हो सकता है। इसके बावजूद लखना तालाब (सर्वे नंबर 136) के अंदर 7 कमरों का रिजॉर्ट बना दिया गया है। यह रिजॉर्ट गोविंद महेश्‍वरी (सर्वे नंबर 124 के मालिक) द्वारा कराया गया है। स्‍थानीय निवासी और याचिकाकर्ता के अनुसार, गोविंद का सीधा संबंध नगर परिषद, नरवर की वर्तमान अध्‍यक्ष पद्मा संदीप महेश्‍वरी (भाजपा) के परिवार से है। 

वही दुहाई तालाब की संरक्षित आद्रभूमि है, इसके बाद भी यहां पर सत्‍यपाल सिंह द्वारा अवैध रूप से पेट्रोल पंप और व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठान खड़े कर लिए गए है। जबकि 1960 से 1965 के राजस्‍व रिकॉर्ड के अनुसार इस तालाब सिंघाड़े की खेती होती थी। 

हालांकि नरवर किले की सुरक्षा दीवार से सटी ऐतिहासिक खाई (नहर तंत्र) पर भी मलबे से पाटकर सुनील महेश्‍वरी ने मॉल और पेट्रोल पंप का निर्माण किया है। वहीं इन आरोपों की आधिकारिक जांच अभी भी जारी है। 

राजस्‍व रिकॉर्ड और शिकायतों के आधार पर नरवर के जल निकायों की वर्तमान स्थिति : 

जल निकाय का नाम सर्वे नंबरवर्तमान स्थित‍ि और कब्‍जा कब्‍जाधारी 
लखना तालाब136तालाब के अंदर रिजॉर्ट का निर्माणगोविंद माहेश्वरी 
दुहाई तालाब1960/1/2मिट्टी भरकर पेट्रोल पंप और मॉल का निर्माण सत्‍यपाल सिंह व अन्‍य
ऐतिहासिक खाई (नहर तंत्र)1796नहर को पाटकर पेट्रोल पंप व दुकानें निर्मित सुनील माहेश्वरी 
नया तालाब1955व्‍यावसायिक निर्माण और दुकानेंस्‍थानीय रसूखदार
राजस्‍व जल क्षेत्र1958नगर परिषद ने खुद बनवाई दुकानेंनगर परिषद, नरवर 

क्‍या कहता है हेल्‍थ कार्ड

सिर्फ कब्‍जा नहीं, बल्कि जाे पानी बचा है। वो भी अब जहर बनता जा रहा है। मध्‍य प्रदेश राज्‍य वेटलैंड अथॉरिटी ने लखना तालाब का इकोसिस्‍टम हेल्‍थ कार्ड 2020-21 तैयार किया गया था। इसका मुख्‍य उद्देश्‍य वेटलैंड्स ऑफ इंडिया पोर्टल के तहत नरवर के महत्‍वपूर्ण जल निकाय की वास्‍तविक स्थिति का आकलन करना था। इस जांच रिपोर्ट में लखना तालाब के पानी को डी ग्रेड (अति खराब) बताया है। वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, तालाब के पानी में ऑक्‍सीजन की भारी कमी (BOD 6.40 mg/l, जबकि वांछित सीमा 3 mg/l है) हो गई है। रिपोर्ट बताती है कि 30 प्रतिशत तालाब हानिकारक वनस्‍पातियों से भर चुका है और इसमें नगर का सीवेज सीधे बहाया जा रहा है। 

अब आगे क्‍या ?

नरवर का जल-तंत्र एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। तालाब, खाई और कुएं मिलकर पानी का संतुलन बनाए रखते हैं। जब इनमें से एक किसी भी एक हिस्‍से को नुकसान पहुंचता है, तो पूरा सिस्‍टम प्रभावित होता है। यही कारण है कि इस विवाद को केवल अतिक्रमण नहीं, बल्कि एक बड़े पर्यावरणीय संकट के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई 20 मई 2026 को तय है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन क्‍या कदम उठाता है। क्‍या अवैध निर्माणों पर कार्रवाई होगी या मामला लंबा खिंचता रहेगा। यह आने वाला समय तय करेगा। 

(नोट: इस मामले में शिवपुरी कलेक्‍टर से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई। उन्‍होंने फोन नहीं उठाया है। मेल किया गया उनका जवाब आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।)

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  • Based in Bhopal, this independent rural journalist traverses India, immersing himself in tribal and rural communities. His reporting spans the intersections of health, climate, agriculture, and gender in rural India, offering authentic perspectives on pressing issues affecting these often-overlooked regions.

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