Skip to content

“आधा दूध ही बिक रहा है” सिलेंडर के अभाव में डेयरी को होता नुकसान

Video Production: Rajeev Tyagi | Camera Yuvraj Singh Chouhan

इंदौर, मध्य प्रदेश | महू तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव हरसोला के सावन हरोड़ का मुख्य पेशा दुग्ध उत्पादन है। सावन के पास 40 से 45 भैंस और 20-25 गाय हैं। पशुपालन में लगे उनके दो मज़दूर बिहार स्थित अपने गांव लौट गए हैं। वजह: खाना पकाने के लिए सिलेंडर का न मिल पाना। 

मजदूरों की कमी से काम बढ़ गया है, मेहनत दोगुनी हो गयी है मगर शहर में जाने वाले दूध की मात्रा आधा ही रह गई है। सावन बताते हैं,

“यह काम मेरे पर-दादा ने शुरू किया। मैं चौथी पीढ़ी हूं। डेयरी फार्म में मुनाफा पहले ही बहुत कम है। सिलेंडर की कमी ने इसे और मुश्किल कर दिया है।” 

वे बताते हैं कि उनके पास हर दिन लगभग 1000 लीटर दूध जमा होता है। इसमें लगभग 600 लीटर उनके खुद के फ़ार्म से निकलता है वहीं उनसे जुड़े अन्य किसानों से 300-400 लीटर और जमा हो जाता है। इसमें से बंदी का या कच्चा दूध तो बिक जाता है। लेकिन जो व्यापारी शहर में मिठाई, पनीर, और मावा के लिए दूध लेते थे, उन्होनें अब दूध लेना बंद कर दिया है। 

इन व्यापारियों को वो भैंस का दूध 55 रूपए प्रति लीटर और गाय का 40 रूपए प्रति लीटर के हिसाब से बेचते थे। यही उनकी कमाई का मुख्य हिस्सा था। मगर उन्हें 10 से 15 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दूध पाउडर बनाने वालों को यह बेचना पड़ रहा है।

सावन के पास जर्सी और एचएफ (होल्स्टीन फ्राइज़ियन) गाय हैं। वह समझाते हैं कि खली, चापड़, भूसा और लेबर की कीमत मिला कर प्रति पशु का एक दिन का खर्च करीब 450 रूपए आता है। खर्च अब भी वही है, कमाई कम हो गई है। 

मिठाई बनाने का काम पड़ा ठप

खाली पड़ी जलेबी की कढ़ाई, फोटो चंद्रप्रताप तिवारी, भोपाल
खाली पड़ी जलेबी की कढ़ाई, फोटो चंद्रप्रताप तिवारी, भोपाल

कई दिनों से शहर की जानी-पहचानी और अनजानी खानपान की दुकानों में चहल-पहल कम है। कुछ दुकानों में जहां व्यंजनों की छटनी हुई है, तो कहीं-कहीं दुकानें तक बंद हो गई हैं। कमर्शियल सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। छूट-पुट चाय, समोसा और कचौरी की दुकानें जगह-जगह बंद हैं। 

कमर्शियल सिलेंडर ना मिलने पर दुकानदार घरेलु सिलेंडर उपयोग करने लगे लेकिन प्रशासन ने सख्ती अपनाते हुए इन्हें जब्त करना शुरू कर दिया। 17 मार्च तक प्रदेश भर में 1341 जगहों पर कार्रवाई करते हुए 1827 सिलेंडर जप्त किए हैं। दूसरी ओर सिगड़ी और इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में इजाफा होने लगा है। ऐसा करते-करते दस-बारह दिन हो गए, लेकिन नज़दीकी हल किसी को नज़र नहीं आ रहा। 

मिठाई के कढ़ाव-काउंटर खाली

इंदौर दुग्ध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भारत मथुरावाला बताते हैं कि इंदौर शहर में रोज़ाना लगभग पंद्रह लाख लीटर दूध आता है। इसमें से पांच लाख लीटर दूध का उपयोग मावा, पनीर, मिठाई और अन्य सामग्री तैयार करने में होता है। आठ से नौ लाख लीटर दूध घरेलू एवं कच्चे इस्तेमाल से जुड़ा है। 

अब मिठाइयों की दुकान में कटौती होने से रोज़ाना के पाँच लाख लीटर दूध की खपत कम हो गई है।

मथुरावाला कहते हैं,

“हम दूध उत्पादकों से दूध नहीं ले पा रहे हैं। मैं मिठाई तैयार करता हूं लेकिन आज हमारे कढ़ाव और कई काउंटर खाली हैं। बंगाली मिठाई नहीं बन पा रही है। त्यौहार के समय डिमांड ज़्यादा रहती है, लेकिन हमारा व्यवसाय फिलहाल चालीस फीसद गिर गया है।” 

वह बताते हैं कि जिन भट्टियों में मिठाई बनाते थे, सिलेंडर न मिलने के कारण बंद पड़ी हुई हैं।

विकल्पों की स्थिति

LPG Crisis in India
एलपीजी सिलेंडर ले जाते कुछ युवक, फोटो चंद्रप्रताप तिवारी, भोपाल

केंद्र सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 17 मार्च को कॉमर्शियल एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) अपनाने का सुझाव दिया। 

मगर मथुरावाला कहते हैं कि इंदौर शहर में हर जगह पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की सुविधा नहीं है। ऐसे में जिनके पास डीजल भट्टी है, वो उसका थोड़ा उपयोग कर पा रहे हैं। बाजार में डीजल भट्टी की ओवरबुकिंग है, लेकिन सरकार द्वारा इसके उपयोग पर पहले से लगाम है।    

आधिकारिक बयान में कहा गया कि सरकार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क को बढ़ा रही है। केंद्र ने राज्यों सरकारों से रिक्वेस्ट की है कि वे मंज़ूरी में तेज़ी लाएं और सीजीडी पाइपलाइन बिछाने के लिए पेंडिंग एप्लीकेशन के लिए डीम्ड परमिशन जारी करें, रोड रेस्टोरेशन और परमिशन चार्ज माफ़ करें, काम करने के हालात में ढील दें और तेज़ी से रोलआउट में मदद के लिए नोडल ऑफिसर अपॉइंट करें।

प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए भारत उन जहाज़ों पर निर्भर रहता है जो पश्चिमी एशिया के संकरे समुद्र मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ से होते हुए आते हैं। यह मार्ग ईरान द्वारा तब से बंद किए गए हैं जबसे अमरीका और इजरायल ने ईरान पर फरवरी 28 को सैन्य हमले की शुरुआत की। हालांकि, गत सोलह और सत्रह मार्च को भारतीय नौवहन निगम के दो जहाज़ – शिवालिक और नंदा देवी – कुल 92,700 मीट्रिक टन कुकिंग गैस लेकर भारत पहुंचे। 

लकड़ी भी हल नहीं 

पशुपालक अपने मवेशियों को चारा खिलाते हुए, फोटो राजीव त्यागी, पेंच, मध्य प्रदेश
पशुपालक अपने मवेशियों को चारा खिलाते हुए, फोटो राजीव त्यागी, पेंच, मध्य प्रदेश

इंदौर में दूध व्यापार के साथ-साथ कैटरिंग, टिफ़िन सेंटर, क्लाउड किचन और संबंधित व्यवसायों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। यह नुकसान ऐसे वक़्त आया जब बाजार ईद, नवरात्रि, गुड़ी-पाड़वा और गणगौर जैसे त्यौहार की तैयारी में व्यस्त था। ग्राम उंडेल के किसान और दूध व्यापारी नीलेश चौधरी कहते हैं,

“पहले सुबह-शाम, हमारी दूध गाड़ी दो टाइम इंदौर आती, लेकिन अब केवल आधा दूध ही बिक रहा है। गांव में मावा या घी बनाने का कोई साधन नहीं होता। लकड़ी एक-दो दिन आप जला सकते हो लेकिन वो हल नहीं है।”

चिखली ग्राम के हेमराज चांदेल के पास लगभग नब्बे गाय-भैंस हैं। उन्हें करीब एक लाख का नुकसान हो चुका है। 

वह कहते हैं, “किसान के पास कोई विकल्प नहीं है। सांची या सोसाइटी में ग्राहक बंधे हुए होते हैं और दूध खरीदने की उनकी एक सीमा होती है। जिस किसान का खाता होता है, वो बेच पाता है, लेकिन यह व्यवस्था सभी के लिए नहीं है। किसान खुद से मावा और घी का उत्पादन नहीं कर सकता, करता भी है तो उसमें मुनाफा नहीं है।”

भारत में कुल 60 फीसद एलपीजी (लिक्विफाईड पेट्रोलियम गैस) का आयात होता है। इसमें से नब्बे फीसद एलपीजी ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ से गुज़रती है। सरकार ने रिफाइनरी उद्योग को एलपीजी उत्पादन में बढ़ोत्तरी के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्र ने शनिवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खास तौर पर रेस्टोरेंट, ढाबों, होटलों, इंडस्ट्रियल कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी सेक्टर के लिए कमर्शियल LPG का एक्स्ट्रा 20% अलॉटमेंट मंज़ूर किया है। 


भारत में स्वतंत्र पर्यावरण पत्रकारिता को जारी रखने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट को आर्थिक सहयोग करें।


अन्य वीडियो रिपोर्ट्स

Commercial LPG Halt Squeezes Street Vendors, Hostels in Bhopal

A Couple in Khargone Experiments with Organic Turmeric Farming


पर्यावरण से जुड़ी खबरों के लिए आप ग्राउंड रिपोर्ट को फेसबुकट्विटरइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सएप पर फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हमारा साप्ताहिक न्यूज़लेटर अपने ईमेल पर पाना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें। 

Author

  • Pranay is an Indore-based journalist and filmmaker whose lenses are always in search of How Ought We Live. At present, he is working with an organisation called HOWL. All his labour burns to invent the ideal love and science of joy, to realise the joy of living. In the endeavour, he is as well an activist, a music lover, a worker, and many more to be...

    View all posts

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins