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पदयात्रा से पहले अमित भटनागर गिरफ्तार, केन-बेतवा संघर्ष तेज

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सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को 8 मई को पन्ना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी उस प्रस्तावित मार्च से कुछ घंटे पहले हुई, जिसे ‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले निकाला जाना था। इस मार्च का उद्देश्य केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासी परिवारों के लिए पुनर्वास, उचित मुआवजा और पानी के अधिकार की मांग उठाना था। कार्यकर्ताओं और आंदोलन में शामिल लोगों का कहना है कि पुलिस ने आधी रात में कार्रवाई की ताकि आंदोलन को बढ़ने से रोका जा सके।

amit bhatnagar protest against ken betwa link project
बुंदेलखंड के सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित गांवों के लिए मुआवजा, पारदर्शी सर्वे और ग्राम सभा अधिकारों की मांग को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे हैं।

अमित भटनागर बुंदेलखंड के सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो केन-बेतवा लिंक परियोजना की पर्यावरणीय और मानवीय कीमत को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। उन्होंने प्रभावित गांवों के लिए उचित मुआवजा, पारदर्शी सर्वे और ग्राम सभा के अधिकारों की मांग को लेकर कई आंदोलनों का नेतृत्व किया है। 

गिरफ्तारी के तुरंत बाद फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट में भटनागर ने लिखा कि उन्हें कुपिया से बिजावर थाना प्रभारी ने गिरफ्तार किया और पन्ना ले जाया जा रहा है। उन्होंने लिखा, “मुझे जेल में सड़ा दो, फांसी पर लटका दो, लेकिन आंदोलन कमजोर मत होने देना। मुझे अपने जल, जंगल, जमीन, हजारों लोगों की जिंदगी, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल जाने पर गर्व है।” उन्होंने बिजावर के वार्ड क्र. 9 से पार्षद दिव्या अहिरवार और गांव स्तर की संघर्ष समितियों का नाम लेते हुए कहा कि उनकी गैरमौजूदगी में वही आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।

गिरफ्तारी के बाद परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन रुकेगा नहीं। उनका कहना है कि अब इससे भी बड़ा और तेज आंदोलन होगा।

केन-बेतवा लिंक परियोजना क्या है?

केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत की पहली अंतर-नदी जोड़ परियोजना है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की कमी को दूर करने के लिए केन नदी का पानी बेतवा नदी में पहुंचाना है। इसके पहले चरण में पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर दौधन बांध का निर्माण शामिल है।

केन-बेतवा भारत की पहली नदी जोड़ परियोजना है, जिसके तहत पन्ना टाइगर रिजर्व में दौधन बांध बनाया जा रहा है।

जब बांध अपनी पूरी जलभराव क्षमता 288 मीटर तक भर जाएगा, तब कुल 9,000 हेक्टेयर जमीन पानी में डूब जाएगी। इसमें 5,258 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है और 10 गांव सीधे तौर पर डूब जाएंगे। 

गौरतलब है कि दौधन बांध के अलावा दो अन्य सिंचाई परियोजनाएं भी विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी हुई हैं। मझगाय  मध्यम सिंचाई परियोजना से आठ गांव प्रभावित होंगे और 1,696 परिवारों में से 999 परिवार विस्थापित होंगे। वहीं पन्ना जिले की अजयगढ़ तहसील की रुंझ नदी परियोजना से विश्रामगंज और भुजबई गांव प्रभावित होंगे और आरामगंज के 219 परिवारों पर असर पड़ेगा।

आंदोलन कैसे बढ़ता गया

6-8 फरवरी: दौधन और पलकोहा गांव की महिलाओं ने मुआवजे की राशि और सर्वे में गड़बड़ियों को लेकर दौधन बांध निर्माण स्थल पर प्रदर्शन किया। अमित भटनागर भी इसमें शामिल हुए और फेसबुक लाइव के जरिये प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया।

8 फरवरी: प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से एक महीने का समय मांगा और नए सर्वे का वादा किया।

9 फरवरी: प्रशासन के आश्वासन के एक दिन बाद भटनागर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 191 के तहत गैरकानूनी जमावड़े के आरोप में हिरासत में लिया गया।

10 फरवरी: दौधन और पलकोहा के ग्रामीणों ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर बिजावर तहसील कार्यालय का घेराव किया। पुलिस ने करीब 1,000 लोगों की भीड़ पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिसमें छोटे बच्चों के साथ महिलाएं भी थीं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसके बाद लाठीचार्ज भी हुआ। 

12 फरवरी: भटनागर रिहा हुए। उन्होंने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर सभी एफआईआर की प्रमाणित कॉपी और तहसील कार्यालय व मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की।

11-12 मार्च: हजारों किसान और आदिवासी निवासी जय किसान संगठन के बैनर तले सतना नाका से पन्ना कलेक्ट्रेट तक मार्च करते हुए पहुंचे। दूसरे दिन प्रशासन ने बीएनएसएस की धारा 163 लागू कर दी। झड़पें हुईं और लाठीचार्ज भी हुआ। शाम तक प्रशासन ने लिखित में भरोसा दिया कि पांच दिन के भीतर भूमि अधिग्रहण आदेश, ग्राम सभा रिकॉर्ड और मुआवजे से जुड़े दस्तावेज दिए जाएंगे। भटनागर ने कहा कि आंदोलन स्थगित किया गया है, वापस नहीं लिया गया।

Amit Bhatnagar at protest in Panna
केन-बेतवा लिंक और सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में अपने समर्थकों के साथ अमित भटनागर।

19 मार्च: प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बैठक हुई। अधिकारियों ने भरोसा दिया कि परियोजना की सहमति से जुड़े ग्राम सभा दस्तावेज जल्द गांव वालों को दिए जाएंगे।

5 अप्रैल: बार-बार पत्राचार के बावजूद कोई दस्तावेज नहीं मिलने पर जय किसान संगठन ने दिल्ली मार्च का फैसला किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें जाने से रोक दिया गया। इसके बाद वे सटई तहसील में दौधन बांध स्थल के पास धरने पर बैठ गए।

6 अप्रैल: छतरपुर कलेक्टर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर पांच से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी और दूसरे जिलों के लोगों के आने पर भी प्रतिबंध लगाया।

7-15 अप्रैल: प्रदर्शन और तेज हो गया। इसमें प्रतीकात्मक चिता आंदोलन, नदी में खड़े होकर जल सत्याग्रह और 15 अप्रैल को प्रतीकात्मक फांसी प्रदर्शन शामिल रहे। भूख हड़ताल छतरपुर के सभी प्रभावित गांवों तक फैल गई।

chita andolan chhatarpur ken betwa link
आंदोलन तेज होते हुए चिता आंदोलन, जल सत्याग्रह, प्रतीकात्मक फांसी प्रदर्शन और भूख हड़ताल तक पहुंच गया।

12 अप्रैल: पन्ना और अजयगढ़ के एसडीएम समेत जल संसाधन विभाग के अधिकारी प्रदर्शन स्थल पहुंचे और गांव स्तर पर शिकायतों के समाधान का भरोसा दिया।

15 अप्रैल: छतरपुर कलेक्टर ने 14 प्रभावित गांवों में मुआवजा गड़बड़ी और पुनर्वास आवेदनों की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाए और सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।

16 अप्रैल: रुंझ बांध निर्माण स्थल पर चौथे दिन भी काम बंद रहा क्योंकि आदिवासी महिलाएं और किसान आंदोलन जारी रखे हुए थे। इससे पहले 15 अप्रैल को अधिकारियों के नए सर्वे के आश्वासन के बाद आंदोलन अस्थायी रूप से रोका गया था।

22 अप्रैल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मध्य प्रदेश कैबिनेट बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण मुआवजे के गुणक को 1.0 से बढ़ाकर 2.0 करने का फैसला लिया गया। इसका मतलब है कि अब किसानों को अधिग्रहित कृषि भूमि का बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा मिलेगा, जबकि पहले यह दो गुना था। यह फैसला राज्य की सभी ग्रामीण भूमि अधिग्रहण परियोजनाओं पर लागू होगा।

28 अप्रैल: सात दिन की समयसीमा के बावजूद विश्रामगंज गांव में कोई सर्वे शुरू नहीं हुआ। कोई अधिकारी भी नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में फिर नाराजगी बढ़ी। 29 अप्रैल से आदिवासी महिलाओं ने निर्माण स्थल पर फिर प्रदर्शन शुरू कर दिया और काम पूरी तरह बंद हो गया। विश्रामगंज में हुई विशेष ग्राम सभा में परियोजना का सर्वसम्मति से विरोध किया गया और निर्माण को अवैध बताया गया। ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई और जरूरी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।

4 मई: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राज्य सरकार ने मझगाय  और रुंझ मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के विस्थापन, भूमि अधिग्रहण और संपत्ति से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए राज्य स्तरीय समिति बनाने की घोषणा की है। इसकी अध्यक्षता सागर संभाग के आयुक्त को दी गई और दो मुख्य अभियंताओं को सदस्य बनाया गया। समिति को पांच दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया।

8 मई: न्याय अधिकार पदयात्रा शुरू होने से एक रात पहले पन्ना पुलिस ने अमित भटनागर को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने हिरासत से फेसबुक पोस्ट कर बताया कि बिजावर थाना प्रभारी उन्हें कुपिया से गिरफ्तार कर पन्ना कोतवाली ले जा रहे हैं।

ग्रामीण क्या मांग कर रहे हैं?

प्रदर्शन के केंद्र में कई अहम मांगें हैं। दौधन के ग्रामीण हर परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। अभी तक 363 प्रभावित परिवारों को 12.5 लाख रुपये प्रति परिवार दिए गए हैं और कुल 46.5 करोड़ रुपये बांटे गए हैं। 

वहीं मध्य प्रदेश जनसम्पर्क में उपलब्ध जानकरी के अनुसार, मझगाय  परियोजना के तहत 191 करोड़ 86 लाख रुपये मुआवजा 1,657 भू-स्वामियों में बांटा गया है, जबकि 660 परिवारों को 5 लाख रुपये की एकमुश्त पुनर्वास राशि मिली है। रुंझ परियोजना के लिए 44 करोड़ 23 लाख रुपये मंजूर हुए, जिनमें से 43 करोड़ 86 लाख रुपये वितरित किए जा चुके हैं। 36 लाख 95 हजार रुपये अभी लंबित हैं। यहां 5 अक्टूबर 2018 की कट-ऑफ तारीख के आधार पर 670 परिवारों की पहचान की गई और सभी पात्र परिवारों को 5 लाख रुपये पुनर्वास सहायता दी गई।

ग्रामीणों की मांग है कि परिवार के सभी वयस्क सदस्यों, जिनमें बेटियां भी शामिल हों, को अलग परिवार इकाई मानकर मुआवजा दिया जाए। महिलाएं मुआवजे में अपना अलग हिस्सा भी मांग रही हैं। दौधन की शांति कोंडार का सवाल है कि अगर पति पूरा पैसा खर्च कर दे तो बच्चों का क्या होगा?

दौधन की शांति कोंदर का सवाल है कि अगर पति पूरा पैसा खर्च कर दे तो बच्चों का क्या होगा? फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी

विवाद सिर्फ मुआवजे तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों और अमित भटनागर का आरोप है कि आदिवासी जमीन अधिग्रहण से पहले कानून के तहत जरूरी ग्राम सभा बैठकें हुई ही नहीं और फर्जी दस्तावेज जमा किए गए। गौरतलब है कि, विश्रामगंज में ग्रामीणों द्वारा बुलाई गई ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से परियोजना का विरोध करते हुए निर्माण को अवैध बताया।

हालिया स्थिति 

4 मई को बनाई गई राज्य स्तरीय समिति प्रशासन की सबसे नई प्रतिक्रिया है। सरकार का कहना है कि मझगाय  और रुंझ परियोजनाएं पूरी होने पर अजयगढ़ ब्लॉक के 86 गांवों में 27,510 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी और 39.56 मिलियन घन मीटर पानी पीने और औद्योगिक उपयोग के लिए उपलब्ध होगा, जिससे करीब 45,000 किसान परिवारों को फायदा होगा।

हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन पहले भी लिखित आश्वासन दे चुका है लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया। फरवरी में वादा किया गया सर्वे विश्रामगंज में करीब छह हफ्ते तक शुरू नहीं हुआ और शिकायतों के समाधान से पहले ही निर्माण कार्य फिर शुरू हो गया।

फिलहाल भटनागर की गिरफ्तारी के बाद जय किसान संगठन ने गांव स्तर की समितियों और महिला नेतृत्व से आंदोलन आगे बढ़ाने की अपील की है। आंदोलन में शामिल महिलाएं और पन्ना-छतरपुर के आदिवासी परिवारों का कहना है कि जब तक जमीन पर उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।

रुंझ बांध निर्माण स्थल पर काम अब भी बंद है। दौधन बांध का निर्माण फिर शुरू हो चुका है। छतरपुर में विशेष जांच दल काम कर रहे हैं और राज्य स्तरीय समिति को लगभग 9 मई तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।

मुख्य सवाल अब भी बाकी हैं। क्या ग्राम सभा की प्रक्रिया सही तरीके से हुई थी? क्या मुआवजा वर्तमान जमीन कीमतों के अनुसार है? और क्या प्रशासन वे दस्तावेज जारी करेगा, जिनकी मांग प्रभावित ग्रामीण फरवरी से कर रहे हैं?

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