पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अमरोहा जिला, जो आम के बागान, नर्सरी और प्लांटेशन हब के रूप में पहचाना जाता है, आज जैविक खेती की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। इस परिवर्तन के केंद्र में है UP23 ऑर्गेनिक्स, जो व्यावसायिक स्तर पर वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन कर किसानों को पर्यावरण अनुकूल कृषि की ओर अग्रसर कर रहा है।
यूपी 23 के संस्थापक हैं ललित सिंह, जिन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पत्रकारिता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में परास्नातक करने के साथ साथ विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्य किया। लेकिन ग्रामीण भारत और कृषि संकट को करीब से समझने के बाद उन्होंने अपने गृह नगर हसनपुर लौटकर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने का निर्णय लिया। विभिन्न सफल वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों से प्रशिक्षण लेकर 2024 में 20 बेड से शुरुआत की, जो आज बढ़कर 120 बेड तक पहुंच चुकी है। वर्तमान में एक चक्र में लगभग 100 टन उत्पादन हो रहा है और साल में चार चक्र संचालित किए जाते हैं।
कैसे बनता है वर्मी कंपोस्ट?

इस इकाई में Eisenia Fetida प्रजाति के केंचुओं का उपयोग किया जाता है, जो जैविक अपशिष्ट को उच्च गुणवत्ता वाले वर्मी कम्पोस्ट में बदलते हैं। गौशालाओं और डेयरियों से प्राप्त गोबर का वैज्ञानिक प्रबंधन कर उसे खाद में परिवर्तित किया जाता है। इससे एक ओर कचरे का सदुपयोग होता है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की संरचना, जल धारण क्षमता और सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार वर्मी कम्पोस्ट के नियमित उपयोग से भूमि की जैविक सक्रियता बढ़ती है, फसल की जड़ों का विकास बेहतर होता है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इससे किसानों की इनपुट लागत घटती है और दीर्घकाल में उत्पादन स्थिर और गुणवत्तापूर्ण बनता है। UP23 ऑर्गेनिक्स न केवल खाद का उत्पादन कर रहा है, बल्कि केंचुओं का व्यावसायिक प्रजनन और बिक्री भी कर रहा है, साथ ही किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रहा है।
क्या है UP23?

कंपनी का नाम ‘UP23’ अमरोहा के परिवहन कोड से प्रेरित है, जो स्थानीय पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का प्रतीक है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश के लगभग सभी राज्यों में आपूर्ति की जा रही है, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के सेब बागानों में इसकी मांग बढ़ी है। साथ ही अपनी आम की बागवानी को भी पूरी तरह ऑर्गेनिक उत्पादन में परिवर्तित किया जा रहा है।
यह पहल केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक व्यापक आंदोलन बनती जा रही है। टिकाऊ कृषि की यह मॉडल कहानी आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकती है।
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