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क्या भारत-अमेरिका डील से देश के किसानों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा?

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-135 है। शुक्रवार, 6 फरवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसानों की चिंताएं और रत्नागिरी केमिकल प्लांट पर सरकार ने क्या कहा?


मुख्य सुर्खियां

मेघालय की ईस्ट जैंतिया हिल्स में एक गैर-कानूनी कोयला खदान में हुए संदिग्ध डायनामाइट धमाके में कम से कम 18 खनिकों के मारे जाने की खबर है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा से बात कर हालात का जायज़ा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और NDRF की टीम राहत कार्य में लगी हुई है। आपको बता दें कि इस जिले में पहले भी ऐसे हादसे हुए थे जिसमें एक बार में 15 मजदूर तक मारे जा चुके हैं। 


केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका अगले 4–5 दिनों में संयुक्त बयान जारी करेंगे। नए द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली किस्त पर मिड मार्च तक साइन होने की उम्मीद है और कुछ अमेरिकी टैरिफ घटकर 18% तक आ सकते हैं।


विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए “विविध स्रोतों” पर जोर देता है। रूस से तेल आयात पर भारत ने हमेशा ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है और विकल्पों पर नजर बनाए रखी है।


झारखंड के बोकारो में हाथियों के हमले में एक ही परिवार के तीन बुजुर्ग सदस्यों की मौत हो गई। वहीं तेलंगाना के जोगुलाम्बा जिले में मेले के दौरान कथित रूप से 50 बकरों की क्रूर बलि के मामले में दो लोगों पर केस दर्ज हुआ।


2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसे और मौतों में 11% की गिरावट दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक सुधार देखा गया, हालांकि कुछ राज्यों में हादसों में बढ़ोतरी भी सामने आई।


राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में बताया कि पिछले पांच सालों में 97 हज़ार 50 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वानिकी कार्यों के लिए उपयोग में लाया गया है।


राज्यसभा में मध्य प्रदेश के चावल क जीआई टैग देने का मुद्दा उठाया गया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदेश का चावल बेहतर क्वालिटी का है फिर भी जीआई टैग न होने के कारण पंजाब के व्यापारी इसे खरीदते हैं और अधिक मुनाफे में जीआई टैग के साथ बेचते हैं।

विस्तृत चर्चा

व्यापार समझौता और कृषि क्षेत्र पर प्रभाव

मुख्य विवाद और आशंकाएं भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते को लेकर भारतीय बाजार में संशय की स्थिति बनी हुई है। मुख्य चिंता यह है कि क्या इस डील के बाद भारतीय बाजार को अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए खोल दिया जाएगा। विपक्ष और कई किसान संगठनों ने इस पर आंदोलन की चेतावनी दी है क्योंकि उन्हें डर है कि अमेरिकी उत्पादों के आने से भारतीय किसानों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, जो पहले से ही अपनी आय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

अमेरिकी और भारतीय सरकार का रुख

अमेरिका का पक्ष: अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस के अनुसार, यह समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में पहुंच बढ़ाएगा। अमेरिकी कृषि विभाग ने संकेत दिया है कि भारत में आयात विस्तार की काफी संभावना है, लेकिन उच्च टैरिफ और सब्सिडी कार्यक्रम इसमें बाधा हैं। उनका मानना है कि इन बाधाओं को कम करने से अमेरिकी किसानों और उत्पादकों के लिए समान अवसर पैदा होंगे।

भारत का पक्ष: भारत के वाणिज्य और कृषि मंत्री बार-बार यह आश्वासन दे रहे हैं कि भारतीय किसानों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। फिलहाल इस ट्रेड डील पर कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हुआ है और विस्तृत विवरण का इंतजार किया जा रहा है।


रत्नागिरी केमिकल प्लांट और पर्यावरण संबंधी विवाद

विवाद की पृष्ठभूमि: इटली का कनेक्शन यह मामला महाराष्ट्र के रत्नागिरी (लोटे इंडस्ट्रियल एरिया) में स्थित लक्ष्मी ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड के केमिकल प्लांट से जुड़ा है। विवाद तब गहराया जब यह पता चला कि कंपनी ने इटली की एक पुरानी कंपनी ‘मैटरीना’ (Miteni) से मशीनरी और तकनीक खरीदी है। मैटरीना वही कंपनी है जिसे यूरोप के सबसे बड़े प्रदूषण मामले के कारण 2018 में बंद कर दिया गया था। इटली में इस कंपनी पर भूजल को जहरीला करने का आरोप था, जिससे लगभग 3 लाख लोग प्रभावित हुए थे।

पीफ़ा (PFAS) और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ रत्नागिरी के स्थानीय लोग, पर्यावरण समूह और नेता इस बात से चिंतित हैं कि क्या वही जोखिम भरी तकनीक यहाँ भी इस्तेमाल हो रही है।

इस प्लांट में पीफ़ा (PFAS) के इस्तेमाल की आशंका है, जिन्हें “फॉरएवर केमिकल” कहा जाता है क्योंकि ये पर्यावरण में कभी खत्म नहीं होते।

इन रसायनों के संपर्क में आने से कैंसर, लिवर और किडनी की समस्याएँ तथा इम्यून सिस्टम का कमजोर होना जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।

स्थानीय लोग अपनी सेहत को लेकर बेहद सतर्क हैं क्योंकि क्षेत्र का स्वास्थ्य ढांचा काफी कमजोर है।

सरकार और कंपनी का स्पष्टीकरण

सरकार का जवाब: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, प्लांट का प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम सही काम कर रहा है और खतरनाक कचरे का निपटान वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि भारत में पीफ़ा (PFAS) के लिए कोई विशेष पर्यावरण कानून मौजूद नहीं है।

कंपनी का पक्ष: लक्ष्मी ऑर्गेनिक का कहना है कि वे कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं और उनके प्लांट से कोई जहरीला पानी बाहर नहीं जा रहा है। कंपनी के अनुसार, यहां बनने वाले केमिकल ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उपयोग होते हैं। हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि भविष्य में पीफ़ा बनाने की उनकी योजना है या नहीं।

यह मामला अब सरकारी रिपोर्टों, राजनीतिक बयानों और जन दबाव के बीच उलझा हुआ है। स्थानीय लोग और विपक्षी नेता लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं ताकि इटली जैसी स्थिति रत्नागिरी में पैदा न हो।

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We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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