Skip to content

योजनाओं और हादसों के बीच इंदौर ने अनुभवों से कुछ नहीं सीखा?

Video Production: Pallav Jain

इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद भागीरथपुरा की तंग गलियों में आज पानी के टैंकरों की कतार लग गई है। एक के बाद एक टैंकर गलियों में घूम रहे हैं और लोग बाल्टियों से लेकर बड़े-बड़े बर्तनों तक में पानी भरते दिख रहे हैं। हालात की गंभीरता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि गली के बाहर, ठीक पुलिस थाने के सामने, भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

इस बीच नगर निगम के कुछ कर्मचारी गलियों में घूम-घूमकर लाउडस्पीकर के ज़रिए घोषणा कर रहे हैं,

“नर्मदा पाईपलाइन में शाम 6 बजे पानी छोड़ा जाएगा। इसका इस्तेमाल न करें। पानी टेस्टिंग के लिए छोड़ा जाएगा।”

बीते दो हफ्तों में भागीरथपुरा के रहने वाले 446 लोग नर्मदा पाईपलाइन से सप्लाई होने वाले दूषित पानी पीने के कारण अस्पतालों में भर्ती हुए—396 को डिस्चार्ज किया गया, जबकि 10 लोग आईसीयू में भर्ती रहे। सुनीता चंदेरिया भी तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रहीं। अब वह घर वापस आ गई हैं। वह कहती हैं कि आम तौर पर पानी साफ़ आता था मगर बीते 15 दिनों से पानी बदबूदार और बदरंग सा आ रहा था।

indore water tanker water crisis
भागीरथपुरा के रहवासी खाने और पीने के पानी के लिए अब टैंकर पर निर्भर हैं। फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल/ग्राउंड रिपोर्ट

मीडिया रिपोर्ट्स में 20 मौतों का दावा किया जा रहा है, हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कोई भी स्पष्ट आंकड़ा बताने के बजाए कहा कि उनकी सरकार आंकड़ों में नहीं पड़ रही, एक व्यक्ति की जान जाना भी उनके लिए कष्टकारक है। मगर स्थानीय कलेक्टर ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार 18 मृतकों के परिवार को घटना का मुआवज़ा दिया गया है।

इस घटना के बाद स्थानीय विधायक और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मौके पर पहुंच कर अधिकारीयों से जानकारी ली और स्थानीय लोगों से बात की। 1 जनवरी को मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि पीने के पानी में सीवरेज का पानी मिल गया था। उन्होंने आशंका जताई कि पुलिस चौकी के ठीक बगल में स्थित एक शौचालय के पास पाईपलाइन में लीक हुआ था।

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से बीमारियां, मौतें और गर्भपात ने शहर की जल–सीवरेज व्यवस्था की गहरी खामियों को उजागर कर दिया है। करोड़ों की योजनाओं और पुराने हादसों के बावजूद बुनियादी ढांचे की अनदेखी जारी है, जिसका खामियाज़ा आम लोग अपनी जान और सेहत से चुका रहे हैं।

geeta baai Indore water tragedy
किशोर ध्रुवकर ने इस हादसे में अपनी मां को खो दिया। फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल/ग्राउंड रिपोर्ट

“गंदे पानी से ही गई मां की जान”

भागीरथपुरा की बस्ती के मुख्य द्वार पर बने एक मकान की पहली मंज़िल पर किशोर ध्रुवकर अपने परिवार के साथ किराए के घर में रहते हैं। हर 2 दिनों में सरकारी पाइपलाइन से पानी सप्लाय किया जाता था जिसे वह छानकर, फिटकरी डालकर या उबालकर पीते थे। “मगर मम्मी की आदत थी कि वो नर्मदा जी का पानी ही पीती थी।” 

किशोर बताते हैं 23 दिसंबर के दिन उनकी मां रोज़ की तरह सुबह 10 से 11 बजे के करीब रेडीमेट कॉम्प्लेक्स में नौकरी करने गई हुई थीं। इसी दौरान उनकी मां को अचानक दस्त लगने शुरू हुए। शाम ढलते-ढलते उनकी हालत बिगड़ती चली गई। रात तक तबीयत गंभीर हो चुकी थी। अगले दिन, 24 दिसंबर की सुबह, उन्हें शहर के सरकारी महाराजा यशवंतराव अस्पताल (MY Hospital) के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। इसके बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 1 जनवरी 2026 को उनकी मां गीताबाई ध्रुवकर की मौत हो गई।

बच्चा गंवाने वाली आरती

आरती कोरी (32) लगभग 3 महीने की गर्भवती थीं जब 23 दिसंबर को उनकी तबियत ख़राब हुई। उल्टी-दस्त से पीड़ित आरती को उनके पति रंजीत कोरी पास स्थित एक छोटे से अस्पताल लेकर गए। मगर गर्भावस्था के चलते वहां इलाज करने से डॉक्टर ने मना कर दिया। पूरा दिन भटकने के बाद उन्होंने शहर के मरी माता चौराहा स्थित एक निजी अस्पताल में अपना इलाज करवाया। 

दवाएं लेने के बाद उन्हें कुछ राहत मिली, लेकिन तीन दिन बाद जननांग से रक्तस्राव शुरू हो गया। सोनोग्राफी में पता चला कि उनका भ्रूण नष्ट हो चुका है। इस घटना के बाद उनकी तबियत तो ठीक हो गई मगर मन टूट गया है। वह कहती हैं, “2-3 महीना बीत जाने के बाद ऐसा होगा तो बुरा तो लगेगा ही।” 

sewage line indore
हादसे के बाद सीवेज सिस्टम को सुधारने का काम अब युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल/ग्राउंड रिपोर्ट

नर्मदा का पानी और इंदौर

इंदौर के एनवायरनमेंट प्लान के अनुसार इंदौर जिले में मुख्य रूप से 348 किमी में कुल 5 नदियां बहती हैं। इसके अलावा 60 झीलें और तालाब और 1,51,939 बोरवेल पानी के मुख्य स्त्रोत हैं। 

साल 1977 में नर्मदा नदी से सिंगल पाइनलाइन के ज़रिए इंदौर को पानी मिलना शुरू हुआ। आज इसी स्त्रोत से सबसे ज्यादा 440 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) पानी सप्लाई किया जाता है। हालांकि स्मार्ट सिटी से सम्बंधित एक दस्तावेज के अनुसार नर्मदा से केवल 360 MLD पानी ही लिया जा रहा है। इसका पानी शहर से 70 किमी दूर जलूद में स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जाता है। 

दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के अनुसार इस प्लांट की कैपेसिटी 182 MLD ही है। सीएसई के अनुसार, “परियोजना के इंटेक वेल के आसपास नर्मदा के पानी में रेत की मात्रा अधिक होने के कारण, गाद निकालने और पंपों में गंभीर टूट-फूट की समस्या लगातार बनी रहती है।” 

शहरी मसलों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी मानते हैं कि नर्मदा से पानी लाने का प्रोजेक्ट फेल हो चुका है। “नर्मदा परियोजना में हफ्ते के सातो दिन और 24 घंटे पानी देने का वादा किया गया था। मगर कई जगहों में तो यह 2 दिन में एक दिन ही आता है।” 

Indore Municipal Corporation (IMC)
नगर निगम की गाड़ियां लोगों को नर्मदा का पानी न इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं। फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल/ग्राउंड रिपोर्ट

क्या घटनाओं से नहीं सीख रहा शहर?

कोडवानी इंदौर में हुई 3 घटनाओं को एक साथ देखते हैं। 

लगभग 28 साल पहले शहर के सुभाष नगर चौक के पास एक पानी की टंकी में लाश मिली थी। कोडवानी कहते हैं कि इस घटना से पता चलता है कि पानी की टंकी की कोई सुरक्षा नहीं हो रही। इसके बाद 31 मार्च 2023 को स्नेह नगर में एक बावड़ी के धंसने से 36 लोगों की मौत हो गई थी। वह कहते हैं कि बावड़ी में सीवेज जुड़ने से उसमें मीथेन बन रही थी। 

कोडवानी कहते हैं कि यह घटना एक सबक होना चाहिए था कि शहर का सीवेज सिस्टम चेक किया जाता और उसके प्रबंधन की योजना बनाई जाती, मगर ऐसा न होने के कारण ही अब भागीरथपुरा में तीसरी घटना हुई है।

स्थानीय पार्षद कमल वाघेला ने दावा किया कि उन्होंने जुलाई 2022 को क्षेत्र की पुरानी पेयजल पाईपलाइनों को बदलने का आग्रह नगर निगम के अधिकारीयों से किया गया था। दैनिक भास्कर के देवेन्द्र मीणा ने भी अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि जुलाई 2022 में 2 करोड़ 40 लाख की लागत से नई पानी की पाइपलाइन बिछाने का आदेश जारी हुआ था। मगर साढ़े 3 साल बीत जाने के बाद आज भी यह पूरा नहीं हो सका। 

indore swachh bharat abhiyan
हादसे के बाद भी कई गलियों में अब भी कीचड़ फैला हुआ है। फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल/ग्राउंड रिपोर्ट

सीवेज से हुए लीकेज का पानी पीने की पाईपलाइन में तभी मिल सकता है जब पीने की पाईपलाइन भी क्षतिग्रस्त हो। इंदौर स्मार्ट सिटी की वेबसाईट से प्राप्त एक दस्तावेज में शहर की पानी की पाईपलाइन की खस्ताहालत को स्वीकार किया गया है। दस्तावेज के अनुसार, “डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की हालत खराब है क्योंकि ऑपरेशनल ज़ोन या वॉटर डिस्ट्रिक्ट को ठीक से डिज़ाइन नहीं किया गया है। पाइपलाइनें बेतरतीब ढंग से बिछाई गई हैं। हालांकि, हाल ही में ईएसआर (Elevated Storage Reservoir) बनाने, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बिछाने जैसे कई डेवलपमेंट के काम हुए हैं, लेकिन मौजूदा सिस्टम को नए सिस्टम के साथ इंटीग्रेट करना अभी भी नहीं हुआ है।”  

इंदौर नगर निगम की सीवरेज योजना शाखा से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार 2008 से 2022 तक नगर निगम ने अलग-अलग योजनाओं में सीवेज प्रबंधन के लिए कुल 589 करोड़ रूपए खर्च किए हैं। मगर फिर भी 2025 का सच यही है कि भागीरथपुरा में न तो सीवेज का काम ही पूरा हुआ है और ना ही पीने के पानी की नई पाईपलाइन बिछ सकी है।

कोडवानी मानते हैं कि इंदौर में पुरानी घटनाओं से सीख लेने के बजाय उस पर लीपापोती करने पर ज़ोर दिया जाता है जिसके कारण सिस्टम की कमियों का न पता चलता है और ना ही उस पर काम होता है। वह कहते हैं, “इंदौर को अपनी सांख्यिकी दुरुस्त करनी होगी और फिर उससे सीखते हुए प्लानिंग करनी होगी।”

indore deaths ambulance
मरीजों को जल्द इलाज उपलब्ध करवाने के लिए गलियों में एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। फ़ोटो: शिशिर अग्रवाल/ग्राउंड रिपोर्ट

अभी भी गंदा पानी आ रहा

भागीरथपुरा के कई लोग अब भी गंदा पानी आने की शिकायत कर रहे हैं। कई जगहों पर लोगों ने यह शिकायत की के पानी का टैंकर उनके इलाके तक नहीं आ रहा है जिससे उन्हें मजबूरन बोरवेल का पानी पीना पड़ रहा है। 

भागीरथपुरा इलाके के ही चिराग मोहल्ला में रहने वाले अमन कश्यप हमें कीचड़ से सनी हुई अपनी गली दिखाते हैं। यहां पानी की फूटी हुई पाईपलाइन के किनारे कीचड़ भरा हुआ दिखाई देता है। कश्यप के अनुसार 2 महीना पहले यहां पाईपलाइन फूटी थी जिसे अब तक सही नहीं किया गया। 

इस घटना के बाद 10 जनवरी से प्रदेश भर में स्वच्छ जल अभियान की शुरूआत होने वाली है। शुक्रवार 9 जनवरी को हुई एक बैठक में बताया गया कि 13 जनवरी से टंकी के माध्यम से जलप्रदाय पुनः प्रारंभ किया जाएगा। साथ ही मेन पाइपलाइन से जुड़े सभी शासकीय बोरवेल सील किए जाएंगे, ताकि किसी भी प्रकार का कंटामिनेशन रोका जा सके। 

बैठक में बताया गया कि पूरे इंदौर शहर की जल आपूर्ति एवं भूजल गुणवत्ता की निगरानी के लिये सभी 105 ओवरहेड टैंकों पर इलेक्ट्रॉनिक/कंप्यूटरीकृत वाटर एनालाइज़र लगाए जाएंगे। 

इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान के लिए हमने मुख्य चिकित्सा अधिकारी माधव हसानी से संपर्क किया मगर उन्होंने कोई भी कमेन्ट करने से मना कर दिया। इसके अलावा स्थानीय मेयर पुष्यमित्र भार्गव और कलेक्टर शिवम वर्मा से संपर्क नहीं हो सका। अधिकारीयों से मामले पर प्रतिक्रिया मिलने पर खबर अपडेट की जाएगी। 

बैनर इमेज– अपनी 2 बेटियों के साथ आरती कोरी जिनका इस घटना के दौरान गर्भपात हो गया।

भारत में स्वतंत्र पर्यावरण पत्रकारिता को जारी रखने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट को आर्थिक सहयोग करें।

यह भी पढ़ें 

असफल नसबंदी के बाद गर्भवती हुई महिला के शिशु की गर्भ में ही मौत

कैल्शियम कार्बाइड गन से आंख गंवाने वालों का पछतावा, गुस्सा और दर्द

पर्यावरण से जुड़ी खबरों के लिए आप ग्राउंड रिपोर्ट को फेसबुकट्विटरइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सएप पर फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हमारा साप्ताहिक न्यूज़लेटर अपने ईमेल पर पाना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें।

Author

  • Shishir identifies himself as a young enthusiast passionate about telling tales of unheard. He covers the rural landscape with a socio-political angle. He loves reading books, watching theater, and having long conversations.

    View all posts Hindi Editor

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins