राखी नाथ (21) के लिए ज़िन्दगी के सबसे ख़ास पलों में से एक पल करीब था। राखी की शादी तय हो गयी थी और घर शादी-ब्याह के रंग में सजा हुआ था। मध्य प्रदेश के खरगोन जिला के टेकड़ी स्थित उनके घर में रस्म-अदायगी चल रही थीं।
22 अप्रैल को नाथ समुदाय से तअल्लुक रखने वाली राखी की हल्दी की रस्म थी। परिजनों ने स्थानीय हाट बाज़ार से हल्दी और चिक्शा (उबटन में हल्दी के साथ खुशबू के लिए मिलाया जाने वाला पदार्थ) ख़रीदा। शरीर पर हल्दी और उप्टन लगाया ही था कि अचानक राखी को गले में दर्द उठा। राखी से बोला नहीं जा रहा था और कुछ पल में शादी के घर में अफरा-तफरी मच गयी।
पिता गजु नाथ बताते हैं, “मैं घर पर नहीं था। घर से तुरंत राखी को खरगोन के जिला अस्पताल ले गए। यहां आईसीयू में रखने के बाद डॉक्टर ने इंदौर ले जाने को कह दिया।”
गजू बताते हैं कि जिला अस्पताल में सरकारी एम्बुलेंस न होने के कारण उन्हें 4000 रूपए देकर प्राइवेट वाहन से अपनी बेटी को इंदौर लाना पड़ा। वह बताते हैं, “दस बजे हम इंदौर के एमवाय अस्पताल पहुंचे। एक्स-रे, सोनोग्राफी और अन्य जांच हुई जो सामान्य निकली। सवेरे से शाम हो गयी लेकिन राखी को सूजन उतर-चढ़ रही थी।”
नाथ परिवार पर अचानक मुसीबतों का पहाड़ आ कर गिरा।

एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक यादव ने बताया, “परिजन युवती को गंभीर हालत में लेकर आये थे।…बाद में स्वजन बेहतर इलाज के लिए उसे निजी अस्पताल ले गए थे।”
नाथ परिवार प्राइवेट अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने कहा कि यहां पैसा ज़्यादा लगेगा। डॉक्टर ने हिदायत दी कि यही इलाज सरकारी अस्पताल में भी मिल जाएगा।
गजु नाथ कहते हैं, “हम प्राइवेट अस्पताल से एमवाय अस्पताल के लिए निकले, लेकिन वहां पहुंचते उससे पहले ही मेरी बेटी राखी ने दम तोड़ दिया।”
25 तारीख को ग्राम खामखेड़ा से बारात आनी थी। 27 को शादी थी। मगर 23 तारीख को राखी की अर्थी उठी, इसी दिन उस का मंडप सजना था।
मगर सवाल ये है कि हल्दी में आखिर ऐसा क्या था कि राखी की जान पर बन आई।
घातक मेटानिल येलो
राखी के होंठ सूज गए थे, पैरों पर चकते उभर आये थे और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। डॉ यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हल्दी से रिएक्शन और संक्रमण की आशंका पर उपचार शुरू किया गया था।
दैनिक भास्कर से बात करते हुए महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ धर्मेंद्र झंवर कहते हैं कि बाजार की खुली हल्दी में अक्सर सिंथेटिक डाई मेटानिल येलो को मिलाया जाता है। इसे शरीर पर लगाने से एलर्जी होती है। यह हाइपर-सेंसेटिविटी रिएक्शन टाइप-वन में आता है। यह आईजीई मेडिएटेड गंभीर एलर्जी होती है। इसमें अर्तिकेरिया होना, सांस लेने में तकलीफ आना, खुजाल, लाल ददोड़े आना आम होता है।
मेटानिल येलो पानी में घुल जाने वाली एक सिंथेटिक डाई होती है जिसका उपयोग टेक्सटाइल एवं पेपर इंडस्ट्री में किया जाता है। भारत में कई जगह हल्दी या पीले रंग की खाद्य सामग्री में अक्सर पीला रंग चढ़ाने के लिए इस पदार्थ का उपयोग किया जाता है जो खाद्य सामग्री को हानिकारक बना देता है। यह पदार्थ गुड़, दाल, हल्दी, लड्डू और अन्य सामग्री में मिलाया जाता है ताकि पीला रंग उभर कर आ सके।

मेटानिल येलो से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इससे ना केवल त्वचा संबंधित परेशानी होती हैं बल्कि यह लिवर और यूरिनरी ब्लैडर (मूत्राशय) को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। झंवर कहते हैं, “हल्दी में मिलावट एक गंभीर समस्या है। ऐसे मामलों में कई बार मरीज़ों को स्टेरॉयड देकर इलाज करना पड़ता है। कई बार वेंटीलेटर पर पहुंचने की स्थिति बन जाती है।”
मेटानिल येलो का उपयोग कोल्ड ड्रिंक और मिठाईयों में भी किया जाता है। इसका प्रभाव तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर पड़ता है। याददाश्त कमज़ोर होना, सोचने में दुविधा होना और अटैक्सिआ (शारीरिक समन्वय में असंतुलन) इसके आम लक्षण हैं। मेटानिल येलो जैसे पदार्थों की लंबे समय तक खपत करने से लिवर और किडनी खराब होने का खतरा भी बनता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ मेडिसिन की एक रिपोर्ट बताती है कि हल्दी में अक्सर मेटानिल येलो और सूडान रेड नामक पदार्थ पाए जाते हैं। यह दोनों कार्सिनोजेनिक (कैंसर पैदा करने वाला पदार्थ) और म्यूटाजेन यानि उत्परिवर्तन लाने वाले पदार्थ जिनसे आगे जा कर कैंसर हो सकता है, होते हैं। इन पदार्थों से ना केवल हल्दी की गुणात्मकता कम होती है बल्कि जानलेवा खतरा पैदा होता है। इसी वजह से कई सारे देशों में मेटानिल येलो को फ़ूड डाई (खाने को रंग देने के लिए) के रूप में उपयोग करने पर प्रतिबंध है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी मेटानिल येलो के खाद्य सामग्री में उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण उपभोगता से उम्मीद रखता है कि वे राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी को हमेशा मिलावटी खाद्य सामग्री के विषय में सूचित करें।
भारत में मिलावट का बाज़ार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार हर साल अमूमन 60 करोड़ लोग, यानी हर दस व्यक्ति में से एक व्यक्ति संदूषित खाद्य सामग्री के सेवन के चलते बीमार हो जाता है। इससे हर साल 4 लाख 20 हज़ार लोगों की मौत हो जाती है। ऐसी बीमारियां बच्चों में 40 फीसद होती है और हर साल 1 लाख 25 हज़ार मौते होती हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले दशक में हर चार में से एक खाद्य सामग्री का सैंपल सुरक्षा मानक पर खरा नहीं उतरा। इन अवगुण को नॉन-कन्फोर्मिटी कहते हैं जब खाद्य सामग्री एक या उससे अधिक गुणवत्ता पैमाने पर चूक जाती है।
इनमें सबसे गंभीर श्रेणी ‘अनसेफ’ की होती है, जब खाद्य सामग्री में जान-माल हानि सम्बंधित टॉक्सिक एवं केमिकल पदार्थों का मिश्रण किया जाता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) की इसी रिपोर्ट के अनुसार 15 फीसद खाद्य सामग्री ‘अनसेफ’ श्रेणी में थी।

कौन ज़िम्मेदार?
मिलावटी हल्दी के कारण स्वास्थ्य ख़राब होने का यह अकेला मामला नहीं है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार इंदौर और खरगोन जिले के कुल 4 लोगों को इसी तरह की शिकायत के चलते एमवाय अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
15 अप्रैल को इंदौर ज़िले के दूधिया निवासी और फैक्ट्री कर्मचारी गोलू कौशल की शादी हुई। फेरे के दिन से बीमार चल रहे गोलू को तबियत बिगड़ने पर 22 अप्रैल को एमवाय अस्पताल में भर्ती किया गया। वहां वे आईसीयू में भर्ती थे। तमाम जांचों के अलावा अस्पताल ने परिवारजन से हल्दी का सैंपल भी लिया था। लेकिन तबियत में सुधार होने से इलाज पूरा ना करते हुए गोलू अस्पताल से दोबारा गांव लौट गए। वे अभी ठीक हैं।
अखबारों में खबर छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम राखी के घर पहुंच पंचनामा तैयार किया। खरगोन सीएमएचओ डॉ डीएस चौहान कहते हैं, “मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। मैंने स्वयं भी पूरी स्थिति की जानकारी ली है। सरकारी एम्बुलेंस का उपलब्ध ना होना जानकारी में नहीं है। इसके साथ ही हम राखी का मेडिकल हिस्ट्री पता कर रहे हैं। पीएम ना होने से कुछ भी कहना मुमकिन नहीं है।”
वहीं मुख्य खाद्य अधिकारी एचएल अवास्या बताते हैं, “घटनाक्रम संज्ञान में आने के बाद कसरावद-टेकड़ी क्षेत्र से मसालों के सैंपल लेकर जांच के लिए भोपाल भेजे हैं। रिपोर्ट में गड़बड़ी आने पर नियमानुसार कार्यवाही होगी।”
मगर राखी के पिता को प्रशासन से कोई ख़ास उम्मीद नहीं है। गजु कहते हैं, “हमारी बेटी चली गयी अब क्या ही कहो किसी से। बस इतनी ही प्रार्थना है कि कल से किसी और के साथ ऐसा ना हो।”
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