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रिपोर्टर से बात: मेघनगर में प्रदूषण से प्रभावित आदिवासी

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पर्यावरण आज | दिल्ली को यमुना की बाढ़ से बचाने के लिए 5 किलोमीटर की दीवार बनेगी। मध्य प्रदेश में टेक उद्योगों के लिए 9625 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान बन सकता है। कर्नाटक में किसानों का धरना जारी है, यूरोप में गर्मी से 50 हज़ार से ज़्यादा मौतें हुईं।

प्रमुख हेडलाईन्स

दिल्ली को यमुना की बाढ़ से बचाने के लिए 5 किलोमीटर की कंक्रीट की दीवार बनाई जाएगी। बाढ़ प्रबंधन के लिए 622 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जिसमें दीवार के साथ ड्रेनेज सिस्टम को सुधारा जाएगा। यह फैसला फ्लड कंट्रोल बोर्ड की 40वीं बैठक में लिया गया।


मध्य प्रदेश सरकार ने ग्वालियर में हाइपरस्केल डेटा सेंटर, भोपाल में लिथियम सेल मैन्युफैक्चरिंग समेत 5 बड़ी टेक इंडस्ट्रीज़ के लिए ज़मीन आवंटन का लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया है। मध्य प्रदेश में टेक्नोलॉजी सेक्टर में 9625 करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट की संभावना है।

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र आने वाले दिनों में और गहरा होकर एक ‘डिप्रेशन’ में बदल सकता है, और अंततः एक पूर्ण चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।

इसके 28 अक्टूबर को उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तट पर पहुंचने का अनुमान है।


कर्नाटक के बैरमंगला सर्कल के गांवों में किसान 593 दिनों से धरने पर बैठे हैं। ये लोग बिदादी हरोहल्ली में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड टाउनशिप के लिए ज़मीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से खेती, रेशम और डेयरी से अपना घर चलाने वाले परिवारों की आजीविका प्रभावित होने के आरोप हैं।

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यूरोप में इस वर्ष गर्मी से 50 हज़ार से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं, जो वर्ष 2022 से 71 फीसदी ज़्यादा हैं। सबसे ज़्यादा मौतें इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में होने का अनुमान है।


रिपोर्टर से बात

हर शनिवार हम अपने रिपोर्टर्स से उनकी हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट्स पर चर्चा करते हैं। आज हम बात करेंगे हमारे हिंदी एडिटर शिशिर अग्रवाल से, जो मध्य प्रदेश के मेघनगर में इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन से प्रभावित ग्रामीणों पर रिपोर्ट कर लौटे हैं। शिशिर, कैसा रहा आपका अनुभव और क्या कुछ इस रिपोर्ट से निकलकर सामने आया है?

मेघनगर स्थित फैक्ट्री और साथ में किसानों के खेत | फोटो: शिशिर अग्रवाल
मेघनगर स्थित फैक्ट्री और साथ में किसानों के खेत | फोटो: शिशिर अग्रवाल

पल्लव मेघनगर झाबुआ जिले में स्थित मध्य प्रदेश के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र में से एक है. 1984 में विकसित किया गया यह एरिया 223 हेक्टेयर में फैला है. मगर 10 से भी अधिक सालों से यहां के नागरिक जल और वायु प्रदूषण से प्रभावित हैं. दरअसल यहां ज़्यादातर फैक्ट्रियां एग्रोकेमिकल्स बनाती हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि इससे निकलने वाला लीक्विड वेस्ट उनके जल स्त्रोतों और धुआं उनकी फसलों को ख़राब कर देता है.

पत्रकार होने से पहले एक नागरिक के तौर पर इस स्थिति ने मुझे प्रभावित किया. कई बार हम ये सुनते हैं कि उद्योगों से लोगों को नौकरियां मिलती हैं और विकास होता है. मगर इस आदिवासी क्षेत्र को देखकर तो इसपर बिल्कुल भरोसा नहीं होता.

मैं 2021 में पहली बार झाबुआ गया था. इस दौरान मैंने पहली बार लाल पानी से भरे तालाब और नाले देखे थे. तब से लेकर अब तक यहां लगातार प्रदर्शन होते रहे. हर प्रदर्शन के बाद कलेक्टर कुछ दिनों के कुछ फैक्ट्रीज बंद कर देते. मगर बाद में सब कुछ पहले जैसा ही हो जाता और ग्रामीण प्रदूषण झेलते रहते.

सबसे बड़ी बात तो ये है कि भोपाल में 1980 के दशक में एग्रोकेमिकल बनाने वाली ही एक फैक्ट्री के कारण बहुत बड़ी त्रासदी हुई थी. और अब फिर ऐसी ही इंडस्ट्रीज पर प्रदूषण फैलाने का आरोप है.

इस बार सितम्बर में भी ऐसा ही एक प्रदर्शन हुआ जिसके बाद स्थानीय कलेक्टर ने 4 फैक्ट्रियां सील कर दीं. हालांकि 15 दिन बाद इनमें से एक खुल भी गई. तो मैंने इस पर वीडियो रिपोर्ट करने का सोचा ताकि लोगों को दिखाया जा सके कि असल में यह पानी कैसा है और इसका प्रभाव क्या है.

यह वीडियो रिपोर्ट हमारे यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है जहां इसे देखा जा सकता है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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