ई-20 से ज़्यादा ब्लेंडिंग की अनुमति देने की तैयारी, भारत की चीनी आत्मनिर्भरता घटी, टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबेटेट में खनन मंज़ूरी, मप्र में वाइल्डलाइफ एसओएस को राहत नहीं। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
केंद्र सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों के जरिए E20 के वर्तमान स्तर से अधिक ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर काम कर रही है। यह जानकारी प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने ‘इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026’ में दी। पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं।
भारत का चीनी आत्मनिर्भरता अनुपात 2024 में घटकर 97.4% और 2025 में 93% रह गया, जबकि शुरुआती स्टॉक 5.1 मिलियन टन के निचले स्तर पर है। भारतीय रिफाइनरों ने आयातित कच्चे माल से निर्मित 2.5 लाख टन सफेद चीनी घरेलू बाजार में जारी करने का प्रस्ताव रखा है।
एनजीटी (NGT) की संयुक्त समिति ने रिपोर्ट दी है कि राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) के 4 किमी के भीतर 7 खदानें लीज पर दी गई हैं। सबसे नजदीकी खदान क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट सीमा से केवल 1.6 किमी दूर है। सरिस्का में बाघों की संख्या 50 से अधिक हो चुकी है और ये सभी खदानें 10 किमी इको-सेंसिटिव जोन के अंतर्गत आती हैं।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नरोरा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद यहां सैकड़ों बीघा धान और मक्के की फसल जलमग्न हो गई है। वाराणसी, प्रयागराज, रायबरेली, गोंडा, बहराइच और गोरखपुर जैसे जिलों में अलर्ट जारी किया गया है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (ग्वालियर पीठ) ने वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रमुख कार्तिक सत्यनारायण को दी गई अंतरिम राहत वापस ले ली है। यह मामला चंबल संभाग में 10 तेंदुओं के कथित शिकार और उनके अंगों की तस्करी की जांच से जुड़ा है। कोर्ट ने उन्हें 21 सितंबर को स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) के सामने पेश होने का आदेश दिया है।
हालिया बारिश के बाद मध्य प्रदेश में 1 जून से 9 सितंबर तक बारिश का कुल घाटा घटकर 7% (औसत 856 मिमी के मुकाबले 794.1 मिमी बारिश) रह गया है। आलीराजपुर जिले में सबसे अधिक 55% बारिश की कमी (345 मिमी बनाम 773.3 मिमी) दर्ज की गई, जबकि भोपाल में सामान्य से 13% अधिक (974 मिमी बनाम 865.6 मिमी) बारिश दर्ज हुई है।
विस्तृत चर्चा
ओडिशा में 5 ओरंगुटान के बच्चे मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच शुरू हो गई है। वन्य अधिकारियों का कहना है कि इन ऑरंगुटानों ने शायद इंसानों के साथ समय बिताया होगा। इस बारे में विस्तार से जानिए वाहिद भट से।
ओडिशा ओरंगुटान बचाव: वन्यजीव तस्करी का एक रहस्य
ओडिशा के बालेश्वर (बालासोर) जिले के भोगराई इलाके में एक बगीचे के पास पांच छोटे ओरंगुटान लावारिस हालत में पाए गए। सुबह के समय स्थानीय लोगों ने इन्हें देखा और शुरुआत में बंदर समझकर बाद में वन विभाग को सूचित किया।
बरामद किए गए पांच ओरंगुटान में तीन नर (Male) और दो मादा (Female) हैं। इन सभी की उम्र एक वर्ष से कम (लगभग 6 से 7 महीने) बताई गई है।
सभी ओरंगुटान पूरी तरह स्वस्थ थे और वे मनुष्यों से बिल्कुल भी भयभीत नहीं थे। उनका यह व्यवहार दर्शाता है कि वे पहले भी इंसानों के संपर्क में रह चुके हैं।
प्रजाति का महत्व
बोर्नियन ओरंगुटान प्राकृतिक रूप से केवल बोर्नियो द्वीप (Borneo Island) पर पाए जाते हैं और IUCN की अति-संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध हैं।
पांच शिशुओं का एक साथ मिलना अत्यंत असामान्य है, क्योंकि मादा ओरंगुटान आमतौर पर एक समय में केवल एक ही बच्चे को जन्म देती है।
तस्करी का संदेह और जांच
वन्यजीव अधिकारियों को संदेह है कि इन्हें अवैध तस्करी के जरिए लाया जा रहा था। सम्भावना है कि तस्करों को पकड़े जाने का डर हुआ और वे इन्हें छोड़कर भाग गए, या फिर किसी खरीदारी/सौदे के विफल होने के बाद इन्हें वहां छोड़ दिया गया।
क्षेत्र के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले जा रहे हैं और उन गुप्त या छोटे रास्तों की जांच की जा रही है जिनका इस्तेमाल मुख्य सड़कों से बचकर जानवरों को लाने-ले जाने के लिए किया गया हो सकता है।
इस मामले की जांच वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) और CITES के प्रावधानों के तहत की जा रही है।
वर्तमान देखभाल और क्वारंटीन
इन सभी पांचों बच्चों को भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन प्राणी उद्यान (Nandankanan Zoological Park) भेज दिया गया है। वहां डॉक्टरों और विशेषज्ञों की देखरेख में इन्हें क्वारंटीन (Quarantine) में रखा गया है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल और रहस्य यह है कि बोर्नियो द्वीप के ये जीव बिना किसी आधिकारिक जानकारी के भारत के ओडिशा राज्य तक आखिर कैसे पहुंचे? इसका स्पष्ट जवाब मिलना अब भी बाकी है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।
Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India
We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.
Connect With Us
Send your feedback at greport2018@gmail.com
Newsletter
Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.
When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.
Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.






